कद्दू के छिलके को फेंकने की भूल न करें, सिर्फ 10 मिनट में ऐसे बनाएं मिथिलांचल की मशहूर स्वादिष्ट भुजिया जीवनशैली एक महीने पहले 58
कद्दू की सब्जी बनाने के बाद अक्सर लोग उसके छिलके फेंक देते हैं, लेकिन मिथिलांचल की इस खास रेसिपी से आप सिर्फ 10 से 12 मिनट में बेहद लाजवाब भुजिया तैयार कर सकते हैं।

घर में जब भी कद्दू की सब्जी बनती है, तो आमतौर पर लोग उसके छिलकों को बेकार समझकर कचरे के डिब्बे में फेंक देते हैं। अगर आप भी अब तक ऐसा ही करते आए हैं, तो अपनी इस आदत को तुरंत बदल लीजिए। बिहार के मिथिलांचल क्षेत्र में कद्दू के इन छिलकों से बेहद स्वादिष्ट भुजिया बनाई जाती है, जो सादे भोजन का स्वाद भी कई गुना बढ़ा देती है। सबसे अच्छी बात यह है कि यह पारंपरिक रेसिपी बहुत ही कम समय और बेहद कम सामग्री के साथ बनकर तैयार हो जाती है। इसे पकाने में सिर्फ 10 से 12 मिनट का समय लगता है।

भुजिया बनाने की तैयारी कैसे करें

इस स्वादिष्ट डिश को बनाने के लिए आपको कद्दू छीलते समय एक छोटी सी बात का विशेष ध्यान रखना होगा। जब आप कद्दू को छील रहे हों, तो छिलके के साथ थोड़ा सा गूदा भी लगा रहने दें। इसके बाद, इन छिलकों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें और फिर इन्हें चाकू की मदद से बिल्कुल पतले-पतले टुकड़ों में काट लें।

कद्दू के छिलके की भुजिया बनाने की आसान विधि

  • सबसे पहले एक कड़ाही लें और उसमें थोड़ा सा तेल डालकर गैस पर गर्म होने के लिए रखें।
  • जब तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए, तो उसमें तड़के के लिए जीरा और साबुत लाल मिर्च डालें।
  • तड़का चटकने के बाद कड़ाही में पहले से कटे हुए कद्दू के छिलके डाल दें।
  • अब इसमें स्वादानुसार नमक और थोड़ी सी हल्दी मिलाएं।
  • इसे अच्छी तरह से चलाने के बाद ढक दें और मध्यम आंच पर करीब 10 से 12 मिनट तक पकने दें।
  • जब भुजिया पूरी तरह से पककर तैयार हो जाए, तो गैस बंद करने से ठीक पहले इसमें एक चम्मच शुद्ध देसी घी डाल दें।

आखिर में देसी घी डालने से इस भुजिया का स्वाद और इसकी खुशबू दोनों ही बेहद लाजवाब हो जाते हैं। अब आपकी गरमा-गरम मिथिलांचल स्टाइल कद्दू के छिलके की स्वादिष्ट भुजिया परोसने के लिए बिल्कुल तैयार है। इसे आप दोपहर के भोजन में दाल-चावल के साथ या फिर सादी रोटी के साथ मजे से खा सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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