थाईलैंड वैरायटी की मौसंबी से किसान की चांदी, 6 साल पहले लगाए 750 पौधे, अब खेत पहुंच रहे खरीदार बिहार एक महीने पहले 22
पश्चिम चम्पारण के नौतन प्रखंड के किसान शिशिर दूबे ने 3 एकड़ में थाईलैंड वैरायटी की मौसंबी के 750 पौधे लगाए थे, जो अब फलों से लदे हैं और 80 रुपये प्रति किलो की दर से खेत से ही बिक रहे हैं।

पश्चिम चम्पारण जिले के किसान अब परंपरागत फसलों से हटकर ऐसे फलों की बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं, जो बिहार के लिए अब तक नई और दुर्लभ मानी जाती हैं। दिलचस्प बात यह है कि इस तरह की बागवानी से किसानों को उम्मीद से कहीं अधिक मुनाफा मिल रहा है। ऐसा ही एक उदाहरण नौतन प्रखंड के बैकुंठवा गांव के निवासी किसान शिशिर दूबे ने पेश किया है, जिन्होंने मौसंबी की बागवानी कर सबको चौंका दिया है।

छह साल पहले शुरू हुआ सफर

शिशिर बताते हैं कि उन्होंने करीब 6 साल पहले मौसंबी की बागवानी शुरू की थी। पिछले वर्ष से पेड़ों पर फलन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, जो इस साल अपने चरम पर पहुंच चुकी है। खास बात यह रही कि उपोष्णकटिबंधीय फल होने के बावजूद, उष्णकटिबंधीय जलवायु वाले बिहार में इसका फलन बेहद अच्छे ढंग से हुआ है।

न कीटों का डर, न मवेशियों का खतरा

नींबू के परिवार से ताल्लुक रखने के कारण इस फसल पर न तो कीटों का हमला हुआ और न ही किसी मवेशी ने इसे चरा। यही वजह है कि इसकी खेती किसानों के लिए अपेक्षाकृत आसान साबित हो रही है।

तीन एकड़ में 750 पौधे

शिशिर ने कुल 3 एकड़ जमीन में मौसंबी की बागवानी की है, जिसमें करीब 750 पौधे लगाए गए थे। बीते 6 वर्षों में ये सभी पौधे अब पेड़ का रूप ले चुके हैं और प्रति पेड़ 40 किलो तक मौसंबी का फलन हुआ है। उनका अनुमान है कि इस बार पूरी बागवानी से वे करीब 12 टन तक मौसंबी की हार्वेस्टिंग कर सकते हैं।

खेत से ही 80 रुपये किलो बिक्री

चूंकि बिहार में मौसंबी की बागवानी अब तक दुर्लभ है, इसलिए फल और जूस के व्यवसायी इसकी खरीदारी सीधे खेत से ही 80 रुपये प्रति किलो की दर से कर ले रहे हैं। शिशिर का कहना है कि जैसे-जैसे पेड़ बड़े होते जाएंगे, फलों की मात्रा भी बढ़ती जाएगी और प्रति पेड़ यह एक क्विंटल तक पहुंच जाएगी। ऐसे में किसी भी पारंपरिक फसल की तुलना में मौसंबी की बागवानी कहीं अधिक लाभदायक साबित हो सकती है।

इस वैरायटी का करें चयन

शिशिर सलाह देते हैं कि पौधा खरीदते समय इस बात का खास ध्यान रखें कि वैरायटी थाईलैंड की ही हो। उन्होंने स्वयं थाईलैंड वैरायटी की मौसंबी की बागवानी की है। उनके अनुसार, देसी किस्म की तुलना में इस वैरायटी के फल का स्वाद अधिक मीठा होता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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