पारंपरिक खेती को छोड़कर सिंघाड़े की ओर बढ़े सारण के किसान, रामचंद्र जैसे किसान कमा रहे अच्छा मुनाफा बिहार 2 महीने पहले 78
सारण जिले के करिंगा गांव के किसान रामचंद्र प्रसाद धान और मक्का जैसी फसलों से हटकर पानी से भरे खेतों में सिंघाड़े की खेती कर रहे हैं, जो उन्हें बेहतरीन मुनाफा दे रही है।

सिंघाड़े की खेती का बढ़ता क्रेज

सारण जिले के किसान इन दिनों पारंपरिक फसलों जैसे धान और मक्का के अलावा अन्य विकल्पों पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। कृषि जानकारों का मानना है कि खेती की सफलता काफी हद तक जमीन के सही चयन पर निर्भर करती है। यदि किसी किसान के पास ऐसा खेत या निचला इलाका है जहाँ जलभराव की स्थिति बनी रहती है, तो वहां सिंघाड़े की खेती करना एक आर्थिक रूप से लाभकारी निर्णय साबित हो सकता है। छपरा के सदर प्रखंड के अंतर्गत आने वाले करिंगा गांव में इन दिनों बड़े पैमाने पर सिंघाड़े की रोपाई का काम जोरों पर चल रहा है।

कई प्रखंडों में अपनाई जा रही तकनीक

छपरा जिले के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां किसान अब पारंपरिक खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर सिंघाड़े जैसी नकदी फसलों की तरफ रुख कर रहे हैं। विशेष रूप से छपरा सदर प्रखंड, गरखा प्रखंड, रिविलगंज प्रखंड, मांझी प्रखंड और मशरख प्रखंड में किसान इस फसल को बड़े स्तर पर उगा रहे हैं। कृषि जानकारों का कहना है कि वर्तमान समय सिंघाड़े की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है, इसलिए किसान इसी समय का लाभ उठाना चाहते हैं।

चार बीघे में खेती और अनुभव

करिंगा गांव के निवासी रामचंद्र प्रसाद इस खेती में काफी अनुभवी हैं। वह अपने परिवार की चौथी पीढ़ी हैं जो सिंघाड़े की खेती के कार्य को आगे बढ़ा रहे हैं। अपनी खेती के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि वह वर्तमान में चार बीघे भूमि पर सिंघाड़े की फसल उगा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फसल के लिए खेत में कम से कम 3 फीट पानी का जमा होना अनिवार्य है, तभी इसकी पैदावार बेहतर होती है।

मुनाफे का गणित और नवंबर तक की उम्मीद

रामचंद्र प्रसाद के अनुसार, सिंघाड़े के पौधों में सितंबर महीने से फल आने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके बाद नवंबर माह तक उन्हें बंपर पैदावार प्राप्त होती है। अपनी आजीविका के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस खेती से होने वाली आय इतनी पर्याप्त है कि उन्हें रोजगार की तलाश में किसी फैक्ट्री या बाहर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। वह इसी व्यवसाय के जरिए अपने परिवार का भरण-पोषण बखूबी कर रहे हैं। अन्य किसानों को प्रोत्साहित करते हुए उन्होंने सलाह दी कि जो लोग पारंपरिक फसलों से इतर अधिक लाभ कमाना चाहते हैं, वे सही समय पर सिंघाड़े की रोपाई अवश्य करें। समय पर की गई रोपाई न केवल अच्छी फसल सुनिश्चित करती है, बल्कि बाजार में भी बेहतर दाम दिलाने में मदद करती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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