झारखंड का पहला फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगभग तैयार, पानी पर तैरते पैनल रोशन करेंगे 1 लाख घर झारखंड 2 घंटे पहले 8
रांची के गेतलसूद डैम में 100 मेगावाट क्षमता वाला राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट लगभग बनकर तैयार है, जिससे करीब 1 लाख घरों को बिजली मिलेगी। पहले चरण में 50 मेगावाट और दूसरे चरण में 50 मेगावाट उत्पादन होगा।

झारखंड में ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है। राजधानी रांची के गेतलसूद डैम में राज्य का पहला फ्लोटिंग सोलर पावर प्रोजेक्ट लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही यहां से बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। इस परियोजना से करीब 1 लाख घरों को रोशनी पहुंचेगी।

यह फ्लोटिंग सोलर प्लांट कुल 100 मेगावाट क्षमता का होगा। पहले चरण में 50 मेगावाट बिजली का उत्पादन शुरू किया जाएगा, जबकि दूसरे चरण में अतिरिक्त 50 मेगावाट क्षमता और जोड़ी जाएगी। पूरी तरह चालू होने के बाद यह प्रोजेक्ट राज्य की बिजली जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाएगा।

पानी की सतह पर तैरते पैनल और ट्रांसफार्मर

इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सोलर पैनल और ट्रांसफार्मर दोनों पानी की सतह पर तैरते हुए लगाए गए हैं। पैनलों से पैदा होने वाली बिजली केबल सिस्टम के जरिए एचटी पैनल रूम तक पहुंचाई जाएगी, जहां से इसे नियंत्रित करके ग्रिड में भेजा जाएगा।

ग्रीन एनर्जी की दिशा में अहम कदम

इस प्रोजेक्ट को हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे जहां एक ओर प्रदूषण घटेगा, वहीं डैम के पानी का वाष्पीकरण भी कम होगा, जिससे जलस्तर लंबे समय तक स्थिर बना रहेगा। परियोजना पर करीब 423 करोड़ रुपये की लागत आई है और इसे विश्व बैंक की सहायता से वित्तीय सहयोग मिला है।

कैसे काम करेगी पूरी व्यवस्था

एलएनटी प्रोजेक्ट टीम के मुताबिक, सोलर पैनल से उत्पन्न बिजली केबल के माध्यम से एचटी पैनल रूम तक पहुंचेगी। इसके बाद ट्रांसफार्मर के जरिए इसे स्टेप-अप करके सीधे ग्रिड में भेज दिया जाएगा। यह पूरी प्रक्रिया आधुनिक तकनीक पर आधारित है।

राज्य में प्रस्तावित अन्य बड़े प्रोजेक्ट

झारखंड के कई अन्य डैम पर भी इसी तरह के फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं—

  • तिलैया डैम – 155 मेगावाट
  • पंचेत डैम – 75 मेगावाट
  • कोनार डैम – 228 मेगावाट
  • मैथन डैम – 235 मेगावाट
  • चांडिल डैम – अध्ययन जारी

1 लाख घरों को मिलेगी राहत

रांची में सामान्य दिनों में करीब 350 मेगावाट बिजली की खपत होती है। ऐसे में गेतलसूद डैम से मिलने वाली 100 मेगावाट बिजली शहर की आपूर्ति में बड़ा योगदान देगी और इससे करीब 1 लाख घरों को सीधा फायदा पहुंचेगा।

पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को लाभ

फ्लोटिंग सोलर प्रोजेक्ट न सिर्फ जमीन की बचत करता है, बल्कि डैम के पानी के संरक्षण में भी मददगार साबित होता है। इससे पर्यावरण की रक्षा के साथ-साथ बिजली उत्पादन की लागत भी घटेगी, जिससे उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध हो सकेगी।

ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव

इस परियोजना को झारखंड की ऊर्जा नीति में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह राज्य को ग्रीन एनर्जी हब बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!