रांची की गौरी का कमाल, पुरानी सुजनी और मधुबनी पेंटिंग से बना रही हैं इंटरनेशनल फैशन झारखंड 2 घंटे पहले 3
रांची की रहने वाली गौरी ने पुरानी सुजनी और पारंपरिक मधुबनी पेंटिंग का उपयोग करके अनूठे कपड़े तैयार किए हैं, जिनकी मांग अब कनाडा तक पहुंच गई है।

कबाड़ से जुगाड़ का बेहतरीन उदाहरण

रचनात्मकता की कोई सीमा नहीं होती, और रांची की गौरी इसका जीता-जागता उदाहरण हैं। उन्होंने उन पुरानी और बेकार मानी जाने वाली सुजनी (बिहारी घरों में बच्चों के लिए इस्तेमाल होने वाली चादर) का उपयोग करके ट्रेंडी फैशन की शुरुआत की है। उनके द्वारा तैयार किए गए कोट, क्रॉप टॉप और ट्रेंच कोट युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। गौरी ने इन कपड़ों पर मधुबनी पेंटिंग को जोड़कर एक नया फैशन ट्रेंड सेट किया है।

युवाओं और कॉर्पोरेट जगत में मांग

गौरी ने बताया कि मधुबनी पेंटिंग हमारी सांस्कृतिक विरासत है, जिसे वह बचपन से ही देखती आ रही हैं। उन्होंने बाजार में मौजूद पारंपरिक साड़ियों और सलवार सूट से अलग हटकर युवाओं के लिए आधुनिक कपड़े बनाने का फैसला किया। वर्तमान में उनके द्वारा बनाए गए कोट, ट्राउजर और कुर्तियां कॉर्पोरेट जगत और सरकारी दफ्तरों में काम करने वाली महिलाओं के बीच बेहद पसंद की जा रही हैं। उनके कलेक्शन में राम-सीता की आकृति, मछली के चित्र और विवाह की रस्मों को खूबसूरती से पेंट किया जाता है, जो पहनने वाले को एक अलग पहचान देता है।

कनाडा तक पहुंच रहा है काम

गौरी की इस मुहिम से अब 40 से ज्यादा कलाकार जुड़े हुए हैं, जो हाथों से पेंटिंग का काम करते हैं। उनके काम की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें अब कनाडा से भी ऑर्डर मिल रहे हैं और वे पूरे भारत में डिलीवरी करती हैं। गौरी के अनुसार, ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से उन्हें हर दिन औसतन 15 से 20 ऑर्डर मिलते हैं।

मेहनत और कीमत

इन कपड़ों को तैयार करने में काफी बारीकी और समय की जरूरत होती है। एक शर्ट पर पेंटिंग पूरी करने में 1 से 2 दिन का समय लग जाता है। यही कारण है कि उनके एक टॉप की कीमत 3 से 5000 रुपये के बीच होती है। अपने घर से शुरू किया गया यह काम अब एक आधिकारिक वेबसाइट और इंस्टाग्राम पेज के माध्यम से बड़े स्तर पर पहुंच चुका है, जहां ग्राहक उनके यूनिक कलेक्शन को देख और खरीद सकते हैं।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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