महाराष्ट्र
9 घंटे पहले
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रेजिडेंट डॉक्टर्स की हड़ताल पर अदालत की कड़ी टिप्पणी
महाराष्ट्र में रेजिडेंट डॉक्टरों द्वारा 5 अगस्त से शुरू की गई अनिश्चितकालीन हड़ताल का मामला बॉम्बे हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। राज्य भर के सरकारी अस्पतालों में इलाज करा रहे आम मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिस पर कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए हड़ताली डॉक्टरों को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि डॉक्टर काम नहीं कर रहे हैं, तो उन्हें वेतन पाने का भी कोई नैतिक या कानूनी अधिकार नहीं है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि नगर निगम के किसी भी अस्पताल में अगले 24 घंटे के भीतर इलाज के अभाव में एक भी मरीज की जान जाती है, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अदालत ने डॉक्टरों को निर्देशित किया है कि वे जनहित को देखते हुए अपनी हड़ताल तत्काल वापस लें।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने आंदोलित डॉक्टरों को फटकार लगाते हुए कहा कि काम नहीं तो वेतन नहीं, क्योंकि जनता की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
हड़ताल की मुख्य वजह क्या है?
यह पूरा विवाद महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स यानी MARD द्वारा राज्य सरकार के एक विवादास्पद फैसले के विरोध में शुरू हुआ है। सरकार ने एक नीतिगत निर्णय लेते हुए होम्योपैथी डॉक्टरों को महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल यानी MMC के अंतर्गत पंजीकरण कराने और उन्हें एलोपैथिक दवाएं लिखने की अनुमति दे दी है। इस फैसले के खिलाफ डॉक्टरों में भारी आक्रोश है। आंदोलित डॉक्टरों के वकीलों ने सरकार द्वारा प्रस्तावित ब्रिज कोर्स पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि एलोपैथिक डॉक्टर बनने के लिए छात्रों को कड़ी NEET परीक्षा पास करनी पड़ती है और सालों की गहन ट्रेनिंग लेनी पड़ती है। ऐसे में केवल एक छोटे से ब्रिज कोर्स के आधार पर होम्योपैथी चिकित्सकों को एलोपैथी के अधिकार देना न केवल अनुचित है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य के साथ जोखिम भी हो सकता है।
डॉक्टरों के वकीलों ने रखी अपनी दलीलें
अदालत में हड़ताली डॉक्टरों की ओर से कई महत्वपूर्ण तर्क पेश किए गए हैं, जो इस प्रकार हैं:
- होम्योपैथी चिकित्सकों को एलोपैथी प्रैक्टिस की छूट देने के सरकारी फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पिछले 12 वर्षों से अदालत में लंबित है।
- राज्य सरकार ने 3 अगस्त के सरकारी प्रस्ताव के अनुसार एक समिति गठित की है, लेकिन हमारा विरोध इस बात पर है कि समिति अपना काम पूरा करती, उससे पहले ही आनन-फानन में पंजीकरण की प्रक्रिया क्यों शुरू कर दी गई।
- अगर सरकार इस मामले में कोई ठोस समाधान निकालती है या प्रक्रिया पर रोक लगाती है, तो डॉक्टर तुरंत काम पर लौटने को तैयार हैं।
- NEET की कठिन प्रक्रिया से गुजरने वाले एलोपैथिक डॉक्टरों का मानना है कि ब्रिज कोर्स के जरिए एलोपैथी की अनुमति देना चिकित्सा प्रणाली के मानकों के खिलाफ है।
MARD की मांगें और सरकार का रुख
MARD का कहना है कि उन्होंने इस संवेदनशील नीति के संबंध में सरकार के साथ कई दौर की वार्ता की है, लेकिन उन्हें केवल निराशा ही हाथ लगी है और कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला है। संगठन की प्रमुख मांग यह है कि जब तक अदालत इस मामले पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देती, तब तक BHMS-CCMP पंजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखा जाए। इसके अलावा, राज्य भर के रेजिडेंट डॉक्टरों की अन्य लंबित मांगों का समाधान भी सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए।
अस्पताल की सेवाओं पर क्या प्रभाव है?
हड़ताल के कारण अस्पतालों की कार्यप्रणाली बुरी तरह प्रभावित हुई है। हालांकि MARD का दावा है कि मरीजों को बड़ी परेशानी से बचाने के लिए आपातकालीन और कैजुअल्टी सेवाएं जारी रखी गई हैं, लेकिन ओपीडी सेवाएं, नियमित स्वास्थ्य जांच, वैकल्पिक यानी इलेक्टिव सर्जरी और शैक्षणिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने कोई सकारात्मक रास्ता नहीं निकाला, तो 6 अगस्त से आपातकालीन सेवाएं भी अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दी जाएंगी।
हाईकोर्ट ने लिया स्वत: संज्ञान
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने खुद स्वत: संज्ञान लिया है। कोर्ट ने मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन महाराष्ट्र, MARD और राज्य सरकार के चिकित्सा शिक्षा विभाग को नोटिस जारी किया था और इस मुद्दे पर तत्काल सुनवाई के लिए दोपहर 1 बजे का समय निर्धारित किया था। अदालत इस विवाद पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि मरीजों को राहत मिल सके और स्वास्थ्य सेवाओं को बहाल किया जा सके।
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