डीग के मेवात का जायका: मिल्क केक से लेकर विशाल जलेबा तक, इन मिठाइयों की दीवानी है पूरी दुनिया जीवनशैली 2 महीने पहले 71
राजस्थान के डीग जिले के मेवात क्षेत्र में मिलने वाली पारंपरिक मिठाइयां अपनी शुद्धता और बेमिसाल स्वाद के लिए जानी जाती हैं। यहाँ की खास मिठाइयां जैसे मिल्क केक, पंचमेवा और बड़े आकार के जलेबे का स्वाद चखने के लिए लोग दूर-दूर से यहाँ खिंचे चले आते हैं।

मेवात की मिठाइयों में बसी है परंपरा

राजस्थान का डीग जिला न केवल अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ का मेवात क्षेत्र अपने विशिष्ट खान-पान और खास तौर पर अपनी पारंपरिक मिठाइयों के लिए भी काफी चर्चित है। इस क्षेत्र की मिठाइयों की सबसे बड़ी विशेषता उनका शुद्ध देसी अंदाज है। आज भी मेवात के हलवाई इन मिठाइयों को बनाने के लिए उन्हीं पुरानी विधियों का पालन करते हैं, जो दशकों से चली आ रही हैं। यही कारण है कि यहाँ का स्वाद आज भी बरकरार है और लोग इनका आनंद लेने के लिए दूर-दूर से यहाँ आते हैं। चाहे मिल्क केक हो, पंचमेवा हो या फिर बड़े आकार का जलेबा, हर मिठाई की अपनी एक खास पहचान है जो उसे अन्य क्षेत्रों से अलग करती है।

दानेदार मिल्क केक का लाजवाब स्वाद

मेवात क्षेत्र के मिल्क केक की बात ही कुछ और है। शुद्ध दूध और देसी घी के सही तालमेल से तैयार होने वाला यह मिल्क केक हल्का भूरा रंग लिए होता है। इसकी बनावट दानेदार होती है, जो मुंह में जाते ही घुल जाती है। मेवात के स्थानीय हलवाई इसे बहुत ही धैर्य के साथ धीमी आंच पर घंटों तक पकाते हैं, जिससे इसमें दूध का गहरा और सोंधा स्वाद उतर आता है। यही वजह है कि त्योहारों या शादी-ब्याह के आयोजनों में इस मिल्क केक की भारी मांग रहती है। लोग न केवल खुद इसे खाना पसंद करते हैं, बल्कि एक बेहतरीन उपहार के रूप में भी इसे ले जाना नहीं भूलते।

स्वास्थ्य और स्वाद का संगम है पंचमेवा

मेवात की मिठाइयों की फेहरिस्त में पंचमेवा का स्थान बहुत खास है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह मिठाई सूखे मेवों के मेल से तैयार की जाती है। इसमें काजू, बादाम, पिस्ता और गोला (सूखा नारियल) जैसे पौष्टिक मेवों का भरपूर इस्तेमाल होता है। यह न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि इसे सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है। शादियों के सीजन और तीज-त्योहारों पर मेवात के बाजारों में पंचमेवा की सजावट देखने लायक होती है। इसका रिच और शाही स्वाद हर उम्र के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

बड़े आकार के जलेबे की मिठास

अगर आपने मेवात के जलेबे का स्वाद नहीं चखा, तो मान लीजिए कि आपकी यात्रा अधूरी रह गई। जलेबी का यह विशाल स्वरूप मेवात में बेहद लोकप्रिय है। इसे काफी बड़े आकार में बनाया जाता है और देसी घी में तलने के बाद चाशनी में अच्छी तरह डुबोया जाता है। इसका बाहरी हिस्सा कुरकुरा और अंदर का भाग रसीला होता है, जो खाते ही मुंह में मिठास का एक अलग ही अहसास छोड़ जाता है। लोग इसे अक्सर सुबह के नाश्ते में गरम-गरम खाना पसंद करते हैं, हालांकि खास अवसरों पर भी इसकी मांग काफी रहती है।

मुलायम पेड़े और खस्ता बालूशाही का जादू

मेवात की गलियों में आपको शुद्ध मावे और चीनी से बने मुलायम पेड़े भी मिलेंगे। इन पेड़ों की खूबी उनकी सादगी और देसी महक है। धार्मिक आयोजनों, मंदिरों में प्रसाद के तौर पर या मेहमानों के स्वागत के लिए मेवात में इन पेड़ों का खूब उपयोग होता है। इसके अलावा, बालूशाही भी इस क्षेत्र की एक प्रसिद्ध मिठाई है। अपनी अनूठी कुरकुरी परत और अंदरूनी मिठास के लिए मशहूर बालूशाही यहां की हर छोटी-बड़ी दुकान पर आसानी से मिल जाती है। कई लोग तो शाम की चाय के साथ इन बालूशाही का आनंद लेना बेहद पसंद करते हैं। इन सभी मिठाइयों का शुद्ध देसी घी और ताजे मावे के साथ मेल इन्हें मेवात की एक अलग पहचान बनाता है, जो यहां आने वाले हर पर्यटक के दिल में बस जाती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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