'एक बिहारी सब पर भारी'... वैभव सूर्यवंशी के ऐतिहासिक डेब्यू से झूमा समस्तीपुर, खेल प्रेमियों की 5 महीने पुरानी भविष्यवाणी हुई सच बिहार 2 महीने पहले 71
बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले 15 वर्षीय युवा क्रिकेट सितारे वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय टीम की जर्सी पहनकर मैदान पर कदम रखा, जिसके बाद उनके गृह जनपद में उत्सव का माहौल है।

प्रतिभा कभी उम्र की मोहताज नहीं होती और जब इरादे मजबूत हों, तो सफलता कदम चूमती ही है। बिहार के समस्तीपुर जिले के रहने वाले युवा क्रिकेट सितारे वैभव सूर्यवंशी ने महज 15 वर्ष की आयु में भारतीय क्रिकेट टीम की ओर से इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ अपना अंतरराष्ट्रीय पदार्पण (डेब्यू) कर इतिहास के पन्नों में अपना नाम स्वर्णिम अक्षरों से दर्ज करा लिया है। वैभव के इस ऐतिहासिक मुकाबले में कदम रखते ही पूरे समस्तीपुर सहित पूरे बिहार के खेल प्रेमियों में जश्न की लहर दौड़ गई है और हर तरफ केवल वैभव के संघर्ष और उनकी इस ऐतिहासिक सफलता की चर्चा हो रही है।

खेल प्रेमियों की वो भविष्यवाणी जो शत-प्रतिशत सच साबित हुई

इस ऐतिहासिक पल की सबसे दिलचस्प बात यह है कि समस्तीपुर के स्थानीय खेल प्रेमियों ने वैभव के इस सुनहरे सफर की भविष्यवाणी बहुत पहले ही कर दी थी। खेल के प्रति गहरी समझ रखने वाले स्थानीय प्रशंसकों मनी ग्रिव, धीरज कुमार और दीपक कुमार ने आज से करीब 5 महीने पहले ही यह बड़ा दावा किया था कि वर्ष 2026 में वैभव सूर्यवंशी न केवल भारतीय टीम का हिस्सा बनेंगे बल्कि अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू भी करेंगे।

जिस समय यह दावा किया गया था, उस समय कई लोगों को यह बात महज एक अति-उत्साही अनुमान या कोरी कल्पना लगी थी। लेकिन आज जब वैभव इंग्लैंड के दौरे पर भारतीय राष्ट्रीय टीम की जर्सी पहनकर मैदान पर उतरे, तो इन खेल प्रेमियों का अटूट विश्वास और भविष्यवाणी शत-प्रतिशत सच साबित हुई। इस बड़ी सफलता के बाद पूरे क्षेत्र के लोग एक बार फिर उन प्रशंसकों के पास पहुंचे जिन्होंने सबसे पहले वैभव की इस छिपी हुई असाधारण प्रतिभा पर अपना पूरा भरोसा जताया था। इस समय उन सभी के चेहरों पर गर्व, अपार खुशी और जीत का संतोष साफ तौर पर देखा जा सकता था।

'एक बिहारी सब पर भारी' और वैभव का शानदार सफर

वैभव के इस अभूतपूर्व डेब्यू पर खुशी से गदगद स्थानीय खेल प्रेमी दीपक कुमार ने बताया कि वैभव का भारतीय क्रिकेट टीम की मुख्य धारा में पहुंचना पूरी तरह से तय माना जा रहा था। उन्होंने वैभव के शुरुआती प्रदर्शन पर बात करते हुए कहा कि भले ही अपने पदार्पण मुकाबले में इस युवा खिलाड़ी ने 10 गेंदों पर केवल 14 रन की पारी खेली हो, लेकिन इस बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि महज 15 वर्ष की बेहद कम उम्र में भारतीय टीम की राष्ट्रीय जर्सी पहनना अपने आप में एक बहुत बड़ी ऐतिहासिक उपलब्धि है।

दीपक ने आगे कहा, "वैभव ने इतनी छोटी उम्र में देश का प्रतिनिधित्व कर इतिहास रच दिया है। अब हम सभी की यही दिली इच्छा है कि जिस प्रकार वैभव ने आईपीएल (IPL) के बड़े मंच पर खुद को साबित किया था, उसी तरह वह भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए भी लगातार शानदार प्रदर्शन करें और पूरी दुनिया के सामने यह साबित कर दें कि 'एक बिहारी सब पर भारी' होता है।"

