जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
जब भी हिम्मत या ताकत की बात होती है, तो हममें से ज्यादातर लोग खुद को 'शेर' जैसा बनने की कल्पना करते हैं। बचपन की कहानियों से लेकर आज की मोटिवेशनल रील्स तक, हमें हमेशा 'शेर जैसी दहाड़' और 'जंगल के राजा जैसी ताकत' हासिल करने की नसीहत मिलती रही है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि असल जिंदगी में शेर बनने से कहीं ज्यादा फायदेमंद 'कॉकरोच' बनना साबित हो सकता है?
यह बात सुनने में थोड़ी अजीब और शायद कुछ हद तक घिनौनी भी लग सकती है, मगर मशहूर लेखक चेतन भगत ने हाल ही में एक टॉक शो में ठीक यही नजरिया रखा। उनका कहना है कि जिंदगी की असली ताकत इस बात में नहीं है कि आप कितने मजबूत हैं, बल्कि इस बात में है कि बदलती परिस्थितियों के साथ आप खुद को कितनी जल्दी ढाल लेते हैं।
सिर्फ ताकत हर बार काम नहीं आती
चेतन भगत का मानना है कि हम शेर को अपनी प्रेरणा इसलिए मानते हैं क्योंकि वह ताकतवर नजर आता है और उसका एक अलग रुतबा होता है। मगर असल जिंदगी केवल ताकत के बूते नहीं चलती। जैसे ही हालात बदलते हैं, सूखा पड़ता है या जंगल का माहौल बिगड़ता है, वैसे ही शेर के लिए भी टिके रहना मुश्किल हो जाता है।
कॉकरोच की असली सुपरपावर
इसके उलट कॉकरोच को कोई पसंद नहीं करता और देखने में भी यह आकर्षक नहीं होता, लेकिन इसके पास एक खास ताकत है—एडैप्टेबिलिटी यानी लचीलापन। कॉकरोच का पूरा ध्यान अपनी ताकत दिखाने या किसी को डराने पर नहीं रहता, बल्कि उसका इकलौता मकसद होता है 'जिंदा रहना'।
यही वजह है कि चाहे कड़ाके की ठंड हो, झुलसा देने वाली गर्मी हो या कोई बड़ी आपदा, कॉकरोच हर माहौल में खुद को ढालकर बच निकलता है।
जिंदगी, करियर और रिश्तों के लिए सबक
इस सोच में हमारे लिए एक गहरा संदेश छिपा है। ताकत का दिखावा करने के बजाय अगर हम परिस्थितियों के अनुसार खुद को बदलना सीख लें, तो जिंदगी हो, करियर हो या रिश्ते—हर मोर्चे पर लंबे समय तक टिके रहना आसान हो जाता है। कठिन समय में वही व्यक्ति आगे बढ़ता है, जो लचीलेपन को अपनी असली ताकत बना लेता है।
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