प्यार या जुनून: कब एक सुंदर एहसास बदल जाता है मानसिक रोग में, समझें 'ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर' जीवनशैली एक घंटा पहले 2
सच्चा प्यार इंसान को बेहतर बनाता है और भीतर सुरक्षा की भावना भरता है, लेकिन जब यही भावना जुनून में बदल जाए तो यह 'ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर' नामक गंभीर मानसिक स्थिति का रूप ले सकती है।

"प्यार अंधा होता है" — यह जुमला हम सबने फिल्मों से लेकर असल जिंदगी तक न जाने कितनी बार सुना है। जब किसी से लगाव होता है तो दिन-रात उसी के ख्यालों में डूबे रहना, उसके संदेश का बेसब्री से इंतजार करना और उसकी छोटी-छोटी बातों पर मुस्कुरा देना बिल्कुल सामान्य माना जाता है। लेकिन क्या कभी यह सोचा है कि प्यार की यह खूबसूरत हद कब पार हो जाती है और कब यह एक खतरनाक जुनून का चोला ओढ़ लेती है? अक्सर लोग प्यार और दीवानगी को एक ही चीज समझ बैठते हैं, जबकि इन दोनों के बीच एक बेहद महीन और गंभीर रेखा होती है, जिसे पहचानना हमारी मानसिक सेहत के लिए बहुत जरूरी है।

प्यार और जुनून के बीच की वह बारीक रेखा

शुरुआती दौर में प्यार और दीवानगी का अनुभव एक जैसा महसूस हो सकता है। दोनों में ही सामने वाले को पाने की तीव्र चाहत होती है। लेकिन असली प्यार की बुनियाद आजादी, सम्मान और भरोसे पर टिकी होती है। सच्चा प्यार आपको एक बेहतर इंसान बनाता है और आपके भीतर सुरक्षा की भावना जगाता है।

इसके उलट, जब प्यार 'दीवानगी' या ऑब्सेशन में तब्दील होने लगता है, तो व्यक्ति सामने वाले को एक इंसान की तरह नहीं, बल्कि एक वस्तु की तरह देखने लगता है, जिस पर वह अपना पूरा अधिकार जताना चाहता है। यहीं से रिश्ते में असुरक्षा, शक और घुटन जैसी चीजें पनपने लगती हैं।

क्या है 'ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर' (OLD)?

मनोविज्ञान की भाषा में इस हद तक की जुनूनी दीवानगी को एक मानसिक स्थिति माना गया है, जिसे 'ऑब्सेसिव लव डिसऑर्डर' (Obsessive Love Disorder – OLD) कहा जाता है। यह कोई आम बात नहीं, बल्कि एक गंभीर मानसिक स्थिति है। इसमें व्यक्ति अपने पार्टनर को लेकर इतना असुरक्षित हो जाता है कि वह उसकी हर गतिविधि पर नियंत्रण रखना चाहता है।

वह किससे बात कर रहा है, कहां जा रहा है, यहां तक कि उसके सोशल मीडिया के पासवर्ड तक पर नजर रखने की कोशिश शुरू हो जाती है। जब पार्टनर थोड़ा-सा भी स्पेस मांगता है, तो जुनून में डूबा व्यक्ति हिंसक हो सकता है या डिप्रेशन का शिकार बन सकता है।

किन लोगों में ज्यादा दिखती है यह प्रवृत्ति

ऐसी दीवानगी अक्सर उन लोगों में अधिक देखी जाती है, जो बचपन में किसी गहरे अकेलेपन, अस्वीकार (रिजेक्शन) या 'अटैचमेंट इश्यूज' से होकर गुजरे होते हैं। यही वजह है कि अपने रिश्तों में इस बारीक रेखा को समझना और समय रहते सतर्क रहना बेहद जरूरी हो जाता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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