RBI के फैसले के बावजूद बाजार में सुस्ती, सेंसेक्स 117 अंक लुढ़का, निफ्टी फिसलकर 23,366 पर बंद बाज़ार एक घंटा पहले 2
रिजर्व बैंक के रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखने के बाद भी शेयर बाजार में खरीदारी नहीं लौटी। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में बंद हुए।

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को दिनभर भारी उठापटक का दौर चला। निवेशकों का सारा ध्यान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा पर लगा हुआ था। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25% के स्तर पर बरकरार रखा और अपने रुख में भी कोई फेरबदल नहीं किया, फिर भी बाजार में खरीदारी की रफ्तार नहीं पकड़ पाई। नतीजतन कारोबारी सत्र के समापन पर सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों ही प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 116.67 अंक यानी 0.16% की कमजोरी के साथ 74,243.34 पर ठहरा। उधर, एनएसई निफ्टी भी 49.85 अंक यानी 0.21% की गिरावट लेकर 23,366.70 के स्तर पर आ गया। दिनभर बाजार में अस्थिरता हावी रही। एक वक्त सूचकांक हरे निशान में भी नजर आए, मगर बाद में बिकवाली का दबाव बढ़ गया और प्रमुख इंडेक्स नुकसान में बंद हुए। आईटी और मेटल शेयरों में बिकवाली ने बाजार पर बोझ डाला, जबकि बैंकिंग शेयरों ने इसे कुछ हद तक थामे रखने की कोशिश की।

किन शेयरों में टूट और कौन रहे मजबूत

निफ्टी के सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में मेटल और आईटी क्षेत्र की कंपनियां सबसे आगे रहीं। हिंदाल्को इंडस्ट्रीज, विप्रो, ट्रेंट, कोल इंडिया और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के शेयरों में जोरदार बिकवाली दर्ज की गई, जिससे बाजार पर दबाव और गहरा हो गया। दूसरी ओर, अडानी एंटरप्राइजेज, हिंदुस्तान यूनिलीवर, अडानी पोर्ट्स, बजाज फाइनेंस और एक्सिस बैंक के शेयरों में मजबूती ने बाजार की गिरावट को सीमित दायरे में रखने में मदद की।

बाजार में गिरावट के पीछे की वजहें

1. निवेशकों की मुनाफावसूली

दिन की शुरुआत बेहद मजबूत रही थी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 300 अंक से अधिक चढ़ गया था और निफ्टी भी 23,500 के पार निकल गया था। लेकिन शेयरों के दाम चढ़ते ही कई निवेशक मुनाफा बुक करने में जुट गए। इसी वजह से बाजार की शुरुआती बढ़त धीरे-धीरे खत्म हो गई और अंत में सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।

2. महंगाई के अनुमान में बढ़ोतरी

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई का अनुमान 4.6% से बढ़ाकर 5.1% कर दिया है। केंद्रीय बैंक के मुताबिक वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में तेजी के चलते पेट्रोल और डीजल महंगे हुए हैं। मई से लेकर अब तक पेट्रोल के दाम करीब 7.4% और डीजल के दाम 8.4% तक बढ़ चुके हैं। महंगाई के इस बढ़ते दबाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी, जिसका सीधा असर बाजार पर दिखा।

3. जीडीपी अनुमान में कटौती

रिजर्व बैंक ने देश की आर्थिक विकास दर का अनुमान भी घटा दिया है। अब वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी ग्रोथ 6.6% रहने का अनुमान जताया गया है, जबकि अप्रैल में यह 6.9% बताई गई थी। यह आंकड़ा बीते वित्त वर्ष की अनुमानित 7.6% विकास दर से भी कम है। कमजोर ग्रोथ के संकेत मिलने से निवेशकों का भरोसा कुछ डगमगाया और बाजार पर दबाव और बढ़ गया।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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