उत्तर प्रदेश में सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र की शुरुआत, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के नए रास्ते उत्तर प्रदेश एक महीने पहले 62
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में औद्योगिक विकास और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र परियोजना को मंजूरी दी है, जिसे हब एंड स्पोक मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में औद्योगिक क्रांति की नई पहल

उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के युवाओं को हुनरमंद बनाने और उन्हें उद्योग एवं उद्यमिता के साथ एक ही मंच पर जोड़ने के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी योजना लेकर आई है। इसका नाम सरदार वल्लभभाई पटेल रोजगार एवं औद्योगिक क्षेत्र (SVPEIZ) रखा गया है। यह परियोजना अब कागजों से निकलकर जमीनी स्तर पर काम शुरू करने के लिए तैयार है। उत्तर प्रदेश दिवस के दौरान इस योजना की घोषणा की गई थी। अब इसके पहले चरण में कुल 16 केंद्रों की स्थापना और विकास का लक्ष्य रखा गया है।

इन केंद्रों के निर्माण और संचालन का जिम्मा अलग-अलग विभागों को सौंपा गया है। इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग 05 केंद्र बनाएगा, जबकि यूपीसीडा (UPSIDA) के जिम्मे भी 05 केंद्र होंगे। इसके अतिरिक्त यूपीईडा (UPEIDA) 02, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) 02, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण 01 और गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण 01 केंद्र का विकास करेगा। इस पूरी परियोजना को 09 हब एंड स्पोक मॉडल के नेटवर्क पर तैयार किया जाएगा।

निवेश और औद्योगिक विकास में तेजी

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के प्रमुख सचिव शशि भूषण लाल सुशील ने जानकारी दी कि वर्ष 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ी है। राज्य में न केवल भारी निवेश आ रहा है, बल्कि नए औद्योगिक क्षेत्रों का भी विस्तार हो रहा है। तकनीकी बदलावों के बीच भविष्य में कुशल मानव संसाधन की मांग बढ़ना तय है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शी सोच के अनुसार ही एसवीपीईआईजेड (SVPEIZ) की रूपरेखा तैयार की गई है, जिससे स्थानीय युवाओं को उद्योग जगत की जरूरतों के हिसाब से प्रशिक्षण दिया जा सके और उन्हें बेहतर रोजगार मिल सके।

09 हब एंड स्पोक जोन में विभाजन

संपूर्ण प्रदेश को बेहतर प्रबंधन के लिए 09 अलग-अलग हब एंड स्पोक जोन में बांटा गया है। इन क्षेत्रों में गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, हापुड़ के साथ मेरठ, बागपत और बुलंदशहर शामिल हैं। इसके अलावा सहारनपुर मंडल, मुरादाबाद एवं बरेली मंडल, आगरा एवं अलीगढ़ मंडल, लखनऊ एवं अयोध्या मंडल, कानपुर एवं प्रयागराज मंडल को भी इसमें जगह दी गई है। साथ ही चित्रकूट, झांसी, विंध्याचल मंडल, वाराणसी, आजमगढ़ मंडल तथा गोरखपुर, बस्ती एवं देवीपाटन मंडल को भी इस विकास प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है। हर जोन का विकास वहां की उपलब्ध औद्योगिक क्षमता और निवेश की संभावनाओं के आधार पर किया जाएगा।

वन स्टॉप इंडस्ट्रियल और रोजगार इकोसिस्टम

हर एक एसवीपीईआईजेड केंद्र को एक एकीकृत 'वन स्टॉप इंडस्ट्रियल, स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट इकोसिस्टम' के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां युवाओं के लिए कौशल विकास केंद्र, औद्योगिक प्लॉट और प्लग एंड प्ले औद्योगिक शेड की सुविधा होगी। उद्यमियों के लिए यहां साझा सुविधा केंद्र, रोजगार और उद्यमिता सहायता केंद्र भी मौजूद रहेंगे। इसके अलावा डिजिटल साक्षरता, विदेशी भाषा सीखने की सुविधा और व्यावसायिक सेवाएं भी प्रदान की जाएंगी। प्लग एंड प्ले मॉडल के कारण उद्यमियों को बनी-बनाई औद्योगिक जगह मिलेगी, जिसमें बिजली, पानी और सड़कों जैसी जरूरी बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद होंगी, ताकि काम तुरंत शुरू हो सके।

इस परियोजना के तहत जमीन के उपयोग को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। इसमें हरित क्षेत्र, सड़कों के जाल और वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए अलग-अलग जगह तय की गई है। अगर कहीं जमीन कम पड़ती है, तो वहां बहुमंजिला औद्योगिक परिसर और फ्लैटेड फैक्ट्री का मॉडल लागू किया जाएगा। हर हब के लिए एक विशेष प्रयोजन वाहन यानी एसपीवी (SPV) बनेगा, जिसका अध्यक्ष संबंधित हब का मुख्य निवेशक होगा, जिससे उद्योगों का जुड़ाव बना रहे।

गुजरात और महाराष्ट्र के मॉडल से मिली सीख

परियोजना की बारीकियों को समझने के लिए अधिकारियों की एक टीम ने गुजरात और महाराष्ट्र का दौरा किया था। वहां टाटा समूह द्वारा चलाए जा रहे औद्योगिक एवं कौशल विकास मॉडल का गहन अध्ययन किया गया। वैश्विक स्तर के मानकों और उन सफल प्रयोगों को ध्यान में रखते हुए ही उत्तर प्रदेश के लिए यह मॉडल तैयार किया गया है। परियोजना को चलाने में बड़ी और प्रतिष्ठित औद्योगिक कंपनियों की भागीदारी भी ली जाएगी। जहाँ जमीन उपलब्ध है, वहां काम फौरन शुरू होगा और बाकी जगहों पर संबंधित प्राधिकरणों के साथ समन्वय किया जाएगा। प्रशिक्षण का काम बुनियादी ढांचे के साथ ही चलता रहेगा ताकि उद्योगों के तैयार होते ही कुशल युवा मिल सकें।

भविष्य की औद्योगिक अर्थव्यवस्था की नींव

प्रमुख सचिव ने साफ किया कि सरकार का मकसद सिर्फ ईंट-पत्थर का औद्योगिक परिसर बनाना नहीं है। यह स्थान नवाचार, उद्यमिता और रोजगार का केंद्र बनेगा। यह पहल राज्य की युवा शक्ति को आने वाली औद्योगिक अर्थव्यवस्था के लिए तैयार करेगी और उत्तर प्रदेश को देश का बड़ा मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने का सपना पूरा करेगी।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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