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एक घंटा पहले
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खेतों से निकल रहे उबले आलू और पत्तागोभी
आमतौर पर जब किसान अपने खेतों में मेहनत करते हैं और खुदाई करके सब्जियां निकालते हैं, तो उन्हें कच्ची उपज मिलती है जिसे बाद में बाजार में बेचा या पकाया जाता है। लेकिन इस समय दक्षिण कोरिया के किसानों के सामने एक बेहद अजीब और परेशान करने वाली स्थिति पैदा हो गई है। जब वे आलू निकालने के लिए खुदाई कर रहे हैं, तो उन्हें जमीन से उबले हुए आलू मिल रहे हैं। यह स्थिति केवल आलू तक ही सीमित नहीं है, बल्कि पत्तागोभी का भी यही हाल है। खेत में लगी हुई पत्तागोभी भी इस कदर झुलस गई है कि वह पकी हुई नजर आती है।
गंगवोन प्रांत में तबाही का मंजर
दक्षिण कोरिया में इस साल पड़ रही भीषण गर्मी ने कृषि क्षेत्र को बुरी तरह से प्रभावित किया है। देश के विभिन्न हिस्सों में खेतों से निकाली जा रही आलू की फसल खराब और बेहद नरम पाई जा रही है। किसानों का कहना है कि मिट्टी के अंदर आलू का तापमान इतना बढ़ गया कि वे प्राकृतिक रूप से उबल गए हैं। इन खराब हो चुके आलूओं को कच्चे माल के तौर पर बाजार में बेचना संभव नहीं है, जिससे किसानों की कमाई पर सीधा असर पड़ रहा है। इसके साथ ही, आने वाले दिनों में खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका भी जताई जा रही है। सबसे ज्यादा तबाही का असर उत्तर-पूर्वी गंगवोन प्रांत में देखने को मिला है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, कई खेत कुछ दिन पहले तक बिल्कुल ठीक दिखाई दे रहे थे, लेकिन खुदाई के दौरान बड़ी मात्रा में फसल पूरी तरह बर्बाद मिली।
किसानों का दशकों का अनुभव भी फेल
यांगगु काउंटी के एक किसान ली सांग-ह्योक ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि वह पिछले करीब 40 वर्षों से खेती के काम में लगे हुए हैं, लेकिन अपने इतने लंबे करियर में उन्होंने आज तक ऐसा भयावह नुकसान पहले कभी नहीं देखा। गर्मी का प्रकोप सिर्फ आलू तक ही सीमित नहीं रहा। गंगवोन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पत्तागोभी भी खेतों में ही खराब हो गई। कई किसानों ने बेहतर मुनाफे की उम्मीद में कटाई में देरी की थी, लेकिन भीषण गर्मी के कारण पत्तागोभी खेत में ही पूरी तरह झुलस गई। विवश होकर किसानों को इसे मिट्टी में मिलाना पड़ा, जिससे उन्हें भारी आर्थिक चोट पहुंची है।
फलों पर भी गर्मी की मार
गर्मी का कहर केवल सब्जियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सेब और आड़ू जैसे फलों पर भी इसका बुरा असर पड़ा है। तेज धूप के कारण सेब झुलस रहे हैं और आड़ू फटने लगे हैं। किसानों के अनुसार, सितंबर के अंत में मनाए जाने वाले चुसोक त्योहार के लिए तैयार हो रही सेब की फसल का विकास गर्मी की वजह से पूरी तरह रुक गया है। 2 अगस्त को दक्षिण-पूर्वी शहर यांगसान में तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। यह साल 1904 में आधुनिक मौसम रिकॉर्ड की शुरुआत के बाद से दक्षिण कोरिया में दर्ज किया गया अब तक का सबसे अधिक तापमान है।
जान-माल का भारी नुकसान
इस प्रचंड गर्मी का असर केवल फसलों पर ही नहीं, बल्कि इंसानों और जानवरों पर भी जानलेवा साबित हो रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, कम से कम 31 लोगों की मौत गर्मी के कारण हो चुकी है। इसके अलावा, लगभग 9 लाख पशुओं और 14 लाख से अधिक पाली गई मछलियों की मौत की दुखद जानकारी भी सामने आई है। सरकार आम जनता को दिन के सबसे गर्म समय में बाहर न निकलने की सलाह दे रही है, लेकिन किसानों के लिए यह विकल्प मौजूद नहीं है। उनका मानना है कि यदि वे खेत में काम नहीं करेंगे, तो जो थोड़ी-बहुत फसल बची है, वह भी पूरी तरह नष्ट हो जाएगी।
बदलाव की दरकार
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने मौसम की इस स्थिति को पूरी तरह असामान्य करार दिया है। उन्होंने आपदा प्रबंधन व्यवस्था में तत्काल बदलाव करने की जरूरत पर जोर दिया है। फिलहाल फसल के हुए कुल नुकसान का सटीक आकलन होना अभी बाकी है। किसानों को इस बात का डर सता रहा है कि चुसोक त्योहार से पहले सब्जियों और फलों की भारी कमी हो सकती है, जिससे बाजार में कीमतें आसमान छू सकती हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते हुए मौसम के मिजाज को देखते हुए अब दक्षिण कोरिया को गर्मी सहने वाली फसलों की नई किस्मों की खोज और खेती के उन्नत तरीकों को अपनाने की दिशा में तेजी से काम करना होगा।
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