छत्तीसगढ़
एक महीने पहले
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ईडी की बड़ी कार्रवाई
महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े धन शोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने एक और बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कड़ी में एजेंसी ने एराया लाइफस्पेसेस के चेयरमैन विकास गर्ग को गिरफ्तार कर लिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि विकास गर्ग ने महादेव बेटिंग ऐप के अवैध कारोबार से प्राप्त धन का इस्तेमाल अमेरिका की एक बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी एबिक्स को खरीदने के लिए किया था। इस गिरफ्तारी का असर न केवल विकास गर्ग की कंपनियों पर, बल्कि उनमें पैसा लगाने वाले हजारों छोटे निवेशकों पर भी पड़ा है।
दिवालिया कंपनी की खरीद और संदिग्ध फंडिंग
विकास गर्ग तब चर्चा में आए थे जब उनकी कंपनी एराया लाइफस्पेसेस ने अमेरिका में दिवालिया हो चुकी सॉफ्टवेयर कंपनी एबिक्स को लगभग 1273 करोड़ रुपए में अधिग्रहित किया था। एबिक्स एक समय में वित्तीय सेवा क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी हुआ करती थी, लेकिन भारी कर्ज के बोझ तले दबने के कारण दिसंबर 2023 में उसने अमेरिका में चैप्टर-11 के तहत दिवालियापन संरक्षण के लिए अर्जी दी थी। ईडी की जांच में यह दावा किया गया है कि इस अधिग्रहण के लिए जुटाई गई पूंजी का एक बड़ा हिस्सा संदिग्ध है और यह राशि महादेव बेटिंग ऐप से जुड़े आपराधिक कृत्यों से आई थी।
संपत्तियों पर अटैचमेंट का प्रहार
ईडी की कार्रवाई यहीं नहीं रुकी है। एजेंसी ने महादेव बेटिंग ऐप घोटाले के तार जुड़ने के बाद एबिक्स में एराया लाइफस्पेसेस की 75 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी को जब्त या अटैच कर लिया है। विकास गर्ग तीन प्रमुख सूचीबद्ध कंपनियों—विकास इकोटेक, विकास लाइफकेयर और एराया लाइफस्पेसेस—के प्रमोटर के रूप में पहचाने जाते हैं। ईडी के छत्तीसगढ़ जोनल ऑफिस द्वारा जारी प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत विकास गर्ग के दिल्ली स्थित आवास और कार्यालयों के अलावा गोवा और नैनीताल सहित विभिन्न स्थानों पर मौजूद संपत्तियों को भी अटैच किया गया है। यह सख्त कार्रवाई 5 जून को अमल में लाई गई थी।
महादेव ऐप और मनी लॉन्ड्रिंग का जाल
जांच एजेंसी के अनुसार, महादेव बेटिंग ऐप के माध्यम से लगभग 6000 करोड़ रुपए की अवैध कमाई का अनुमान है। इस पूरे घोटाले के मुख्य सूत्रधार दुबई में स्थित सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल बताए जाते हैं। ईडी का आरोप है कि दुबई में रहने वाले नितिन तिबरेवाल ने इस अवैध धन को सफेद करने और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इसे ठिकाने लगाने में केंद्रीय भूमिका निभाई थी। ईडी ने नवंबर 2025 में नितिन तिबरेवाल के ठिकानों पर छापेमारी भी की थी, जो कथित रूप से 190 करोड़ रुपए के कस्टम्स फ्रॉड मामले से जुड़ा था, जिसमें सुपारी और अन्य वस्तुओं के आयात के दौरान फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया गया था।
सेबी की जांच और निवेशकों के गंभीर आरोप
विकास गर्ग केवल ईडी के रडार पर ही नहीं रहे, बल्कि बाजार नियामक संस्था सेबी (SEBI) ने भी उनके खिलाफ कदम उठाए हैं। जून 2024 में सेबी ने टेकओवर नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में उन पर 4 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। मामला इतना ही नहीं है, बल्कि जनवरी 2025 में एराया लाइफस्पेसेस के कुछ प्रमुख निवेशकों ने सेबी को पत्र लिखकर कंपनी में कॉरपोरेट गवर्नेंस की गंभीर खामियों की शिकायत की थी। इन निवेशकों का आरोप था कि विकास गर्ग कंपनी पर पूरा नियंत्रण रखते हुए भी लंबे समय तक खुद को प्रमोटर के रूप में घोषित नहीं किया। एबिक्स का अधिग्रहण पूरा होने के बाद ही उन्होंने खुद को प्रमोटर समूह का हिस्सा दिखाया। साथ ही, स्वतंत्र निदेशकों को हटाने और बोर्ड के फैसलों में अनियमितताएं बरते जाने के आरोप भी उन पर लगे हैं, जिसकी जांच जारी है।
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