झारखंड राज्यसभा चुनाव: दो सीटों पर तीन उम्मीदवार, समझिए जीत का पूरा गणित और विधायकों के आंकड़े झारखंड 3 दिन पहले 16
झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं और एक सीट जीतने के लिए 27 से 28 वोटों की दरकार है। असली मुकाबला कांग्रेस के प्रणव झा और एनडीए समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी के बीच माना जा रहा है।

झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर है। दो सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में तीन उम्मीदवारों के उतरने से मुकाबला रोचक मोड़ पर पहुंच गया है। सत्ताधारी महागठबंधन की ओर से झामुमो के बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा प्रत्याशी हैं, जबकि एनडीए ने उद्योगपति और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को अपना समर्थन दिया है।

हालांकि इस बार का मुख्य संघर्ष कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के बीच आंका जा रहा है। मतदान से पहले हर दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में लगा है। सूत्रों के अनुसार एनडीए अपने सभी 24 विधायकों को रांची के एक होटल में ठहराने की तैयारी कर रहा है, ताकि वोटिंग से पहले किसी प्रकार की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग की गुंजाइश न रहे।

जीत के लिए कितने वोट जरूरी?

झारखंड विधानसभा की मौजूदा स्थिति के मुताबिक राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी प्रत्याशी को करीब 27 से 28 प्रथम वरीयता (फर्स्ट प्रेफरेंस) वोट चाहिए होते हैं। इसी कारण इस चुनाव का सारा गणित विधायकों की संख्या के इर्द-गिर्द घूम रहा है।

सीटों का पूरा गणित

इस बार सबसे मजबूत स्थिति में झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) नजर आ रही है। महागठबंधन के भीतर विधानसभा सीटों का मौजूदा आंकड़ा इस प्रकार है:

  • झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM): 34 विधायक। यानी अपने एक उम्मीदवार को जिताने के लिए जरूरी 28 वोटों के बाद भी जेएमएम के पास 6 अतिरिक्त (सरप्लस) वोट बचते हैं।
  • कांग्रेस: 16 विधायक
  • राष्ट्रीय जनता दल (RJD): 04 विधायक
  • भाकपा माले (CPIML): 02 विधायक

अगर जेएमएम अपने 6 अतिरिक्त वोट कांग्रेस को स्थानांतरित कर दे और आरजेडी के 4 तथा माले के 2 विधायक भी कांग्रेस के पक्ष में मतदान करें, तो कांग्रेस का कुल आंकड़ा (16 + 6 + 4 + 2 = 28) ठीक उस जादुई संख्या तक पहुंच जाता है।

बैद्यनाथ राम की राह आसान क्यों?

झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही है, और इसकी सबसे बड़ी वजह है पार्टी का अपना मजबूत संख्या बल। विधानसभा में 34 सीटों के साथ जेएमएम के पास इतनी ताकत है कि वह अपने प्रत्याशी को बिना किसी परेशानी के राज्यसभा भेज सकती है। इसका मतलब यह है कि पहली सीट पर मुकाबले की स्थिति लगभग नहीं है और सबकी निगाहें दूसरी सीट पर लगी हुई हैं।

कांग्रेस प्रत्याशी के सामने चुनौती

महागठबंधन ने दूसरी सीट कांग्रेस के खाते में दी है और प्रणव झा को मैदान में उतारा है। मगर असली पेच यहीं से शुरू होता है। सहयोगी दलों के समर्थन के बावजूद कांग्रेस को अपने वोटों का पूरी सावधानी से प्रबंधन करना होगा। दूसरी तरफ, एनडीए समर्थित निर्दलीय परिमल नाथवानी इस सीट को हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा चुके हैं।

परिमल नाथवानी के पास कितने वोट?

एनडीए के पास इस समय 24 विधायक हैं। अगर सभी विधायक एकजुट होकर मतदान करें, तब भी नाथवानी जीत के आंकड़े से कुछ वोट पीछे रह जाते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अपनी जीत पक्की करने के लिए उन्हें लगभग 3 से 4 अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि चुनाव से पहले क्रॉस वोटिंग की चर्चा जोर पकड़ रही है। माना जा रहा है कि एनडीए की नजर महागठबंधन के उन विधायकों पर है, जिन्हें किसी कारणवश असंतुष्ट बताया जा रहा है।

क्या क्रॉस वोटिंग पलट सकती है बाजी?

राज्यसभा चुनाव में मतदान गुप्त नहीं होता, लेकिन प्राथमिकता आधारित मतदान व्यवस्था कई बार राजनीतिक समीकरण बदल देती है। ऐसे में अगर कुछ विधायक पार्टी लाइन से अलग जाकर वोट डालते हैं, तो दूसरी सीट का नतीजा पूरी तरह पलट सकता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की राय है कि इस चुनाव की असली टक्कर कांग्रेस के प्रणव झा और एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी के बीच ही है।

विधायकों की घेराबंदी की वजह

इसी संभावित क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए सभी दल अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने में जुटे हैं। सूत्रों के अनुसार एनडीए ने अपने विधायकों के लिए रांची के रेडिसन ब्लू होटल में 32 कमरे बुक कराए हैं। दूसरी ओर महागठबंधन भी अपने विधायकों पर पैनी नजर रखे हुए है और किसी भी तरह की टूट-फूट की आशंका को खत्म करने में लगा है।

राजनीतिक संकेत क्या कहते हैं?

संख्या बल के लिहाज से देखें तो पहली सीट झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम के पक्ष में दिखती है, लेकिन दूसरी सीट की तस्वीर अब भी साफ नहीं है। अगर एनडीए 3 से 4 अतिरिक्त वोट जुटाने में कामयाब हो जाता है, तो परिमल नाथवानी मुकाबले को पलट सकते हैं। यही कारण है कि 18 जून को होने वाला मतदान महज दो सीटों का चुनाव नहीं, बल्कि झारखंड की बदलती राजनीतिक रणनीतियों और विधायकों की निष्ठा की भी परीक्षा माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि क्या नाथवानी जरूरी अतिरिक्त वोट हासिल कर पाते हैं या फिर महागठबंधन अपनी दोनों सीटें बचाने में सफल रहता है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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