धैर्य रखने की सलाह और दिग्गजों का उदाहरण

वहीं, स्थानीय खेल प्रेमी मनी ग्रिव ने कहा कि वैभव की इस शानदार उपलब्धि को देखकर उनका सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। उन्हें हमेशा से इस बात का पूरा विश्वास था कि वैभव अपनी बेहतरीन खेल शैली और कड़ी मेहनत के बल पर भारतीय क्रिकेट टीम का दरवाजा जरूर खटखटाएगा। उन्होंने इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय मुख्य रूप से वैभव के माता-पिता के निस्वार्थ त्याग और उनके प्रारंभिक कोचों के उचित मार्गदर्शन को दिया, जिन्होंने बचपन से ही उनकी प्रतिभा को सही दिशा में मोड़ने का काम किया। इसके साथ ही मनी ग्रिव ने खेल प्रशंसकों से थोड़ा धैर्य रखने की अपील भी की। उन्होंने भारतीय क्रिकेट इतिहास के दो महान दिग्गजों का उदाहरण देते हुए कहा:

  • भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी भी अपने करियर के शुरुआती दौर में काफी संघर्ष कर चुके थे।
  • क्रिकेट के भगवान माने जाने वाले सचिन तेंदुलकर के अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत भी बहुत आसान नहीं रही थी।
  • वैभव अभी बेहद युवा हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को ढालने के लिए कुछ और मैच खेलने का अवसर मिलना चाहिए, जिसके बाद उनकी प्रतिभा का असली निखार दुनिया के सामने आएगा।

समस्तीपुर का नाम वैश्विक पटल पर चमका

समस्तीपुर के धमौन निवासी छात्रधारी ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि वैभव सूर्यवंशी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि के कारण आज समस्तीपुर जिले का नाम पूरे देश और दुनिया में बेहद सम्मान के साथ लिया जा रहा है। वैसे तो समस्तीपुर की अपनी एक अलग ऐतिहासिक पहचान रही है, लेकिन खेल के मैदान पर वैभव ने जिले को एक बिल्कुल नई और बेहद ऊंची पहचान दिलाई है, जिससे हर कोई खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है।

वहीं दूसरी ओर, धीरज कुमार वैभव के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए काफी भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि वे वैभव को उनके बचपन के दिनों से जानते हैं। धीरज ने पुरानी यादें साझा करते हुए कहा कि वैभव कुछ वर्ष पहले जिस खेल मैदान पर स्थानीय बड़े खिलाड़ियों के साथ कड़ी धूप में पसीना बहाते और अभ्यास करते थे, आज उसी कठिन साधना का परिणाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान पर दिखाई दे रहा है। धीरज ने भावुक होकर कहा, "बचपन में जब मैं दिग्गज खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर को खेलता देखता था, तो मुझे उनके गृह राज्य के बारे में ज्यादा पता नहीं होता था। लेकिन आज मैं बहुत गर्व के साथ यह कह सकता हूं कि मैं उसी समस्तीपुर जिले का निवासी हूं, जहां वैभव सूर्यवंशी ने जन्म लिया और अपने खेल से दुनिया को चकित कर दिया। यह पूरे जिले के लिए अत्यंत गौरवशाली क्षण है।"

उम्र बेहद कम लेकिन खेल का स्तर बहुत बड़ा

समस्तीपुर के एक अन्य स्थानीय खिलाड़ी दीपक ने भी इस उपलब्धि को अपनी खुद की मेहनत के सफल होने जैसा बताया। उन्होंने गर्व से कहा कि वे उसी मिट्टी से ताल्लुक रखते हैं जहां वैभव सूर्यवंशी जैसा हीरा पैदा हुआ है। आज समस्तीपुर का हर युवा खिलाड़ी वैभव को अपना आदर्श मानकर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। दीपक ने वैभव के अब तक के शानदार सफर को याद दिलाते हुए बताया कि वैभव की खेल यात्रा वास्तव में किसी सपने जैसी है:

  • वैभव ने महज 12 वर्ष की छोटी उम्र में बिहार के लिए रणजी ट्रॉफी क्रिकेट खेलकर सबको हैरान कर दिया था।
  • इसके बाद आईपीएल (IPL) के बड़े मंच पर अपनी बेखौफ और आक्रामक बल्लेबाजी शैली से दुनिया भर के दिग्गजों को प्रभावित किया।
  • अब अंततः केवल 15 वर्ष की आयु में भारतीय टीम में पदार्पण कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उनके भीतर एक महान खिलाड़ी बनने की सभी क्षमताएं मौजूद हैं।

दीपक का मानना है कि क्रिकेट असीम संभावनाओं का खेल है और वैभव सूर्यवंशी आने वाले समय में देश के लिए कई बड़े कीर्तिमान स्थापित करेंगे। उन्होंने कहा कि अब जब भी वे अन्य राज्यों में खेलने जाएंगे, तो सिर उठाकर कहेंगे कि वे उसी जिले से आते हैं जहां से वैभव सूर्यवंशी जैसे खिलाड़ी निकले हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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