छत्तीसगढ़ की पारंपरिक मिठाई अरसा: मात्र 5 मिनट में बनकर तैयार, 15 दिनों तक रहती है सुरक्षित जीवनशैली 15 घंटे पहले 3
छत्तीसगढ़ की मशहूर मिठाई अरसा को घर पर बनाना बेहद आसान है। चावल और गुड़ के मिश्रण से तैयार होने वाली यह मिठाई न केवल स्वाद में लाजवाब है, बल्कि इसे लंबे समय तक स्टोर करके भी रखा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ी संस्कृति और स्वाद का प्रतीक अरसा

छत्तीसगढ़ के पारंपरिक व्यंजनों की सूची में अरसा मिठाई का स्थान काफी ऊंचा है। चावल और गुड़ के मेल से बनने वाली यह मिठाई राज्य की खानपान संस्कृति को दर्शाती है। तीज-त्योहारों के दौरान छत्तीसगढ़ के घरों में अरसा की खुशबू अक्सर महसूस की जाती है। बालोद कलेक्टोरेट परिसर में बिहान समूह द्वारा संचालित कैंटीन में भी लोग इस पारंपरिक मिठाई का स्वाद लेने के लिए पहुंचते हैं। पिछले कई वर्षों से अरसा बनाने वाली सेवती ठाकुर ने इस मिठाई को बनाने की सरल विधि और इसकी विशेषताओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

अरसा बनाने की सरल रेसिपी

अरसा को तैयार करने की प्रक्रिया बहुत जटिल नहीं है, लेकिन सही सामग्री का अनुपात इसमें सबसे महत्वपूर्ण होता है। सेवती ठाकुर के अनुसार, यदि आप एक किलो चावल का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसके लिए लगभग आधा किलो गुड़ की आवश्यकता होती है। इसे बनाने के चरण निम्नलिखित हैं:

  • सबसे पहले चावल को अच्छी तरह धोकर करीब तीन घंटे तक पानी में भिगोकर रखा जाता है।
  • भिगोने के बाद चावल का पानी निकालकर इसे पूरी तरह सुखा लिया जाता है।
  • सूख जाने के बाद चावल को दरदरा पीस लिया जाता है।
  • एक कड़ाही में गुड़ डालकर उसका पाक तैयार किया जाता है।
  • तैयार गुड़ के पाक में पिसे हुए चावल के पाउडर को डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है ताकि मिश्रण तैयार हो सके।
  • इसके बाद इस मिश्रण से छोटे-छोटे आकार के अरसे तैयार किए जाते हैं।
  • अंत में इन्हें गर्म तेल में करीब पांच मिनट तक पकाया जाता है।

इस आसान विधि के माध्यम से कम समय में ही स्वादिष्ट अरसे बनकर तैयार हो जाते हैं, जिन्हें मेहमानों के सामने परोसा जा सकता है या खुद घर पर आनंद लिया जा सकता है।

स्वाद को बढ़ाने के खास उपाय

अरसे के स्वाद और महक को और अधिक बेहतर बनाने के लिए इसमें कुछ अतिरिक्त सामग्री भी डाली जा सकती है। इसमें मुख्य रूप से सौंफ और तिल का उपयोग किया जाता है। ये दोनों चीजें न केवल इसकी खुशबू में चार चांद लगाती हैं, बल्कि मिठाई को एक बेहतरीन पारंपरिक स्वाद भी प्रदान करती हैं।

लंबे समय तक भंडारण की सुविधा

अरसे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह जल्दी खराब नहीं होता। यदि इसे सही तरीके से बनाया जाए और उचित ढंग से सुरक्षित रखा जाए, तो यह मिठाई लगभग 10 से 15 दिनों तक खाने योग्य बनी रहती है। यही कारण है कि इसे त्योहारों के मौके पर अधिक मात्रा में बनाया जाता है।

त्योहारों में अरसा का महत्व

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में त्योहारों के अवसर पर अरसा एक अनिवार्य हिस्सा बन जाता है। रक्षाबंधन, होली और दीपावली जैसे प्रमुख पर्वों पर परिवार मिलकर इसे बनाते हैं। तीज के पर्व के दौरान तो इसकी मांग और भी बढ़ जाती है। अरसा केवल एक मीठा व्यंजन नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की पारंपरिक विरासत और त्योहारों की मिठास को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का एक माध्यम भी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप