मध्य प्रदेश
2 घंटे पहले
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मध्य प्रदेश के सागर में मौजूद एक ऐतिहासिक सेंट्रल जेल को लेकर बड़ा फैसला लिया जा रहा है। साल 1843 में बनी यह जेल आज प्रदेश की सबसे पुरानी केंद्रीय जेलों में गिनी जाती है, लेकिन क्षमता से कहीं ज्यादा बंदियों के बोझ के चलते अब इसे शहर से बाहर ले जाने की तैयारी है। प्रस्ताव तैयार हो चुका है, जमीन भी तय कर ली गई है और अब केवल सरकार की अंतिम मंजूरी का इंतजार है।
अंग्रेजों के दौर में बनी थी बुंदेलखंड की यह जेल
आजादी से करीब 100 साल पहले जब मध्य प्रदेश का यह इलाका सीपी एंड बरार क्षेत्र का हिस्सा हुआ करता था, तब जबलपुर, भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों से भी पहले अंग्रेजों ने बुंदेलखंड के सागर में जेल की नींव रखी थी। 1843 में स्थापित यह जेल अब 183 साल पुरानी हो चुकी है और इसे शहर से बाहर शिफ्ट करने की योजना पर काम चल रहा है।
क्षमता से डेढ़ गुना बंदी रखे जा रहे थे
फिलहाल सागर की यह सेंट्रल जेल गोपालगंज में स्थित है और 42 एकड़ के परिसर में फैली हुई है। इसकी क्षमता 1136 बंदियों को रखने की है, लेकिन लंबे समय से यहां इससे डेढ़ गुना ज्यादा अपराधियों को रखा जा रहा है। इसी वजह से जेल के विस्तार के लिए पहले एक प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा गया था।
उस प्रस्ताव में जेल की क्षमता करीब 4000 करने की बात थी, जिसके चलते मामला अटक गया। अब 2800 बंदियों की क्षमता वाला नया प्रस्ताव तैयार कर भेजा गया है, जिस पर जेल विभाग को सहमति मिलने की पूरी उम्मीद है।
सागर से 14 किलोमीटर दूर बनेगी नई जेल
नई सेंट्रल जेल की इमारत सागर शहर से करीब 14 किलोमीटर दूर चितौरा में बनाई जाएगी, जहां इसके लिए 200 एकड़ जमीन चिन्हित कर ली गई है। यहां करीब ढाई सौ करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक जेल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। राज्य शासन से सहमति मिलने के बाद अगले 5 सालों में नई जेल बनाने का लक्ष्य रखा गया है और इसका निर्माण हाउसिंग बोर्ड द्वारा कराया जाएगा।
नई जेल का प्रस्ताव सामने आते ही जिस गांव के आसपास यह इमारत बननी है, वहां जमीन के दाम भी आसमान छूने लगे हैं। यहां 22000 स्क्वायर फीट के हिसाब से जमीन के सरकारी रेट तय कर दिए गए हैं।
DPR में क्या-क्या होगा शामिल
नई सेंट्रल जेल के इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर जो डीपीआर तैयार किया गया है, उसके मुताबिक परिसर में कई आधुनिक सुविधाएं जुटाई जाएंगी। इनमें शामिल हैं:
- प्रशिक्षण केंद्र और आधुनिक मुलाकात कक्ष
- सब्जी, कोल्ड स्टोरेज और मॉड्यूलर किचन
- पार्क, गोशाला और पुस्तकालय
- बंदियों के लिए बैठक कार्यालय
- सुरक्षित बाउंड्रीवाल
- परिसर में ही 100 बिस्तर का अस्पताल और मेडिकल उपकरण
जेल विभाग ने क्या कहा
मध्य प्रदेश जेल विभाग के डीजी वरुण कपूर ने बताया कि सेंट्रल जेल को नई जगह स्थापित करने के लिए पहले 4000 बंदियों की क्षमता रखी गई थी, लेकिन बाद में 2800 की क्षमता के हिसाब से नई डीपीआर तैयार करने को कहा गया। उन्होंने बताया कि अब नया प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है और जल्द ही इस पर सहमति मिलने की उम्मीद है।
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