ओडिशा: नए सेप्टिक टैंक का काल बना सेंट्रिंग खोलना, दम घुटने से 3 मजदूरों की दुखद मौत भारत एक घंटा पहले 7
ओडिशा के रायगड़ा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान ऑक्सीजन की कमी से तीन मजदूरों की जान चली गई।

हादसे का शिकार हुए 3 मजदूर

ओडिशा के रायगड़ा जिले में स्थित पद्मपुर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। यहाँ एक नवनिर्मित सेप्टिक टैंक के अंदर दम घुटने से 3 व्यक्तियों की जान चली गई है। इस घटना ने पूरे इलाके में कोहराम मचा दिया है। हादसा उस वक्त हुआ जब ये लोग टैंक के भीतर से सेंट्रिंग का सामान बाहर निकालने की प्रक्रिया में जुटे थे। बंद जगह के भीतर ऑक्सीजन का स्तर कम होने या किसी अन्य जहरीली गैस के असर से यह अनहोनी घटी।

मदद की कोशिश बनी जानलेवा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सबसे पहले एक मजदूर काम करने के उद्देश्य से सेप्टिक टैंक के अंदर उतरा था। थोड़ी देर बाद उसे वहां सांस लेने में गंभीर समस्या होने लगी। उसे मुसीबत में देख बाहर मौजूद अन्य लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की। अपनी जान की परवाह किए बिना, एक के बाद एक अन्य लोग भी अंदर उतर गए। दुर्भाग्यवश, टैंक के अंदर दाखिल होते ही वे भी जहरीली हवा या ऑक्सीजन की कमी के कारण बेहोश हो गए और वापस बाहर नहीं आ सके। इस घटना के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गई सांसें

जैसे ही इस हादसे की सूचना स्थानीय प्रशासन और दमकल विभाग को मिली, फायर सर्विस की टीम तुरंत हरकत में आई और बचाव कार्य शुरू किया। टीम ने काफी मशक्कत के बाद तीनों लोगों को टैंक से बाहर निकाला। आनन-फानन में उन्हें उपचार के लिए पद्मपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल में डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया। मृतकों की पहचान हरिश्चंद्र बीर, आलोक कराड़ा और प्रकाश लिमा के तौर पर की गई है। इस घटना के बाद उनके परिवारों में मातम पसर गया है।

सुरक्षा पर उठे सवाल

इस दुखद हादसे ने बंद और संकरे स्थानों में काम करने के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा सावधानियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सेप्टिक टैंक या सीवेज जैसी जगहों पर पर्याप्त वेंटिलेशन न होने की स्थिति में वहां जानलेवा गैसें बन जाती हैं। बिना उचित सुरक्षा उपकरण या वेंटिलेशन के ऐसी जगहों में उतरना किसी भी व्यक्ति के लिए घातक साबित हो सकता है। यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों का पालन करना कितना अनिवार्य है, ताकि किसी की जान को जोखिम में न डाला जाए।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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