कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बाद भी देश में क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल-डीजल के दाम? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिया स्पष्ट जवाब व्यापार 2 घंटे पहले 17
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें गिरने के बाद भी भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम कम नहीं होने पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने तेल कंपनियों के नुकसान और पुराने महंगे स्टॉक का हवाला देते हुए स्थिति साफ की है।

वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दामों में आई कमी के बाद से भारत के आम नागरिकों के बीच लगातार यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम क्यों नहीं हो रही हैं। इस बेहद महत्वपूर्ण सवाल पर केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने आखिरकार अपनी चुप्पी तोड़ी है और स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने साफ किया कि यद्यपि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन देश की सरकारी तेल विपणन कंपनियां (OMCs) अभी भी उस कच्चे तेल का शोधन कर रही हैं, जिसे पश्चिम एशिया संकट और युद्ध के चरम दौर में काफी ऊंचे दामों पर खरीदा गया था।

तेल कंपनियों का वित्तीय घाटा और महंगे क्रूड का बोझ

केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने देश के सामने तेल कंपनियों के वित्तीय आंकड़ों का पूरा ब्योरा पेश करते हुए एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब पश्चिम एशिया में संकट गहराया हुआ था, तब देश की जनता को महंगाई की मार से सुरक्षित रखने के लिए सरकारी तेल कंपनियों ने अपनी लागत से भी कम दाम पर ईंधन बेचने का फैसला किया था।

इसी जनहितकारी फैसले के कारण, 30 जून तक समाप्त हुई अवधि में इन सरकारी कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (एलपीजी) को कम कीमतों पर बेचने की वजह से कुल ₹74,781 करोड़ का भारी नुकसान उठाना पड़ा। यही मुख्य कारण है कि पहले खरीदे गए महंगे कच्चे तेल के स्टॉक और कंपनियों को हुए इस बड़े वित्तीय घाटे की भरपाई के चलते तुरंत प्रभाव से दामों में कटौती नहीं की जा रही है।

वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत में ईंधन की निरंतर आपूर्ति

पेट्रोलियम मंत्री ने देश की मजबूत आपूर्ति व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि साल 2022 से 2026 के बीच भारत में पेट्रोल की दरों में केवल 5.58% और डीजल की दरों में महज 6.23% की ही मामूली वृद्धि देखी गई है। उन्होंने अत्यंत गर्व के साथ इस बात को रेखांकित किया कि हमारे मजबूत वित्तीय ढांचे ने कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के झटके को पूरी तरह से खुद ही सोख लिया और इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर नहीं पड़ने दिया।

इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि मार्च, अप्रैल, मई और जून के संकट से भरे महीनों के दौरान भी देश के किसी भी हिस्से में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी गई। पूरे भारत में बिना किसी रुकावट, कमी या पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी-लंबी कतारों के बिना ही ईंधन की आपूर्ति निरंतर और सुचारू रूप से चलती रही।

आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में राहत की उम्मीद

जब पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से सीधे तौर पर यह पूछा गया कि क्या निकट भविष्य में देश की जनता को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कटौती का लाभ मिलेगा, तो उन्होंने एक सकारात्मक संकेत दिए।

केंद्रीय मंत्री ने उम्मीद जताते हुए कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आने वाले कुछ हफ्तों तक इसी तरह निचले स्तर पर स्थिर बनी रहती हैं, तो निश्चित रूप से घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को कम करने पर विचार करना एक पूरी तरह से तार्किक और वैध सवाल होगा। इसका अर्थ यह है कि यदि वैश्विक बाजार का रुख इसी प्रकार नरम बना रहता है, तो आने वाले दिनों में देश के आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल और डीजल की महंगी दरों से बड़ी राहत मिल सकती है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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