कोडरमा की मशहूर झिल्लियां: कलाकंद और मलाई चॉप के जमाने में भी बरकरार है इस पारंपरिक मिठाई का जलवा जीवनशैली 2 महीने पहले 66
कोडरमा में करीब चार दशक पुरानी झिल्लियां मिठाई आज भी अपनी लोकप्रियता बरकरार रखे हुए है। शुद्ध गेहूं, गुड़ और बिना किसी केमिकल के तैयार होने वाली यह मिठाई न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है।

आज भी बाजार में कायम है झिल्लियां का प्रभाव

बाजार में हर दिन नई तरह की मिठाइयों और फैंसी स्नैक्स की लंबी कतार लग रही है। कलाकंद, मलाई चॉप और तरह-तरह की आधुनिक मिठाइयों की भरमार के बीच कोडरमा की पारंपरिक झिल्लियां मिठाई ने अपनी खास जगह बनाए रखी है। करीब 40 साल बीत जाने के बाद भी इस मिठाई की दीवानगी लोगों में वैसी ही है। कोडरमा के निवासी हों या बाहर से आने वाले मेहमान, हर कोई इस मिठाई के कुरकुरे स्वाद का दीवाना है। खास तौर पर बच्चों के लिए तो यह पसंदीदा नाश्ता है, जो इसे बड़े चाव के साथ खाना पसंद करते हैं। लोग जब कोडरमा से बाहर कहीं यात्रा पर जाते हैं, तो इसे अपने साथ ले जाना नहीं भूलते।

स्वास्थ्य और स्वाद का सही तालमेल

झिल्लियां की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर है। झुमरी तिलैया के राजगढ़िया मोड़ के पास वर्ष 1988 से इस मिठाई को तैयार कर रहे दुकानदार तुलसी प्रसाद वर्मा बताते हैं कि आधुनिक दौर में जब कई पुरानी मिठाइयां लुप्त हो रही हैं, झिल्लियां की मांग जस की तस बनी हुई है। इस मिठाई की खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री है। इसे तैयार करने में मुख्य रूप से गेहूं का आटा और गुड़ का उपयोग किया जाता है, जो शरीर को आवश्यक आयरन और खनिज तत्व प्रदान करते हैं। इसमें किसी भी प्रकार के कृत्रिम रंगों, रसायनों या हानिकारक फ्लेवर का प्रयोग नहीं किया जाता है, जो इसे बाजार में मिलने वाली अन्य मिठाइयों की तुलना में कहीं अधिक शुद्ध और सुरक्षित बनाता है।

बनाने की अनोखी विधि और सामग्री

तुलसी प्रसाद वर्मा ने इस मिठाई को बनाने की प्रक्रिया साझा करते हुए बताया कि इसके लिए सबसे पहले गेहूं के आटे को पानी और थोड़ी मात्रा में रिफाइंड तेल के साथ गूंधा जाता है। इस गुंथे हुए आटे को लगभग एक इंच के छोटे टुकड़ों में तैयार किया जाता है, जिन्हें बाद में गर्म तेल में तब तक तला जाता है जब तक कि वे पूरी तरह सुनहरे और कुरकुरे न हो जाएं। इसके बाद इन कुरकुरे टुकड़ों को गुड़ की तैयार गाढ़ी चाशनी में अच्छी तरह डुबोया जाता है। अंत में, इसके ऊपर सूखे आटे का हल्का छिड़काव किया जाता है, जिससे गुड़ की परत सख्त हो जाती है और मिठाई का स्वाद और बनावट बेहतरीन हो जाते हैं।

लंबे समय तक ताजी रहने की विशेषता

झिल्लियां मिठाई की एक बड़ी विशेषता यह है कि इसे लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है। दुकानदार के अनुसार, सामान्य तापमान पर रखने पर यह मिठाई 15 से 20 दिनों तक पूरी तरह सुरक्षित और खाने योग्य बनी रहती है। चूंकि इसमें रसदार सामग्री नहीं होती, इसलिए इसे पैक करना और कहीं दूर ले जाना बेहद आसान है। यही कारण है कि जो लोग कोडरमा के बाहर रहते हैं, वे जब भी घर आते हैं तो इस मिठाई को अपने साथ ले जाना पसंद करते हैं। आज के समय में इसकी कीमत 100 रुपये प्रति किलो तय की गई है। यह मिठाई न केवल भूख मिटाने का जरिया है, बल्कि यह शरीर को पर्याप्त ऊर्जा भी देती है, जो इसे बाकी मिठाइयों से अलग खड़ा करती है।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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