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एक घंटा पहले
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विचारों
रूस-भारत की गहरी रक्षा साझेदारी
भारत और रूस की मित्रता दुनिया भर में मशहूर है। मॉस्को ने उस दौर में भी नई दिल्ली का साथ मजबूती से निभाया है जब वैश्विक स्तर पर कई ताकतवर देशों ने भारत से दूरी बना ली थी। मौजूदा समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की जोड़ी इस पुराने और भरोसेमंद रिश्ते को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है। विशेष रूप से रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों का आपसी सहयोग लगातार नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है।
राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा और बड़ा रक्षा सौदा
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इन दिनों ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत की यात्रा पर हैं। इस महत्वपूर्ण दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय वार्ता हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने आपसी रक्षा संबंधों को और अधिक सुदृढ़ करने पर सहमति जताई। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब भारत ने रूस से S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की 5 और इकाइयां खरीदने का निर्णायक फैसला लिया है। इसके साथ ही भारतीय वायुसेना के पास इस अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम के कुल 10 स्क्वाड्रन उपलब्ध हो जाएंगे। ज्ञात हो कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान S-400 की ताकत ने पाकिस्तान को बड़ी चुनौती दी थी।
Su-30MKI के लिए रूस का शक्तिशाली ऑफर
रूस की ओर से भारत को रक्षा क्षेत्र में दो बड़े और महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिए गए हैं। पहला प्रस्ताव पांचवीं पीढ़ी के Su-57 फाइटर जेट को लेकर है, जबकि दूसरा ऑफर बेहद शक्तिशाली 177S जेट इंजन से संबंधित है। 177S जेट इंजन वर्तमान में दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंजनों में गिना जाता है। रूस ने यह सुझाव दिया है कि भारतीय वायुसेना के मौजूदा Su-30MKI विमानों को 177S इंजन के साथ अपग्रेड किया जाए। यदि यह समझौता सिरे चढ़ता है, तो Su-30MKI की रफ्तार और मारक क्षमता अमेरिका के पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट F-35 और राफेल से भी अधिक शक्तिशाली हो जाएगी। उल्लेखनीय है कि इसी Su-30MKI लड़ाकू विमान ने पाकिस्तान पर ब्रह्मोस मिसाइल दागकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया था।
177S इंजन की खासियत और तकनीकी विवरण
रूस ने भारतीय वायुसेना के बेड़े को आधुनिक बनाने के लिए अपने एडवांस्ड Izdeliye 177S इंजन की पेशकश की है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस इंजन को मौजूदा Su-30MKI के ढांचे में बिना किसी बड़े बदलाव के आसानी से समाहित किया जा सकता है। इससे भारत को पुराने इंजनों के विकल्प के तौर पर अधिक क्षमता वाला पावरप्लांट मिल जाएगा। रूसी प्रस्ताव के अनुसार, 177S इंजन 14.5 टन तक का थ्रस्ट पैदा करने में सक्षम है। इसका आकार और वजन मौजूदा AL-31F/FP इंजन के समान है, जिससे इसे विमानों में एकीकृत करना आसान होगा। इस इंजन की सेवा अवधि लगभग 6,000 घंटे आंकी गई है, साथ ही यह अलग-अलग परिचालन स्थितियों में ईंधन की खपत में करीब 7 प्रतिशत की कमी लाने का दावा करता है।
भारत के लिए इस सौदे का महत्व
भारत के लिए यह प्रस्ताव इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) पहले से ही रूस के साथ लाइसेंस के तहत AL-31FP इंजन का उत्पादन और रखरखाव करता है। 177S इंजन पर सहयोग न केवल भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाएगा, बल्कि इससे भारतीय एयरोस्पेस उद्योग की घरेलू क्षमताओं को भी नई दिशा मिलेगी। यह प्रस्ताव ऐसे समय में सामने आया है जब भारत और रूस के बीच Su-57E पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को लेकर चर्चा चल रही है। निश्चित रूप से, फाइटर जेट इंजन पर यह सहयोग आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापक एयरोस्पेस साझेदारी का एक नया अध्याय सिद्ध होगा।
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