मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
मानसून के आते ही छा जाता है मसालेदार बटरे का स्वाद
बुंदेलखंड अंचल का सागर शहर अपनी अनूठी परंपराओं और बेहतरीन खान-पान के लिए पूरे प्रदेश में पहचान रखता है। जैसे ही सावन की फुहारें शुरू होती हैं, यहां की सड़कों और बाजारों में एक खास व्यंजन की महक घुल जाती है, जिसे स्थानीय लोग मसालेदार बटरा कहते हैं। यह स्वाद पूरे साल नहीं मिलता, बल्कि मानसून के केवल दो से तीन महीने तक ही बाजारों में उपलब्ध रहता है। जैसे ही बारिश का सिलसिला थमता है, ये दुकानें भी नदारद हो जाती हैं।
बड़ा बाजार में दो दशक से कायम है मिश्रीलाल का ठेला
सागर के बड़ा बाजार इलाके में पिछले 20 साल से मिश्रीलाल साहू बटरे का अपना ठेला सजा रहे हैं। उनके इस छोटे से स्टॉल पर बारिश के दिनों में भीड़ का आलम देखते ही बनता है। मिश्रीलाल बताते हैं कि जिस दिन मौसम सुहावना होता है और झमाझम बारिश होती है, उस दिन बिक्री का आंकड़ा काफी बढ़ जाता है। ऐसे दिनों में वे दिन भर में 10 से 15 किलो तक बटरा बेच देते हैं। ग्राहक भी इस स्वाद के इतने दीवाने हैं कि वे 45 किलोमीटर दूर से खींचे चले आते हैं।
सस्ती और सुलभ कीमत
मिश्रीलाल ने अपने ग्राहकों के लिए दो विकल्प रखे हैं। यदि कोई सिर्फ सादा मसालेदार बटरा खाना चाहता है, तो उसे 15 रुपये खर्च करने होते हैं। वहीं, अगर कोई खस्ते के साथ इसका आनंद लेना चाहता है, तो उसे 20 रुपये का दोना मिलता है। यह उचित दाम इसे हर वर्ग के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाता है।
तैयारी की मेहनत और शुद्धता
भले ही मिश्रीलाल दोपहर 12:00 बजे से रात के 8:00 बजे तक ग्राहकों को गरमा-गरम बटरा परोसते हैं, लेकिन इसके पीछे की मेहनत सुबह 5:00 बजे से ही शुरू हो जाती है। वे किसी भी सामग्री के मामले में समझौता नहीं करते। वे अपने नमक से लेकर अन्य सभी मसाले अपने घर पर ही तैयार करते हैं। उनका मानना है कि असली स्वाद घर के मसालों की शुद्धता में ही छिपा है, जो ग्राहकों को बार-बार उनके पास बुला लाता है।
कैसे तैयार होता है यह लाजवाब बटरा
इस बटरे को बनाने की प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प है:
- सबसे पहले बाजार से ताज़ा बटरा लाया जाता है और उसे सफाई से धोया जाता है।
- उबालते समय पानी में हल्का सा रंग मिलाया जाता है ताकि रंगत अच्छी आए।
- स्वाद के लिए इसमें उबले आलू, बारीक कटा हुआ प्याज, हरी मिर्च और हरा धनिया मिलाया जाता है।
- नमक के तौर पर काला और सफेद दोनों तरह के नमक का उपयोग होता है, साथ ही चाट मसाला भी डाला जाता है।
- अंत में मैदे का कुरकुरा खस्ता मिलाया जाता है।
- स्वाद में खटास और तीखापन जोड़ने के लिए टमाटर, करौंदा और इमली की खास चटनी डाली जाती है, जो इसका स्वाद दोगुना कर देती है।
45 किलोमीटर का सफर तय कर आते हैं ग्राहक
मिश्रीलाल के ग्राहकों की सूची काफी लंबी है। राहतगढ़ से आने वाले रामू सेन पिछले 4 साल से इस स्वाद के मुरीद हैं। वे बताते हैं कि जैसे ही मानसून दस्तक देता है, वे केवल बटरा खाने के लिए 40 किलोमीटर की यात्रा कर यहां पहुंच जाते हैं। इसी तरह चन्द्रापुर के रहने वाले मोहनलाल बीते 15 साल से मिश्रीलाल के ग्राहक हैं, जिनमें से पिछले 5 साल तो वे नियमित रूप से 45 किलोमीटर दूर से केवल बटरा खाने के लिए सागर आ रहे हैं।
टेसू के पत्तों में खाने का अलग ही आनंद
केवल दूर के लोग ही नहीं, बल्कि स्थानीय निवासी भी इस स्वाद के कायल हैं। शिवांक व्यास पिछले 2 साल से अपने परिवार के लिए भी यहां से बटरा पैक करवाकर ले जाते हैं। वहीं, 12 साल से जुड़े पुराने ग्राहक हेमंत साहू का कहना है कि घर के मसालों से बनी इस डिश को टेसू के पत्तों के दोने में खाने का अनुभव ही अलग है, जो किसी भी बड़े रेस्टोरेंट में नहीं मिल सकता।
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