खरगोन में बनेगा नया टूरिज्म क्लस्टर, मिट्टी के घरों में लग्जरी सुविधाओं के साथ ग्रामीण जीवन का अनुभव मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 4
मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में रहमतपुर और सुलगांव को टूरिज्म क्लस्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ पर्यटक मिट्टी के घरों में ठहरकर निमाड़ की संस्कृति का आनंद ले सकेंगे।

खरगोन में ग्रामीण पर्यटन का विस्तार

अगर आप महानगरों की शोर-शराबे वाली जिंदगी से दूर सुकून के कुछ पल बिताना चाहते हैं, तो मध्य प्रदेश का खरगोन जिला अब आपके लिए एक बेहतरीन गंतव्य बनने जा रहा है। पर्यटन विभाग ने जिले के रहमतपुर और सुलगांव को टूरिज्म क्लस्टर के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इस अनूठी पहल का उद्देश्य पर्यटकों को निमाड़ की वास्तविक संस्कृति, परंपराओं और ग्रामीण जीवन शैली से रूबरू कराना है।

टूरिज्म क्लस्टर और होम स्टे का लक्ष्य

इस नई परियोजना के तहत रहमतपुर और सुलगांव में कुल 6-6 नए होम स्टे का निर्माण किया जाएगा। सरकार इस पूरे प्रोजेक्ट पर लाखों रुपए खर्च करने जा रही है। इन गांवों को पर्यटन के मानचित्र पर लाने के लिए ग्रामीणों को विशेष ट्रेनिंग, तकनीकी मार्गदर्शन और करीब 2 लाख रुपए तक की आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। जिला पर्यटन के नोडल अधिकारी नीरज अमझरे ने बताया कि इस संबंध में प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है और मंजूरी मिलने के साथ ही विकास कार्य धरातल पर उतरना शुरू हो जाएगा।

पहले चरण की सफलता के बाद विस्तार

गौर करने वाली बात यह है कि खरगोन में ग्रामीण पर्यटन की यह पहली कोशिश नहीं है। इससे पहले सरकार ने केरियाखेड़ी, बोथू और नावड़ातौड़ी गांवों को टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया था। उस चरण में 22 होम स्टे बनाने का लक्ष्य तय किया गया था, जिनमें से 19 होम स्टे फिलहाल सक्रिय हैं। यहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों से मिले सकारात्मक फीडबैक और बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अब प्रशासन ने रहमतपुर और सुलगांव को भी इस दायरे में लेने का निर्णय लिया है। चूंकि ये गांव ज्योतिर्लिंग के समीप स्थित हैं, इसलिए यहां धार्मिक पर्यटन की भी प्रबल संभावनाएं हैं।

पर्यटन क्लस्टर की अनूठी परिकल्पना

इस बार प्रशासन केवल व्यक्तिगत होम स्टे पर केंद्रित नहीं है, बल्कि गांवों को जोड़कर एक समग्र टूरिज्म क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। इस क्लस्टर का फायदा यह होगा कि पर्यटक एक ही क्षेत्र के भीतर कई गांवों की यात्रा कर पाएंगे। वे एक ही स्थान पर लोक संस्कृति, खेती-किसानी के अनुभव, लोकगीत, प्राकृतिक दृश्यों और निमाड़ी खान-पान का लुत्फ उठा सकेंगे। इस सामूहिक ब्रांडिंग से न केवल इन गांवों की पहचान बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय निवासियों के लिए आय के नए साधन भी सृजित होंगे।

मिट्टी के घरों में आधुनिक लग्जरी का संगम

इन होम स्टे की सबसे बड़ी विशेषता इनका निर्माण है। ये घर पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल होंगे, जिन्हें ईंट-सीमेंट के बजाय मिट्टी, गोबर, पत्थर, लकड़ी और केवलू (मिट्टी के खपरैल) से तैयार किया जाएगा। प्रत्येक घर लगभग एक हजार वर्गफीट में फैला होगा। इन घरों की एक से डेढ़ फीट मोटी दीवारें प्राकृतिक रूप से तापमान को नियंत्रित रखेंगी, जिससे ये घर गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में गर्म रहेंगे।

हालांकि बाहर से देखने में ये घर पूरी तरह से पारंपरिक और देसी नजर आएंगे, लेकिन इनके भीतर आधुनिक सुविधाओं का पूरा ध्यान रखा गया है। पर्यटकों को एक शानदार बेड, मच्छरदानी, मॉडर्न टॉयलेट, किचन, पंखे और सुंदर इंटीरियर जैसी सभी सुविधाएं मिलेंगी। इन होम स्टे में एक रात ठहरने का किराया लगभग 2 हजार रुपए तय किया गया है, जिसमें सुबह का नाश्ता भी शामिल होगा। इसके अलावा, मेहमानों के लिए करीब 25 प्रकार के पारंपरिक देसी व्यंजनों का मेनू भी उपलब्ध होगा, जिसका आनंद वे अलग से शुल्क देकर ले सकेंगे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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