Bhindi Farming: बोकारो के रंजन शर्मा की भिंडी से कमाई, 17 हजार की लागत में 45 दिनों में 80 हजार की आमदनी, बताया सफलता का राज झारखंड एक महीने पहले 20
झारखंड के बोकारो जिले के भिस्की गांव के किसान रंजन शर्मा ने महज 50 डिसमिल जमीन पर भिंडी की खेती कर डेढ़ महीने में चार गुना से अधिक मुनाफा कमाया है। उनकी यह सफलता आसपास के किसानों के लिए मिसाल बन रही है।

झारखंड के बोकारो जिले के चंदनक्यारी प्रखंड में बसे भिस्की गांव के किसान रंजन शर्मा स्मार्ट खेती के दम पर अच्छी कमाई का रास्ता बना रहे हैं। उन्होंने सिर्फ 50 डिसमिल जमीन पर भिंडी उगाकर डेढ़ महीने में लागत के मुकाबले चार गुना से ज्यादा मुनाफा हासिल किया है। उनकी इस उपलब्धि से इलाके के दूसरे किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।

परिवार की परंपरा को दी आधुनिक दिशा

रंजन शर्मा बताते हैं कि वह पेशेवर किसान हैं और बचपन से ही अपने परिवार को खेती करते देखते आए हैं। इसी पारिवारिक परंपरा को आगे ले जाते हुए उन्होंने आधुनिक तौर-तरीकों के साथ खेती की शुरुआत की।

मार्च में हुई बुवाई, कम समय में तैयार फसल

उनके मुताबिक भिंडी की बुवाई मार्च महीने में की गई थी। किस्म के अनुसार भिंडी की फसल 45 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को कम वक्त में ही बेहतर कमाई का अवसर मिल जाता है।

लागत और उत्पादन का गणित

रंजन शर्मा के अनुसार 50 डिसमिल जमीन पर भिंडी की खेती में करीब 17 हजार रुपये की लागत आई। किसान करीब दो महीने तक भिंडी की तुड़ाई कर सकते हैं और पूरे सीजन में 40 से 50 क्विंटल तक उपज ले सकते हैं।

बाजार और मुनाफा

उन्होंने बताया कि इस समय बाजार में भिंडी 20 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रही है। वह अपनी ज्यादातर सब्जियां धनबाद के कोलियरी इलाकों और आसपास के बाजारों में बेचते हैं। 40 क्विंटल उत्पादन होने पर किसान करीब 80 हजार रुपये तक की आमदनी कर सकते हैं और लागत निकालने के बाद लगभग 63 हजार रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो सकता है।

देखभाल और सफलता का मंत्र

रंजन शर्मा के अनुसार भिंडी की खेती में कीट लगने और फल के टेढ़े होने जैसी दिक्कतें अक्सर आती हैं। इनसे बचाव के लिए समय-समय पर दवा का छिड़काव जरूरी है। उनका मानना है कि सही देखभाल और आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान बेहतर पैदावार के साथ अच्छी कमाई कर सकते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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