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एक घंटा पहले
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समस्तीपुर की शान है पेड़ा चौक
बिहार के समस्तीपुर जिले में यूं तो कई चौक-चौराहे हैं, लेकिन मोरवा प्रखंड के सरैया पुल के पास स्थित चौक की पहचान कुछ अलग ही है। इसे इलाके में लोग 'पेड़ा चौक' के नाम से जानते हैं। पिछले 50 वर्षों से यह स्थान अपने अनूठे और स्वादिष्ट पेड़े के लिए पूरे इलाके में मशहूर है। यहां की खासियत यह है कि इस एक ही चौक पर 25 से अधिक मिठाई की दुकानें मौजूद हैं, जो ग्राहकों को अपनी ओर खींचती हैं। सुबह होते ही इन दुकानों पर लोगों का जमावड़ा शुरू हो जाता है, जो देर शाम तक चलता रहता है।
दूर-दूर से आते हैं ग्राहक
इस चौक की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि दरभंगा, मुजफ्फरपुर और बेगूसराय जैसे अन्य जिलों से गुजरने वाले मुसाफिर भी गाड़ी रोककर पेड़ा खरीदना नहीं भूलते। कई लोग तो यहां से बड़ी मात्रा में पेड़ा पैक करवाकर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए ले जाते हैं। यह चौक अब एक प्रमुख स्टॉपओवर बन गया है, जहां लोग सफर के दौरान मिठास का आनंद लेते हैं।
शुद्धता और पारंपरिक विधि का मेल
दुकानदार सुरेश का कहना है कि पेड़ा चौक की सफलता के पीछे सबसे बड़ा राज इसकी शुद्धता है। यहां के कारीगर कभी भी बाजार में मिलने वाले रेडीमेड खोवा का उपयोग नहीं करते। इसके बजाय, वे हर दिन ताजा दूध मंगवाते हैं और उसे घंटों तक धीमी आंच पर तब तक उबालते हैं जब तक वह पूरी तरह खोवा न बन जाए। इस प्रक्रिया में दूध को लगातार चलाते रहना पड़ता है, जिससे पेड़े में एक विशेष स्वाद और दानेदार बनावट आती है। अंत में, संतुलित मात्रा में चीनी मिलाकर इसे पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है।
बिक्री के चौंकाने वाले आंकड़े
इस चौक पर मौजूद 25 से अधिक दुकानों के कारोबार का पैमाना बहुत बड़ा है। आंकड़ों के अनुसार, हर एक दुकान पर रोजाना औसतन 20 से 30 किलोग्राम पेड़े की बिक्री होती है। इस मिठाई को बनाने के लिए खपत होने वाले दूध का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक दुकान में रोजाना एक क्विंटल से भी अधिक दूध का इस्तेमाल होता है। फिलहाल बाजार में यहां के पेड़े की कीमत 400 रुपये प्रति किलोग्राम तय की गई है।
देश-विदेश तक पहुंची मिठास
पेड़ा चौक की ख्याति अब केवल समस्तीपुर या बिहार तक सीमित नहीं रह गई है। यहाँ की शुद्धता और पुरानी परंपरा ने इसे एक ब्रांड बना दिया है। दुकानदारों के अनुसार, कई ग्राहक यहां से पेड़ा खरीदकर विदेश में रहने वाले अपने परिवार के सदस्यों और मित्रों के लिए भेजते हैं। 50 साल से चली आ रही यह परंपरा आज समस्तीपुर की पहचान का एक अहम हिस्सा बन चुकी है और सरैया पुल के पास स्थित यह छोटा-सा चौक पूरे प्रदेश में मिठास का पर्याय माना जाता है।
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