चीनी मूल के बच्चे पर हनुमान चालीसा का जादू, सुनते ही शांत होकर सो जाता है बच्चा विश्व 2 घंटे पहले 7
अमेरिका के लॉस एंजेलिस में रहने वाली एक चीनी महिला के चार महीने के बेटे का हनुमान चालीसा प्रेम सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। बच्चा हनुमान चालीसा की धुन सुनते ही शांत हो जाता है और गहरी नींद में सो जाता है।

हनुमान चालीसा का अद्भुत असर

हनुमान चालीसा में निहित शक्ति और ऊर्जा के बारे में तो दुनिया भर में लोग जानते हैं, लेकिन अब इसका एक ऐसा स्वरूप सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। एक छोटा सा बच्चा, जो अभी केवल चार महीने का है, वह शब्दों के अर्थ तो नहीं समझता, लेकिन इसकी ध्वनि और सकारात्मकता के प्रति ऐसी प्रतिक्रिया देता है कि उसका रोना थम जाता है। अमेरिका के लॉस एंजेलिस में रहने वाली एक चीनी महिला और उनके नन्हे बेटे की यह कहानी इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रही है, जहां हनुमान चालीसा बच्चे की शांति और सुकून का सबसे बड़ा साधन बन गया है।

कौन है ये मां और बेटा?

यह दिलचस्प मामला 40 वर्षीय चीनी मूल की बिजनेसवुमन सारा जेन हो और उनके बेटे बेबी जे का है। सारा अमेरिका में रहती हैं और उन्होंने अपनी पेरेंटिंग शैली को सोशल मीडिया पर साझा किया है। सारा का कहना है कि उनके बेटे को शांत करने के लिए हनुमान चालीसा एक जादुई इलाज जैसा काम करता है। हैरानी की बात यह है कि सारा और उनका परिवार कभी भारत नहीं आया है, लेकिन इसके बावजूद उनके जीवन में भारतीय धार्मिक परंपरा का यह महत्वपूर्ण हिस्सा शामिल हो गया है।

कैसे शुरू हुआ हनुमान चालीसा का कनेक्शन?

सारा जेन हो ने इस अनूठी आदत के पीछे की कहानी बताते हुए कहा कि यह सब एक इत्तेफाक था। उनकी मुलाकात अमेरिका के मशहूर बर्निंग मैन फेस्टिवल के दौरान एक भारतीय मित्र से हुई थी। उसी दोस्त ने उन्हें हनुमान चालीसा के बारे में बताया था। सारा ने जब इसे आजमाया, तो परिणाम हैरान करने वाले थे। बच्चा कितना भी चिड़चिड़ा हो या जोर-जोर से रो रहा हो, हनुमान चालीसा की धुन कानों में पड़ते ही वह तुरंत शांत हो जाता है। सारा का दावा है कि कभी-कभी तो बच्चा केवल पांच सेकंड के भीतर शांत हो जाता है और बमुश्किल दो मिनट के भीतर गहरी नींद में सो जाता है।

पेरेंटिंग का अनोखा रूटीन

सारा ने अब हनुमान चालीसा को अपनी दिनचर्या का स्थायी हिस्सा बना लिया है। वह न केवल बच्चे के रोने पर, बल्कि सुबह के समय भी इसे चलाती हैं। कई बार वह इसे लगातार बजने देती हैं, जिससे घर का माहौल शांत बना रहता है। सारा का मानना है कि जीवन के शुरुआती महीनों में बच्चे को सुरक्षा और अपनापन महसूस कराना बेहद जरूरी है, और इस प्रक्रिया में हनुमान चालीसा एक प्रभावी माध्यम साबित हो रही है। हालांकि, वह खुद भी स्पष्ट करती हैं कि हनुमान चालीसा के इस असर के पीछे उनका कोई वैज्ञानिक दावा नहीं है, बल्कि यह उनका निजी अनुभव और पेरेंटिंग रूटीन का एक हिस्सा भर है।

प्राकृतिक जुड़ाव और अन्य आदतें

हनुमान चालीसा के अलावा, सारा अपने बेटे के पालन-पोषण के लिए कई अन्य तरीके भी अपनाती हैं। वह बच्चे को रोजाना ब्राह्म्स की लोरी सुनाती हैं, जो एक अलग तरह का अनुभव है। इसके साथ ही, वह अपने बच्चे को प्राकृतिक चीजों के संपर्क में लाने पर भी जोर देती हैं, जिसे वह ग्राउंडिंग कहती हैं। उनका उद्देश्य बच्चे को मानसिक और शारीरिक रूप से सहज बनाए रखना है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चा

जैसे ही सारा ने इस अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया, यह देखते ही देखते चर्चा का विषय बन गया। इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए यह देखना बेहद सुखद है कि लॉस एंजेलिस जैसे शहर में, जहां जीवन की गति बहुत तेज है, वहां एक नन्हा बच्चा हजारों किलोमीटर दूर भारत की पौराणिक और भक्ति परंपरा से इस कदर जुड़ रहा है। सारा की यह पोस्ट कई लोगों को आश्चर्यचकित कर रही है कि आखिर कैसे शब्दों को न समझने वाला एक बच्चा भी संगीत की इस सकारात्मक तरंग को इतनी गहराई से महसूस कर सकता है। यह न केवल एक मां के अनुभव को दर्शाता है, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस सर्वव्यापी शांति को भी रेखांकित करता है, जिसकी गूंज आज दुनिया के किसी भी कोने में सुनाई दे सकती है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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