दक्षिण कोरिया के परमाणु पनडुब्बी प्लान से भड़के किम जोंग उन, दी विनाशकारी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी विश्व 2 घंटे पहले 4
दक्षिण कोरिया द्वारा परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियां विकसित करने के फैसले ने उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन को आग-बबूला कर दिया है, जिससे कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव का नया दौर शुरू हो गया है।

कोरियाई प्रायद्वीप में बढ़ता परमाणु तनाव

दुनिया भर की निगाहें इस समय मध्य-पूर्व के देशों और अमेरिका के बीच चल रहे कूटनीतिक और सैन्य विवादों पर टिकी हुई हैं, लेकिन एशिया के एक हिस्से में बहुत बड़ा परमाणु संकट धीरे-धीरे आकार ले रहा है। उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच का क्षेत्र एक बार फिर से बेहद अस्थिर और तनावपूर्ण हो गया है। हाल ही में दक्षिण कोरिया ने इस बात की सार्वजनिक घोषणा की है कि वह परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों के निर्माण की योजना पर काम कर रहा है। जैसे ही यह खबर सामने आई, उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन का रुख बेहद आक्रामक हो गया है। उत्तर कोरिया ने इसे सीधे तौर पर युद्ध भड़काने की साजिश करार दिया है और दावा किया है कि यह सोल की परमाणु बम हासिल करने की एक सोची-समझी गुप्त रणनीति है।

उत्तर कोरिया का आक्रामक रुख

उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने बहुत ही कड़े शब्दों में चेतावनी जारी की है कि यदि दक्षिण कोरिया अपने इस कदम पर आगे बढ़ता है, तो प्योंगयांग ऐसी विनाशकारी सैन्य ताकत के साथ जवाब देगा जिसका सामना करना किसी भी देश के लिए संभव नहीं होगा। यह बयान स्पष्ट करता है कि आने वाले दिनों में एशिया महाद्वीप में एक गंभीर परमाणु बवाल देखने को मिल सकता है। दक्षिण कोरिया की योजना अपने नौसैनिक बेड़े को आधुनिक बनाने की है, ताकि समुद्र में सुरक्षा को अभेद्य बनाया जा सके और उत्तर कोरिया की मिसाइलों से आने वाले खतरे का मुकाबला किया जा सके। लेकिन प्योंगयांग ने इसे अपने अस्तित्व के लिए खतरा माना है।

सोल पर लगे गंभीर आरोप

उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के प्रथम उपमंत्री जांग कुम-चोल ने एक बयान जारी कर सोल के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि रक्षा के नाम पर परमाणु पनडुब्बियां बनाना केवल एक बहाना है, जबकि हकीकत में यह दक्षिण कोरिया का परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में उठाया गया एक गुप्त कदम है। उत्तर कोरिया का आरोप है कि दक्षिण कोरिया, अमेरिका के साथ मिलकर कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और स्थिरता को जानबूझकर बिगाड़ रहा है। प्योंगयांग का दावा है कि वाशिंगटन और सोल के बीच बढ़ती सैन्य जुगलबंदी क्षेत्र के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी है।

परमाणु ईंधन का विवाद

उत्तर कोरिया की यह चिंता है कि इस पनडुब्बी प्रोजेक्ट के बहाने दक्षिण कोरिया अपने परमाणु ईंधन को रिसाइकल करने और यूरेनियम संवर्धन (यूरेनियम साफ करने) पर लगी अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों को खत्म करना चाहता है। उत्तर कोरियाई प्रशासन का मानना है कि दक्षिण कोरिया चुपके-चुपके परमाणु हथियार बनाने की सामग्री और काबिलियत जुटाने में लगा है। प्योंगयांग का यह भी कहना है कि इससे उनके समुद्री इलाके और देश की सुरक्षा को सीधा और गंभीर खतरा पैदा हो गया है। उत्तर कोरियाई सरकार इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मानकर तैयारी कर रही है।

बदले की कार्रवाई की चेतावनी

उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए (KCNA) के माध्यम से जारी बयानों से साफ पता चलता है कि प्योंगयांग अपनी रक्षा क्षमताओं को लेकर किसी भी हद तक जाने को तैयार है। उनका दावा है कि वे अपने रक्षा सिस्टम को इतना मजबूत बना रहे हैं कि वर्तमान और भविष्य के किसी भी खतरे को एक ही झटके में नष्ट किया जा सके। उत्तर कोरिया ने धमकी दी है कि अपनी आजादी और सुरक्षा की रक्षा के लिए उनके पास अपनी सैन्य ताकत को बेजोड़ स्तर तक बढ़ाने के सिवा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। हालांकि, रक्षा जानकारों का यह भी मानना है कि इन बयानों के जरिए उत्तर कोरिया खुद अपने नए परमाणु मिसाइल परीक्षणों और हाई-टेक पनडुब्बी परियोजनाओं को न्यायोचित ठहराने की कोशिश कर रहा है।

दक्षिण कोरिया की सफाई

अपने ऊपर लग रहे तमाम आरोपों को दक्षिण कोरिया ने सिरे से खारिज कर दिया है। दक्षिण कोरिया के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह परियोजना पूरी तरह से रक्षात्मक है और इसे केवल क्षेत्र की सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पार्क डू-सून ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ये पनडुब्बियां केवल परमाणु ऊर्जा से संचालित होंगी, लेकिन इनमें परमाणु हथियार नहीं बल्कि सामान्य पारंपरिक मिसाइलें ही तैनात की जाएंगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि दक्षिण कोरिया का परमाणु बम बनाने का कोई इरादा नहीं है। साथ ही, उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरा प्रोजेक्ट अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के नियमों और परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही आगे बढ़ाया जाएगा।

रूस और चीन की भूमिका

दक्षिण कोरियाई एकीकरण मंत्रालय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया के इस आक्रामक व्यवहार के पीछे रूस और चीन का मौन समर्थन भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकता है। पिछले कुछ महीनों में प्योंगयांग के मास्को और बीजिंग के साथ रणनीतिक रिश्ते बहुत प्रगाढ़ हुए हैं। यह देखा गया है कि उत्तर कोरिया का हर बयान रूस और चीन के उस साझा दृष्टिकोण से मेल खाता है, जिसमें वे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के बढ़ते सैन्य गठबंधन का कड़ा विरोध करते हैं। उत्तर कोरिया अब जापान की बदली हुई रक्षा नीतियों और अमेरिका-जापान-दक्षिण कोरिया के त्रिकोणीय सुरक्षा ढांचे को अपने लिए सबसे बड़ा सुरक्षा संकट मानकर चल रहा है, जिसके चलते वहां का माहौल और अधिक विस्फोटक हो गया है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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