सहारनपुर नगर निगम की बड़ी पहल: अब मृत गायों और पशुओं का सम्मानजनक ढंग से होगा अंतिम संस्कार, लगाया जा रहा है आधुनिक इंसिनरेटर उत्तर प्रदेश एक दिन पहले 5
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में अब मृत पशुओं के सम्मानजनक और वैज्ञानिक निस्तारण के लिए इलेक्ट्रॉनिक अंत्येष्टि स्थल तैयार किया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को बड़ी राहत मिलेगी।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर शहर से पशुपालकों और जीव प्रेमियों के लिए एक बेहद राहतभरी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। सहारनपुर नगर निगम ने मृत पशुओं, विशेष रूप से पूजनीय गायों के अंतिम संस्कार को लेकर एक ऐतिहासिक और संवेदनशील निर्णय लिया है। अब शहर में मृत गायों और अन्य बड़े पशुओं को न तो खुले में फेंका जाएगा और न ही उन्हें दफनाने के लिए परेशान होना पड़ेगा। नगर निगम ने करोड़ों रुपये की भारी-भरकम लागत से एक अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक पशु अंत्येष्टि स्थल तैयार किया है, जहां पूरी गरिमा और वैज्ञानिक पद्धति के साथ बेजुबानों का अंतिम संस्कार संपन्न किया जा सकेगा।

आस्था और आधुनिक तकनीक का बेहतरीन समन्वय

हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में गाय को अत्यंत पूजनीय स्थान प्राप्त है। सहारनपुर नगर निगम की कान्हा उपवन गौशाला इस दिशा में पहले से ही बेहतरीन कार्य कर रही है। वर्तमान में इस सरकारी गौशाला में 500 से अधिक निराश्रित गोवंश की देखभाल की जा रही है। इस गौशाला की ख्याति केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि देश और दुनिया भर में फैली हुई है। यहां गाय के गोबर और गोमूत्र की मदद से 20 से अधिक विभिन्न प्रकार के उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनकी मांग विदेशों तक में है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आम लोग इस गौशाला में आकर स्वेच्छा से गायों की सेवा करते हैं। इसी आस्था और सम्मान को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने अब उनके जीवन के अंतिम सफर को भी गरिमापूर्ण बनाने की ठानी है।

वर्तमान व्यवस्था की कमियां और वैज्ञानिक चुनौती

अभी तक शहर में मृत पशुओं के शवों के निस्तारण की जो व्यवस्था है, वह पर्यावरण और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से पूरी तरह अनुकूल नहीं मानी जाती। इस संबंध में नगर निगम के पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा ने विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि फिलहाल नगर निगम की पशु पकड़ने वाली टीम के पास केवल दो विशेष वाहन हैं, जिनकी मदद से सड़कों या अन्य स्थानों से मृत पशुओं को उठाया जाता है।

इसके बाद, इन मृत शरीरों को दफनाने के लिए नगर निगम माहेश्वरी गांव में स्थित एक चिन्हित स्थान पर ले जाता है। वहां जेसीबी मशीन की मदद से करीब 6 से 7 फीट गहरा गड्ढा खोदा जाता है और फिर उसमें पशु को दफना दिया जाता है। डॉ. मिश्रा के अनुसार, जमीन में इस तरह शवों को दफनाना पूरी तरह से वैज्ञानिक और पर्यावरण के अनुकूल नहीं है। इससे भूजल प्रदूषित होने और संक्रमण फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है। इसी गंभीर समस्या के स्थायी और वैज्ञानिक समाधान के रूप में पशु श्मशान घाट के निर्माण का फैसला लिया गया।

सिर्फ एक कॉल पर घर द्वार तक पहुंचेगी मदद

नगर निगम की इस नई योजना के लागू होने के बाद आम जनता और पशुपालकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। इसकी प्रक्रिया बेहद सरल और सुलभ बनाई गई है:

  • सूचना देना: यदि किसी घर या डेयरी में किसी गाय, भैंस या अन्य बड़े पशु की मृत्यु हो जाती है, तो मालिक को केवल नगर निगम के पशु चिकित्सा विभाग को फोन कर इसकी सूचना देनी होगी।
  • शव का उठाना: सूचना मिलते ही नगर निगम की विशेष टीम तुरंत सक्रिय होकर गाड़ी के साथ मौके पर पहुंचेगी और सम्मानपूर्वक मृत पशु के शरीर को उठाएगी।
  • वैज्ञानिक तरीके से विसर्जन: टीम शव को सीधे नवनिर्मित इलेक्ट्रॉनिक अंत्येष्टि स्थल पर लेकर आएगी, जहां इंसिनरेटर (विद्युत शवदाह गृह) के माध्यम से उसका वैज्ञानिक तरीके से अंतिम संस्कार कर दिया जाएगा।

15 से 20 दिनों के भीतर शुरू होने जा रही है यह विशेष सेवा

इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत मशीनों को स्थापित करने का काम बेहद तेजी से चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, निर्माण और तकनीकी जांच का काम अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। आगामी 15 से 20 दिनों के भीतर इस इलेक्ट्रॉनिक पशु अंत्येष्टि स्थल को पूरी तरह से आम जनता के लिए क्रियाशील कर दिया जाएगा। शुरुआत में इस आधुनिक इंसिनरेटर का उपयोग बड़े आकार के मृत पशुओं, मुख्य रूप से गायों और भैंसों के शवों के निस्तारण के लिए किया जाएगा।

निजी पशुपालकों को भी नाममात्र के शुल्क पर मिलेगी यह सुविधा

यह योजना केवल लावारिस या निराश्रित गोवंश तक ही सीमित नहीं रहने वाली है। सहारनपुर शहर के वे सभी नागरिक जो निजी तौर पर गाय या भैंस पालते हैं, वे भी इस आधुनिक सेवा का लाभ उठा सकेंगे। वर्तमान व्यवस्था के तहत यदि कोई निजी पशुपालक अपने मृत पशु के शव को उठवाने के लिए नगर निगम से संपर्क करता है, तो निगम एक निर्धारित सरकारी शुल्क की रसीद काटकर पशु को ले जाता है और उसे गड्ढे में दफना देता है। लेकिन नई व्यवस्था के शुरू होने के बाद, निजी पशुपालकों के पशुओं का भी इसी अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक मशीन के जरिए वैज्ञानिक और सम्मानजनक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इस क्रांतिकारी कदम से न केवल सहारनपुर शहर को प्रदूषण से मुक्ति मिलेगी, बल्कि बेजुबान पशुओं के अंतिम संस्कार को एक नया सम्मान और वैज्ञानिक आधार भी मिलेगा।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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