राजस्थान
8 घंटे पहले
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अस्पताल में सुरक्षा को लेकर उठे गंभीर सवाल
राजस्थान के बाड़मेर स्थित मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल में उस समय अफरातफरी मच गई, जब बीती रात इमरजेंसी वार्ड में कुछ युवकों ने उपद्रव मचाया। मरीज को किसी दूसरे अस्पताल में रेफर करने की मांग को लेकर आए इन युवकों ने न केवल अस्पताल की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया, बल्कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के साथ भी बदसलूकी की। इस घटना के बाद से अस्पताल परिसर में तैनात कर्मचारियों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा हो गई है।
आधी रात को इमरजेंसी में मचा बवाल
मामले की जानकारी देते हुए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर रमेश कटारिया ने बताया कि बीती रात करीब 3 बजे का समय था, जब दो-तीन युवक एक मरीज को लेकर इमरजेंसी वार्ड में आए थे। मरीज को सांस लेने में दिक्कत की शिकायत थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए तत्काल उपचार शुरू कर दिया। अस्पताल के प्रोटोकॉल के तहत मरीज की जरूरी जांचें भी करवाई गईं। डॉक्टर के अनुसार, सभी मेडिकल पैरामीटर्स सामान्य थे और मरीज की स्थिति खतरे से बाहर थी।
रेफर की मांग पर भड़के युवक
विवाद की मुख्य वजह मरीज को रेफर करने की मांग बनी। डॉक्टरों द्वारा जांच पूरी करने के बाद जब उन्हें बताया गया कि मरीज की स्थिति स्थिर है, तो साथ आए युवक भड़क गए। उन्होंने मरीज को तत्काल किसी दूसरे अस्पताल में भेजने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। जब डॉक्टरों ने चिकित्सीय आधार पर रेफर करने से मना किया, तो एक युवक आपा खो बैठा। उसने गुस्से में आकर इमरजेंसी वार्ड के मुख्य गेट में जमकर तोड़फोड़ की और वार्ड का दरवाजा क्षतिग्रस्त कर दिया। साथ ही, मौके पर मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग कर बदसलूकी की गई।
पुलिस की आहट मिलते ही फरार हुए आरोपी
अस्पताल अधीक्षक डॉ. हनुमान राम चौधरी ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस को सूचित कर दिया गया था। पुलिस के आने की आहट मिलते ही आरोपी युवक मौके से फरार हो गए। हालांकि, अस्पताल प्रशासन ने अभी तक इस मामले में आधिकारिक तौर पर कोई लिखित शिकायत पुलिस में दर्ज नहीं कराई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठ रहे हैं सवाल
इस घटना ने बाड़मेर जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा कर्मियों का कहना है कि वे दिन-रात मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं, लेकिन ऐसी घटनाओं से उनका मनोबल पूरी तरह टूट जाता है। अस्पताल के कर्मचारियों ने मांग की है कि परिसर के भीतर पर्याप्त सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं। अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि सरकारी अस्पताल में तोड़फोड़ करने वाले और स्वास्थ्य कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने वाले उपद्रवियों के खिलाफ पुलिस तुरंत सख्त कानूनी कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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