रक्षाबंधन पर खास तोहफा: सिर्फ 1 लीटर दूध से घर पर बनाएं बाजार जैसी शुद्ध खोया मिठाई जीवनशैली एक घंटा पहले 2
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भाई-बहन के रिश्ते की मिठास बढ़ाने के लिए आप घर पर ही ताजी खोया मिठाई तैयार कर सकती हैं। सतना निवासी उर्मिला मिश्रा की बताई गई इस आसान रेसिपी से आप केवल 1 लीटर दूध का उपयोग कर शुद्ध और स्वादिष्ट मिठाई बना सकते हैं।

त्योहार की मिठास और घर का शुद्ध स्वाद

रक्षाबंधन का त्योहार भाई और बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। इस खास अवसर पर जब हर तरफ खुशियों का माहौल होता है, तो घर में बनने वाली मिठाइयों की महक इस दिन को और भी यादगार बना देती है। बाजार में मिलने वाली मिलावटी मिठाइयों के बजाय यदि आप घर पर ही ताजी और शुद्ध सामग्री से मिठाई तैयार करें, तो इसका आनंद दोगुना हो जाता है। सतना की रहने वाली उर्मिला मिश्रा के अनुसार, बघेलखंड के पारंपरिक अंदाज में खोया मिठाई बनाना न केवल सरल है, बल्कि यह बेहद स्वादिष्ट भी होती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बनाने के लिए आपको बहुत अधिक तामझाम की आवश्यकता नहीं है, बस 1 लीटर फुल क्रीम दूध ही मुख्य सामग्री के रूप में पर्याप्त है।

खोया तैयार करने की विधि

इस स्पेशल मिठाई को बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत दूध को उबालने से होती है। इसके लिए एक भारी तले की कड़ाही का चुनाव करना सबसे महत्वपूर्ण है, ताकि दूध नीचे से जले नहीं। अब इसमें 1 लीटर फुल क्रीम दूध डालें और इसे मध्यम आंच पर पकने के लिए रख दें। जब दूध में पहला उबाल आ जाए, तो गैस की आंच को धीमा कर दें और धीरे-धीरे इसे पकने दें। इस प्रक्रिया के दौरान दूध को बीच-बीच में चलाते रहना बहुत जरूरी है, वरना यह कड़ाही के किनारों या तले में चिपक सकता है। इस काम में करीब 30 से 40 मिनट का समय लग सकता है, या फिर यह दूध की मात्रा और गाढ़ेपन पर निर्भर करता है। जैसे-जैसे समय बीतता है, दूध का पानी सूखने लगता है और यह धीरे-धीरे गाढ़ा होकर खोये (मावे) का रूप ले लेता है। खोया तैयार करते समय आखिरी के चरणों में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि गाढ़ा होने के बाद दूध के जलने का खतरा ज्यादा रहता है।

मिठाई का मिश्रण तैयार करना

जब दूध पूरी तरह से खोया बन जाए, तो इसमें अपनी पसंद और स्वादानुसार चीनी मिला लें। मिठास को और अधिक खुशबूदार बनाने के लिए इसमें लगभग एक छोटा चम्मच इलायची पाउडर डालें और इसे अच्छी तरह मिलाएं। चीनी घुलने के बाद मिश्रण फिर से थोड़ा पतला हो सकता है, लेकिन घबराएं नहीं। इसे धीमी आंच पर लगातार चलाते रहें जब तक कि चीनी का अतिरिक्त पानी पूरी तरह सूख न जाए और मिश्रण दोबारा से एकसार (एकदम गाढ़ा) न हो जाए। आपको तब तक इसे भूनना है जब तक कि यह कड़ाही के किनारों को पूरी तरह न छोड़ने लगे। इसका मतलब है कि आपकी मिठाई का मिश्रण अब जमने के लिए तैयार है।

सजावट और जमने की प्रक्रिया

एक बार मिश्रण तैयार हो जाने के बाद गैस को बंद कर दें। अब एक थाली या प्लेट पर हल्का सा घी लगाकर उसे चिकना कर लें ताकि मिठाई बाद में आसानी से निकल सके। तैयार गरम मिश्रण को इस थाली में डालें और चम्मच की सहायता से इसे चारों तरफ समान मोटाई में फैला दें। अब ऊपर से बारीक कटे हुए बादाम और पिस्ता डालकर इसे गार्निश करें। ड्राई फ्रूट्स को हल्के हाथों से दबाएं ताकि वे मिठाई में अच्छी तरह सेट हो जाएं। आप अपनी पसंद के अनुसार इसमें काजू या किशमिश का उपयोग भी कर सकते हैं। मिश्रण को प्लेट में सेट करने के बाद इसे थोड़ी देर बाहर ठंडा होने दें। इसके बाद इसे 2 से 3 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें, ताकि यह अच्छी तरह से जम जाए। जब मिठाई पूरी तरह सेट हो जाए, तो एक तेज धार वाले चाकू से अपनी मनपसंद आकृति जैसे चौकोर, आयताकार या डायमंड शेप में काट लें।

घर पर बनी मिठाई के फायदे

बाजार की तुलना में घर पर बनाई गई मिठाई न केवल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि इसे हम अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज भी कर सकते हैं। उर्मिला मिश्रा के मुताबिक, बघेलखंड के क्षेत्रों में त्योहारों पर पारंपरिक तरीके से दूध और खोये का उपयोग करके विभिन्न मिठाइयां बनाने का चलन पुराना है। इस मिठाई का एक बड़ा लाभ यह है कि इसे आप मेहमानों को चाय के साथ परोस सकते हैं या रक्षाबंधन की थाली को सजाने में उपयोग कर सकते हैं। चूंकि अगस्त के महीने में बरसात का मौसम होता है, इसलिए यह सलाह दी जाती है कि इस मिठाई को हमेशा एक साफ और सूखे एयरटाइट एयरटाइट डिब्बे में रखें और फ्रिज के अंदर ही स्टोर करें। इस तरह से आप इस ताजी खोया मिठाई का आनंद 10 दिनों तक आराम से ले सकते हैं। बिना किसी कृत्रिम प्रिजर्वेटिव के बनी यह मिठाई इस बार आपके रक्षाबंधन को निश्चित रूप से खास बना देगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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