दिल्ली की मजदूरी से पटना के बिरयानी किंग तक का सफर, महज 20 रुपये में मोहन मंडल खिला रहे हैं लाजवाब स्वाद जीवनशैली एक घंटा पहले 2
दिल्ली में कभी मजदूरी करने वाले मोहन मंडल ने लॉकडाउन के दौरान पटना में वेज बिरयानी का स्टॉल शुरू किया, जो आज अपने बेहतरीन स्वाद और बेहद कम कीमत के कारण पूरे शहर में मशहूर हो चुका है।

दिल्ली से पटना तक का अनूठा स्वाद का सफर

पटना की सड़कों पर आज एक ऐसे वेज बिरयानी स्टॉल की चर्चा हर तरफ है, जो न केवल अपने स्वाद के लिए जाना जाता है, बल्कि इसकी कीमत भी लोगों को हैरान कर देती है। एग्जिबिशन रोड पर स्थित सीडीए बिल्डिंग के गेट के ठीक बाहर मोहन मंडल का छोटा सा स्टॉल हर दिन सुबह से शाम तक ग्राहकों से भरा रहता है। मोहन मंडल की बिरयानी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि महज 20 रुपये में यह पेट भरने के साथ मन को भी तृप्त कर देती है। एक गरीब मजदूर से लेकर दफ्तर जाने वाले राहगीर तक, हर कोई मोहन के हाथ की बनी बिरयानी का मुरीद है। पिछले चार-पांच वर्षों से मोहन मंडल इसी स्थान पर अपनी कड़ी मेहनत के दम पर ग्राहकों को स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध करा रहे हैं।

दिल्ली में सीखी हुनर की बारीकियां

मोहन मंडल की यह कहानी लॉकडाउन के कठिन दौर से जुड़ी है। महामारी के आने से पहले वे दिल्ली में एक निजी कंपनी में मजदूरी किया करते थे। दिल्ली में काम के दौरान, वह रोजाना दोपहर के भोजन में एक खास स्टॉल से वेज बिरयानी खाया करते थे। स्वाद इतना जबरदस्त था कि धीरे-धीरे बिरयानी बनाने वाले विक्रेता से उनकी दोस्ती हो गई और उन्होंने उसी से इस बिरयानी को बनाने की पूरी विधि और मसालों का राज सीख लिया। जब कोरोना के चलते लॉकडाउन लागू हुआ और उन्हें काम छोड़कर बिहार वापस लौटना पड़ा, तो उन्होंने फिर से दिल्ली जाकर मजदूरी करने के बजाय पटना में ही अपने पैरों पर खड़ा होने का निर्णय लिया।

सस्ते और सुलभ भोजन की अनूठी पहल

मोहन मंडल ने पटना में अपने कारोबार के लिए वेज बिरयानी को ही क्यों चुना, इसके पीछे एक सोची-समझी रणनीति थी। उस दौरान पटना में वेज बिरयानी बेचने वाले बहुत कम लोग थे और मोहन ने आम आदमी की जेब का ख्याल रखते हुए इसकी कीमत मात्र 20 रुपये तय की। एग्जिबिशन रोड का इलाका काफी व्यस्त है, जहां बड़ी संख्या में दुकानें, व्यावसायिक प्रतिष्ठान, किराये की गाड़ियां चलाने वाले लोग और दैनिक मजदूर काम करते हैं। मोहन का यह स्टॉल उन लोगों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुआ, जिन्हें कम बजट में दोपहर का अच्छा भोजन चाहिए था। आज आलम यह है कि सामान्य दिनों में वह लगभग 5 किलो चावल की बिरयानी बेच देते हैं, जबकि भीड़भाड़ वाले दिनों में यह खपत 10 किलो तक पहुंच जाती है। इसी छोटे से कारोबार से मोहन अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।

हर मौसम में अटूट मेहनत और लगन

मोहन मंडल की दिनचर्या बेहद अनुशासित और कठिन है। वे हर रोज सुबह 4 बजे नींद से जाग जाते हैं और बिरयानी तैयार करने की तैयारी में जुट जाते हैं। इसके बाद सुबह साढ़े 6 बजे तक वे अपना स्टॉल एग्जिबिशन रोड पर सजा लेते हैं और शाम 5 बजे तक ग्राहकों को भोजन परोसते रहते हैं। मौसम चाहे कैसा भी हो, वे कभी हार नहीं मानते। भीषण गर्मी की लू हो, मूसलाधार बारिश का समय हो या फिर कड़ाके की ठंड, मोहन मंडल हर दिन बिना नागा अपनी दुकान पर मुस्तैद रहते हैं।

क्या है उनकी बिरयानी के स्वाद का राज

मोहन मंडल की बिरयानी में सोयाबीन, मटर और पनीर का बेहतरीन मिश्रण इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे पोषण और स्वाद दोनों से भरपूर बनाता है। इसे तैयार करने में वे विशेष प्रकार के मसालों का उपयोग करते हैं। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए वे एक प्लेट बिरयानी के साथ दो प्रकार की चटनी, रायता, सलाद और हरी मिर्च भी परोसते हैं। बिरयानी की शुरुआती कीमत 20 रुपये है, लेकिन ग्राहकों की भूख और मांग के अनुसार वे 30, 50 और 60 रुपये वाली प्लेटें भी उपलब्ध कराते हैं। उनकी ईमानदारी और मेहनत ने ही आज उन्हें पटना में एक अलग पहचान दिलाई है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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