छत्तीसगढ़: 575 करोड़ के DMF घोटाले में ED की 9 ठिकानों पर छापेमारी, कई सफेदपोश रडार पर छत्तीसगढ़ एक घंटा पहले 3
प्रवर्तन निदेशालय के रायपुर जोनल कार्यालय ने 16 जून को छत्तीसगढ़ में 9 स्थानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया और अहम दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए। यह कार्रवाई करीब 575 करोड़ रुपये के डीएमएफ घोटाले से जुड़ी है, जिसमें श्रीकांत दुबे समेत कई आरोपी जांच के दायरे में हैं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रायपुर जोनल कार्यालय ने मंगलवार, 16 जून को छत्तीसगढ़ में 9 स्थानों पर एक साथ छापेमारी करते हुए बड़ा सर्च ऑपरेशन अंजाम दिया। इस कार्रवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए गए। जांच एजेंसी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक यह कार्रवाई श्रीकांत दुबे समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ की गई है, जिन पर छत्तीसगढ़ बीज निगम के जरिए दिए गए ठेकों में डीएमएफटी निधि के कथित दुरुपयोग और गबन का आरोप है।

575 करोड़ के घोटाले पर ईडी का शिकंजा

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय ने छत्तीसगढ़ की 9 लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन को अंजाम दिया। तलाशी के दौरान कई अहम सबूत और इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस जब्त किए गए। यह पूरा मामला करीब 575 करोड़ रुपये के डीएमएफ यानी ‘डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड’ से जुड़े घोटाले से संबंधित है। बीज निगम के माध्यम से बांटे गए ठेकों की आड़ में डीएमएफटी निधियों के कथित दुरुपयोग और गबन की जांच की जा रही है।

इसी मामले में बीते वर्ष 2025 में 3 सितंबर को ईडी ने 18 लोकेशन पर बड़ी छापेमारी की थी। ताजा सर्च ऑपरेशन के दौरान कई सरकारी अधिकारियों, निजी व्यक्तियों के साथ-साथ टेंडर जारी करने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के ठिकानों को खंगाला गया।

इस दौरान रायपुर के शंकर नगर इलाके में रहने वाले कारोबारी विनय गर्ग समेत उन ठेकेदारों और बिचौलियों के खिलाफ कार्रवाई की गई, जिन पर आरोप है कि खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास और कल्याण के लिए बने डीएमएफ फंड की बड़ी रकम को छत्तीसगढ़ बीज निगम के जरिए गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया। जब्त किए गए दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की अब ईडी के जांचकर्ता विस्तार से पड़ताल करेंगे।

घूस के लिए बदले गए नियम

इस मामले की शुरुआती जांच रायपुर पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और एसीबी ने की थी। पड़ताल के बाद एसीबी ने करीब 6 हजार पन्नों का आरोपपत्र स्थानीय अदालत में दाखिल किया था, जिसमें कई बड़े खुलासों से जुड़ी रिपोर्ट संलग्न थीं। इसके बाद इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी की एंट्री हुई।

जांच एजेंसी के अनुसार, डीएमएफ के वर्क प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार करने के मकसद से फंड खर्च के नियमों में बदलाव किया गया। नए प्रावधानों में मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, इलाके के लोगों और उनके बच्चों के खेल-मनोरंजन की सामग्री, मेडिकल उपकरण और स्वास्थ्य से जुड़े कई छोटे-बड़े उपकरणों की श्रेणियां जोड़ी गईं। आरोप है कि संशोधित नियमों की मदद से जरूरी विकास कार्यों को दरकिनार कर अधिकतम कमीशन वाले प्रोजेक्ट को मंजूरी दी जाती रही।

अधिकारियों को टेंडर राशि का 42% तक कमीशन

पिछले कई महीनों से चल रही ईडी की जांच में सामने आया कि यह घोटाला जेल में बंद कारोबारी मनोज कुमार द्विवेदी से जुड़ा है। आरोप है कि मनोज ने अपनी बनाई एनजीओ के जरिए डीएमएफ फंड की राशि हासिल की और इसका कमीशन तत्कालीन आईएएस रानू साहू समेत कई बड़े सफेदपोश लोगों तक पहुंचाया। जिस एनजीओ में वह सचिव था, उसे कई ठेके मिले थे। इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू और ईडी दोनों कर रही हैं।

ईडी की जांच के मुताबिक, 2021-22 और 2022-23 में मनोज कुमार द्विवेदी ने निलंबित आईएएस रानू साहू और अन्य अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर अपनी एनजीओ उदगम सेवा समिति के नाम पर कई डीएमएफ ठेके हासिल किए और इसके बदले अधिकारियों को टेंडर की राशि का 42% तक कमीशन दिया।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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