रांची से सिर्फ 3 किमी दूर है यह गांव, जहां यूनिवर्सिटी और अस्पताल भी; लोग कहते हैं 'मिनी कश्मीर' झारखंड एक घंटा पहले 2
रांची के नामकुम से करीब 3 किलोमीटर दूर बसा राजा उल्लाटू गांव अपनी हरियाली, यूनिवर्सिटी, अस्पतालों और स्कूलों के कारण एजुकेशन हब के रूप में जाना जाता है। पहाड़ों और वादियों की खूबसूरती के चलते लोग इसे मिनी कश्मीर भी कहते हैं।

झारखंड की राजधानी रांची के नामकुम से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर बसा राजा उल्लाटू गांव अपनी खूबसूरती और सुविधाओं के लिए चर्चा में रहता है। चारों ओर फैली हरियाली, पक्के मकान और पक्की सड़कें इस गांव को किसी छोटे शहर जैसा एहसास कराती हैं। यहां प्राइवेट कॉलेज से लेकर प्राइवेट यूनिवर्सिटी तक मौजूद हैं, जिसके चलते इसे एजुकेशन हब माना जाता है।

गांव में झारखंड राय यूनिवर्सिटी, प्राइवेट के साथ-साथ सरकारी हाईटेक अस्पताल और इंटर कॉलेज जैसी कई सुविधाएं हैं। यही वजह है कि शहर के लोग यहां अपना भविष्य संवारने के लिए पहुंचते हैं। घूमने-फिरने के लिहाज से भी यह जगह बेहद आकर्षक है और इसे झारखंड के सबसे खूबसूरत गांवों में से एक गिना जाता है।

गांव में मौजूद हैं कई हाईटेक सुविधाएं

इस गांव में छोटे बच्चों के लिए किंडरगार्डन और प्ले स्कूल से लेकर सरकारी स्कूल तक उपलब्ध हैं। यहां संत ऐन्ना अस्पताल भी है, जहां हर तरह के ऑपरेशन किए जाते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उर्सुलाईन इंटर कॉलेज और नर्सिंग कॉलेज मौजूद हैं, जबकि B.Tech की पढ़ाई के लिए वाईबीन यूनिवर्सिटी की सुविधा है।

गांव में दाखिल होते ही स्कूल यूनिफॉर्म पहने बच्चे, अपने काम पर जाते नर्स और शिक्षक नजर आते हैं, जिससे किसी बड़े शहर में होने का अनुभव होता है। यहां हर व्यक्ति का अपना पक्का मकान है।

खेती कम, पेड़ों से होती है ज्यादा कमाई

यह इलाका पथरीला होने के कारण यहां खेती बहुत अधिक नहीं होती। इसके बजाय लोग पेड़ों से अधिक आमदनी करते हैं। कटहल, आम, टीक और साल जैसे पेड़ यहां बहुतायत में हैं, जो ग्रामीणों की कमाई का अहम जरिया बने हुए हैं।

पहाड़ और वादियां देती हैं मिनी कश्मीर का एहसास

घूमने के शौकीनों के लिए यहां बेहद खूबसूरत पहाड़ और वादियां हैं। पहाड़ के ऊपर पहुंचने पर ऐसा महसूस होता है मानो मिनी कश्मीर पहुंच गए हों, और इसी वजह से लोग इस गांव को मिनी कश्मीर कहते हैं। कहीं भी गंदगी देखने को नहीं मिलती। गांव में शिव भगवान का एक मंदिर भी है, जहां मान्यता है कि कोई मन्नत खाली नहीं जाती। अगर कभी किसी गांव की सैर का मन हो, तो इस गांव का रुख जरूर किया जा सकता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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