भीषण गर्मी में गोरखपुर के लोगों की पहली पसंद बने देसी स्वाद, मुरब्बे और अचार की मांग में भारी उछाल जीवनशैली एक महीने पहले 64
गर्मियों के दस्तक देते ही गोरखपुर के बाजारों में पारंपरिक मुरब्बों, अचार और चटपटे खुमचा की मांग तेजी से बढ़ गई है, जिसे लोग सेहत और स्वाद का अनूठा संगम मान रहे हैं।

गर्मियों के मौसम में देसी व्यंजनों की धूम

जैसे ही गर्मी का मौसम अपने चरम पर पहुंचता है, गोरखपुर के स्थानीय बाजारों में कुछ खास पारंपरिक व्यंजनों की रौनक देखते ही बनती है। ये व्यंजन न केवल स्वाद में लाजवाब होते हैं, बल्कि इनके औषधीय गुण और शरीर को ठंडक पहुंचाने की क्षमता इन्हें आधुनिक समय में भी बेहद खास बनाती है। लोग अब स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं, जिसके चलते फलों से तैयार मुरब्बे, चटपटे अचार और विशेष रूप से तैयार किए जाने वाले खुमचा की मांग हर साल इन महीनों में काफी बढ़ जाती है।

पारंपरिक मुरब्बों का जादू

इस व्यवसाय से दशकों से जुड़े प्राणनाथ बताते हैं कि गर्मी के दौरान ग्राहकों की पहली प्राथमिकता ऐसे खाद्य पदार्थों को खरीदने की होती है, जो न केवल शरीर में ताजगी लाएं बल्कि लू और तेज धूप से लड़ने के लिए जरूरी ऊर्जा भी प्रदान करें। उनके अनुसार, बेल, आंवला, आम और करौंदे के मुरब्बों की बाजार में भारी मांग रहती है। बेल का मुरब्बा विशेष रूप से पेट और पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में कारगर माना जाता है, जबकि विटामिन-सी से भरपूर आंवले का मुरब्बा रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त, कच्चे आम से तैयार किया जाने वाला मीठा और चटपटा मुरब्बा भी लोगों की खास पसंद है। इन सभी को बहुत ही पारंपरिक और प्राकृतिक विधि से तैयार किया जाता है, जिससे इनका असली स्वाद और पौष्टिकता लंबे समय तक बनी रहती है।

अचार की परंपरा और लोगों का लगाव

गर्मियों का सीजन अचार के शौकीनों के लिए भी बहुत मायने रखता है। प्राणनाथ का कहना है कि कच्चे आम का अचार इस मौसम का सबसे अधिक बिकने वाला उत्पाद है। साथ ही, नींबू, हरी मिर्च, करौंदा और कई तरह के मिश्रित फलों से बने अचार की भी जबरदस्त मांग रहती है। कई स्थानीय परिवार तो पूरे साल के लिए अपने घर का स्टॉक इसी समय तैयार करवाना पसंद करते हैं। दुकानदारों के पास ऐसे ग्राहकों की कमी नहीं है, जो अपनी पसंद के मसालों और सामग्री के साथ विशेष ऑर्डर भी लिखवाते हैं।

क्या है गोरखपुर का प्रसिद्ध खुमचा

गोरखपुर और पूर्वांचल के विस्तृत इलाकों में खुमचा एक ऐसा व्यंजन है, जिसकी गर्मियों में अपनी अलग पहचान है। इसे मुख्य रूप से कच्चे आम और अन्य मौसमी फलों के साथ विशिष्ट मसालों का मिश्रण तैयार करके बनाया जाता है। इसका खट्टा, मीठा और तीखा स्वाद न केवल जीभ को भाता है, बल्कि यह शरीर को लू के थपेड़ों से बचाने और ताजगी का अनुभव कराने में भी सहायक माना जाता है। गर्मी के असर को कम करने के लिए स्थानीय लोग इसे एक प्रभावी घरेलू नुस्खे की तरह भी देखते हैं।

बदलते दौर में भी बरकरार है स्वाद की विरासत

प्राणनाथ का मानना है कि समय कितना भी बदल जाए, लेकिन खान-पान की यह पुरानी और पुख्ता परंपरा आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भी इन उत्पादों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। मांग इतनी ज्यादा रहती है कि कई पुराने ग्राहक तो सीजन शुरू होने से पहले ही अपना ऑर्डर बुक करा देते हैं। यही कारण है कि दशकों पुरानी यह कला आज भी गोरखपुर के लोगों की थालियों में अपनी प्रमुख जगह बनाए हुए है और नई पीढ़ी भी इनके स्वाद की उतनी ही दीवानी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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