पत्नी ने कहा 'तुम जैसे 1000 पति रख सकती हूं', गुस्से में पति ने किया कत्ल, हाईकोर्ट ने सजा घटाई मध्य प्रदेश 2 महीने पहले 93
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा का एक मामला चर्चा में है, जहां पत्नी की विवादित टिप्पणी के बाद पति ने उसकी हत्या कर दी थी। हाईकोर्ट ने इसे अचानक उपजा आक्रोश मानते हुए आरोपी पति की उम्रकैद की सजा को सात साल में बदल दिया है।

विवाद के बीच हुई भयावह घटना

पति और पत्नी के बीच होने वाली मामूली कहासुनी कई बार किस हद तक खतरनाक मोड़ ले सकती है, इसका एक उदाहरण मध्य प्रदेश से सामने आया है। मामला राज्य के छिंदवाड़ा जिले का है, जहां वर्ष 2021 में एक पति ने अपनी पत्नी की जान ले ली थी। इस घटना के पीछे की वजह आपसी विवाद था, जो एक बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी के बाद हिंसक हो गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, झगड़े के दौरान पत्नी किरण ने अपने पति शिवा से कहा कि वह 'तुम्हारे जैसे 1000 पति रख सकती हूं।' इस बात ने शिवा को इतना उत्तेजित कर दिया कि उसने पास में पड़े एक पत्थर से किरण पर हमला कर दिया। हमले के कारण मौके पर ही किरण की मौत हो गई।

ट्रायल कोर्ट का फैसला और हाईकोर्ट में अपील

इस हत्याकांड के बाद निचली अदालत ने मामले की सुनवाई की। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी शिवा को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत दोषी करार दिया और उसे आजीवन कारावास की कठोर सजा सुनाई। इस सजा के खिलाफ शिवा ने अपने वकील के माध्यम से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने इस पूरे मामले की सुनवाई की और तथ्यों का बारीकी से विश्लेषण किया।

पति के आत्मसम्मान पर प्रहार का तर्क

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की बेंच ने कहा कि पत्नी द्वारा कही गई वह बात, जिसमें उसने पति की अहमियत को कमतर आंकते हुए 1000 पति तक रखने की बात कही, सीधे तौर पर पति के आत्मसम्मान और उसके अस्तित्व पर एक गहरा प्रहार है। अदालत ने माना कि ऐसी तीखी टिप्पणी किसी भी व्यक्ति के मानसिक संयम को विचलित करने के लिए पर्याप्त है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी परिस्थितियों में कोई भी व्यक्ति अपना आपा खो सकता है, जो इस घटना के पीछे के मनोविज्ञान को समझने में मदद करता है।

घटना के बाद का आचरण बना आधार

कोर्ट ने फैसले में एक महत्वपूर्ण बिंदु पर ध्यान केंद्रित किया, जो आरोपी के व्यवहार से जुड़ा था। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने गौर किया कि हत्या की वारदात को अंजाम देने के तुरंत बाद, शिवा ने खुद पुलिस और अन्य लोगों को घटना की जानकारी दी थी। अदालत ने माना कि यदि यह हत्या पहले से सोची-समझी या पूर्व नियोजित होती, तो आरोपी इस प्रकार का आचरण नहीं करता। इसके अलावा, कोर्ट ने पाया कि शिवा अपने साथ कोई हथियार लेकर नहीं गया था, बल्कि वह पत्थर मौके पर ही उपलब्ध था जिसे उसने अचानक आए गुस्से में उठाकर हमला किया।

अचानक उपजा आक्रोश और सजा में राहत

हाईकोर्ट ने गवाहों के बयानों और आरोपी के घटना के बाद के बर्ताव का पुनर्मूल्यांकन करते हुए इसे 'अचानक हुआ विवाद' माना। अदालत ने कहा कि पत्नी की टिप्पणी के बाद पति के भीतर जो उकसावा पैदा हुआ, वह उसे इस अपराध के लिए गंभीर लेकिन अचानक उपजा आक्रोश के दायरे में रखता है। इसी तर्क के आधार पर कोर्ट ने शिवा को दी गई भारतीय दंड संहिता की धारा 304 भाग-1 के तहत मिली सजा को परिवर्तित करते हुए धारा 304 भाग-2 के तहत दंडित किया।

सात साल की सजा और जुर्माना

हाईकोर्ट ने दोषी शिवा को सुनाई गई आजीवन कारावास की सजा को कम करके 7 साल के कठोर कारावास में बदल दिया। इसके अतिरिक्त, अदालत ने उस पर 1000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि दोषी व्यक्ति जुर्माना भरने में विफल रहता है, तो उसे अतिरिक्त 1 वर्ष की जेल काटनी होगी। अदालत ने यह भी साफ किया कि इस तरह के मामले का निर्णय प्रत्येक परिस्थिति और तथ्यों के आधार पर किया जाता है, ताकि न्याय की प्रक्रिया पूरी हो सके।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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