झुमरी तिलैया का केसरिया कलाकंद हुआ मशहूर: GI टैग के बाद अब बाजार में चॉकलेट और गुड़ फ्लेवर की धूम जीवनशैली 2 महीने पहले 64
झारखंड के कोडरमा स्थित झुमरी तिलैया के केसरिया कलाकंद को प्रतिष्ठित GI टैग मिलने के बाद इसकी लोकप्रियता पूरे देश में बढ़ गई है, जिसके चलते अब इसे नए फ्लेवर में भी पेश किया जा रहा है।

GI टैग से बढ़ी लोकप्रियता

झारखंड के कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया में बनने वाले प्रसिद्ध केसरिया कलाकंद को हाल ही में जीआई टैग यानी भौगोलिक संकेतक प्राप्त हुआ है। यह झारखंड का पहला और अब तक का एकमात्र ऐसा खाद्य उत्पाद है जिसे यह गौरव हासिल हुआ है। इस प्रतिष्ठित उपलब्धि के बाद इस पारंपरिक मिठाई की मांग न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि पूरे देश में तेजी से बढ़ गई है। राष्ट्रीय पहचान मिलने के कारण अब दूसरे राज्यों से भी लोग केसरिया कलाकंद के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं और मिठाई विक्रेताओं को सीधे संपर्क करके अपने ऑर्डर बुक करवा रहे हैं।

गुणवत्ता की कसौटी पर खरा

जीआई टैग प्राप्त करने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। इसके लिए कड़ी गुणवत्ता जांच और निर्धारित मानकों का पालन करना अनिवार्य होता है। इस प्रक्रिया के दौरान कोडरमा की कई जानी-मानी मिठाई की दुकानों से केसरिया कलाकंद के नमूने लिए गए थे, जिनमें कन्हैया मिष्ठान का सैंपल भी शामिल था। कड़े परीक्षणों के बाद जब यह उत्पाद सभी मानकों पर खरा उतरा, तब इसे जीआई टैग प्रदान किया गया। इस उपलब्धि ने न केवल मिठाई की गुणवत्ता पर मुहर लगाई है, बल्कि स्थानीय मिठाई व्यवसाय को एक नया बाजार और नई ऊंचाई प्रदान की है।

ग्राहकों की बदलती पसंद और नए प्रयोग

कन्हैया मिष्ठान के संचालक अभिषेक सेठ का कहना है कि जीआई टैग मिलने के बाद ग्राहकों के बर्ताव में स्पष्ट बदलाव आया है। पहले ग्राहक आमतौर पर साधारण कलाकंद की मांग करते थे, लेकिन अब वे विशेष रूप से जीआई टैग वाले केसरिया कलाकंद की तलाश में दुकान पर आते हैं। इसके साथ ही, कई लोग इस मिठाई को उपहार के तौर पर भी खरीद रहे हैं। अभिषेक सेठ के अनुसार, कोडरमा का खास पानी और यहां का वातावरण ही इस मिठाई को अद्वितीय स्वाद और बनावट प्रदान करता है।

नए स्वाद के रूप में चॉकलेट और गुड़ का जादू

ग्राहकों की बदलती रुचि और बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए मिठाई निर्माताओं ने अब अपने मेनू का विस्तार करना शुरू कर दिया है। पहले से उपलब्ध शुगर फ्री कलाकंद की सफलता के बाद, अब ग्राहकों को लुभाने के लिए चॉकलेट फ्लेवर और गुड़ कलाकंद भी बाजार में लॉन्च किए गए हैं। इन नई श्रेणियों को भी ग्राहकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। बाजार में इन विशेष मिठाइयों की कीमत 520 रुपये प्रति किलोग्राम निर्धारित की गई है।

डिलीवरी और भंडारण की सुविधा

मिठाई की बढ़ती मांग को देखते हुए इसे सुदूर क्षेत्रों तक भेजने की व्यवस्था भी की जा रही है। जिन शहरों और राज्यों में कोडरमा से सीधे परिवहन की सुविधा उपलब्ध है, वहां ग्राहकों के ऑर्डर पर कलाकंद सुरक्षित रूप से भेजा जा रहा है। मिठाई की ताजगी के बारे में जानकारी देते हुए विक्रेताओं ने बताया कि सामान्य तापमान पर यह मिठाई लगभग 24 घंटे तक पूरी तरह सुरक्षित रहती है। वहीं, यदि इसे फ्रिज में रखा जाए, तो इसकी गुणवत्ता और स्वाद कई दिनों तक बिल्कुल बरकरार रहता है। यह नई पहल न केवल स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहित कर रही है, बल्कि पारंपरिक स्वाद को नए अंदाज में पेश करने का एक बेहतरीन उदाहरण भी बन रही है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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