कानपुर में मानसून की पहली बौछार का कहर: नगर निगम के दावों की खुली पोल, सड़कों पर भरा कमर तक पानी उत्तर प्रदेश 3 महीने पहले 118
मानसून की पहली तेज बारिश ने कानपुर की तैयारियों की हकीकत सामने ला दी है, जहाँ महज एक घंटे की वर्षा के बाद शहर के कई इलाके जलमग्न हो गए और लोग घुटनों तक भरे पानी में फंस गए।

मानसून की पहली बारिश से बेहाल कानपुर

गुरुवार की सुबह जब कानपुर के निवासियों की नींद खुली, तो शहर का नजारा बिल्कुल बदला हुआ था। मानसून की पहली दमदार बारिश ने न केवल भीषण गर्मी और उमस से राहत दी, बल्कि पूरे शहर के जनजीवन को पूरी तरह अस्त व्यस्त भी कर दिया। महज एक घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने नगर निगम के उन तमाम दावों की पोल खोल दी, जिसमें नालों की सफाई को लेकर बड़े वादे किए गए थे। शहर की सड़कें देखते ही देखते नदियों में तब्दील हो गईं और दर्जनों मोहल्ले चारों तरफ पानी से घिरकर टापू जैसे दिखने लगे।

जलभराव से जूझते प्रमुख इलाके

बारिश का पानी घरों के भीतर तक घुस गया, जिससे लोगों को काफी नुकसान उठाना पड़ा। शहर के कई महत्वपूर्ण इलाकों में स्थिति अत्यंत दयनीय बनी रही। शास्त्री नगर, पांडु नगर, काकादेव, गोविंद नगर, बाबूपुरवा, कल्याणपुर और पनकी जैसे क्षेत्रों में सड़कों पर घुटनों तक पानी जमा हो गया। लोगों को अपने घरों से पानी निकालने के लिए बाल्टियों और मोटर पंपों का सहारा लेना पड़ा। शहर की बदहाल स्थिति को देखकर आम नागरिकों में नगर निगम की कार्यप्रणाली के प्रति भारी आक्रोश देखा गया।

सफाई के दावों पर उठे गंभीर सवाल

हर साल बरसात आने से पहले प्रशासन की ओर से नालों की सफाई का व्यापक अभियान चलाने का दावा किया जाता है। हालांकि, पहली ही तेज बारिश ने यह साबित कर दिया कि ये दावे केवल कागजों तक सीमित रहे। कई स्थानों पर नालों का गंदा पानी सड़कों पर उफनता हुआ दिखाई दिया, जिससे जल निकासी का पूरा तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ। नागरिकों का कहना है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही शहर का यह हाल है, तो आने वाले दिनों में जब बारिश का जोर बढ़ेगा, तब स्थिति और भी विकट हो जाएगी।

लोगों की परेशानी और यातायात पर असर

तेज बारिश और जलभराव का असर यातायात पर भी दिखा। ग्वालटोली, पी रोड, स्वरूप नगर, वीआईपी रोड, सीसामऊ नाला और इंद्रा नगर जैसे इलाकों में वाहन चलाना नामुमकिन हो गया। कई सड़कों पर खड़ी गाड़ियों के पहिए पूरी तरह पानी में डूब गए। हालात इतने खराब थे कि सीसामऊ नाले के आसपास के निवासियों को कमर तक पानी से गुजरना पड़ा। कई दोपहिया वाहन पानी में फंसकर बंद हो गए, जिन्हें धक्का देकर निकालना पड़ा। कई लोगों ने अपनी कारों को बीच रास्ते में छोड़कर पैदल गंतव्य तक जाना ही सुरक्षित समझा।

मौसम वैज्ञानिकों और प्रशासन का रुख

मौसम वैज्ञानिक डॉ. एस.एन. सुनील पांडेय ने जानकारी दी कि काकादेव क्षेत्र में 16.4 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि पूरे कानपुर शहर में औसतन 30 से 40 मिमी के बीच बारिश हुई। उन्होंने संकेत दिए कि गुरुवार की शाम तक दोबारा बारिश होने की प्रबल संभावना बनी हुई है। उधर, नगर आयुक्त अर्पित उपाध्याय ने स्थिति को नियंत्रित करने का भरोसा दिलाया है। उनका कहना है कि जिन-जिन क्षेत्रों में जलभराव की सूचना मिली है, वहां नगर निगम की विशेष टीमों को तुरंत रवाना कर दिया गया है ताकि पानी की निकासी को जल्द से जल्द सुनिश्चित किया जा सके।

किसानों के लिए राहत

हालांकि आम जनता के लिए यह बारिश परेशानी का सबब बनी, लेकिन दूसरी तरफ खेती से जुड़े लोगों के लिए इसे काफी राहत भरा माना जा रहा है। कृषि क्षेत्र के लिए यह वर्षा वरदान साबित हुई है, क्योंकि इससे किसानों को फसलों की सिंचाई की चिंता से कुछ समय के लिए निजात मिल गई है। बावजूद इसके, शहर के निवासियों का साफ कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते नालों की सही तरीके से सफाई की होती, तो आज लोगों को इस तरह के जलभराव के बीच अपनी जिंदगी दांव पर नहीं लगानी पड़ती।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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