भारत
एक घंटा पहले
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विचारों
तृणमूल में बगावत का बढ़ता संकट: अपने 28 साल के इतिहास में तृणमूल कांग्रेस इस समय सबसे गंभीर झटकों में से एक से गुज़र रही है, क्योंकि पार्टी के भीतर ही विद्रोह के सुर तेज़ हो गए हैं। पश्चिम बंगाल में मिली करारी हार के कुछ ही हफ़्तों बाद ममता बनर्जी की पार्टी विधानसभा में पहले ही बड़ी टूट का सामना कर चुकी है और अब यही दरार संसद तक पहुंचती दिख रही है, जहां पार्टी के दो हिस्सों में बंटने की आशंका मंडरा रही है।
बागी गुट को 19 सांसदों के समर्थन का दावा
तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों के खेमे को 19 सांसदों का साथ मिलने की बात कही जा रही है। यह संख्या पार्टी की संसदीय ताकत के दो-तिहाई हिस्से के बराबर है, जो एक अलग गुट बनाने के लिए ज़रूरी मानी जाती है। हालांकि आधिकारिक रूप से अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
सूची में शामिल बड़े नाम
बागी सूची पर हस्ताक्षर करने वालों में यूसुफ पठान, सायनी घोष और माला रॉय जैसे सांसदों के नाम सामने आए हैं। इन नामों के जुड़ने से पार्टी में बड़ी फूट पड़ने की आशंका और गहरी हो गई है।
कल्याण बनर्जी का अल्टीमेटम
गुरुवार को टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने ममता बनर्जी को सीधा अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि उन्हें अभिषेक और कल्याण बनर्जी में से किसी एक को चुनना होगा। इस बयान के बाद पार्टी के भीतर की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई।
कीर्ति आजाद ने भाजपा पर लगाया आरोप
इसके बाद आज टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने इस पूरी बगावत के पीछे भाजपा का हाथ बताया है। उनके इस आरोप ने मामले को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।
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