छत्तीसगढ़
2 घंटे पहले
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चिकित्सा शिक्षा विभाग की साख पर लगा बट्टा
देशभर में नीट (NEET) परीक्षा के आयोजन को लेकर छिड़े विवादों के बीच, अब छत्तीसगढ़ राज्य में एमबीबीएस (MBBS) सीटों की प्रवेश प्रक्रिया भी भारी अनियमितताओं के कारण सवालों के घेरे में आ गई है। राज्य के विभिन्न शासकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए जारी काउंसलिंग प्रक्रिया में एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। आरोप है कि कई छात्रों ने दो अलग-अलग राज्यों के स्थानीय निवासी होने के जाली दस्तावेज (डोमिसाइल) तैयार करवाकर दोनों राज्यों के कोटे से सीटें हथियाने का प्रयास किया है।
इस धोखाधड़ी के जरिए इन अभ्यर्थियों ने न केवल छत्तीसगढ़ के स्थानीय कोटे की सीटों पर अपना दावा ठोका, बल्कि साथ ही साथ ओडिशा, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों के स्टेट कोटे में भी अवैध रूप से अपनी जगह पक्की कर ली। इस घटनाक्रम ने राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग के सत्यापन और काउंसलिंग तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इन पांच प्रमुख मामलों ने खोला फर्जीवाड़े का राज
प्रवेश प्रक्रिया के दौरान उजागर हुए कुछ विशिष्ट मामलों ने इस धोखाधड़ी के तौर-तरीकों को उजागर कर दिया है। सामने आए संदिग्ध दस्तावेजों के अनुसार, इन मामलों में गड़बड़ियों की सूची निम्नलिखित है:
- केस 1 (ऋद्धि): आल इंडिया रैंक (AIR) 453054 वाली छात्रा ऋद्धि का चयन छत्तीसगढ़ के साथ-साथ ओडिशा राज्य के स्टेट कोटे में भी एक साथ हुआ है।
- केस 2 (नेविता): आल इंडिया रैंक (AIR) 451234 वाली अभ्यर्थी नेविता ने छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों के निवासी प्रमाण पत्रों का उपयोग कर दोनों राज्यों की सूचियों में अपना नाम दर्ज करा लिया।
- केस 3 (आहाना): आल इंडिया रैंक (AIR) 643603 वाली आहाना को मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ दोनों राज्यों की सीटें डोमिसाइल के आधार पर आवंटित की गई हैं। बेहद चौंकाने वाली बात यह है कि वह एक राज्य में ओबीसी (OBC) श्रेणी की अभ्यर्थी के रूप में दर्ज हैं, जबकि दूसरे राज्य में उन्हें अनुसूचित जाति (SC) के रूप में दर्शाया गया है।
- केस 4 (लक्ष्य): आल इंडिया रैंक (AIR) 762615 वाले अभ्यर्थी लक्ष्य के पास भी दो राज्यों के डोमिसाइल मिले हैं। उन्हें मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (SC) श्रेणी के तहत सीट मिली, जबकि छत्तीसगढ़ में उन्होंने सामान्य वर्ग के कोटे से सीट हासिल की।
- केस 5 (आकांक्षा): आल इंडिया रैंक (AIR) 1162810 वाली छात्रा आकांक्षा का छत्तीसगढ़ और झारखंड दोनों राज्यों के डोमिसाइल प्रमाण पत्रों के आधार पर दोनों ही राज्यों की सीटों के लिए चयन हुआ है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दी कार्रवाई की चेतावनी
इस पूरे मामले पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने संज्ञान लिया है। उन्होंने स्वीकार किया है कि अब तक ऐसे कम से कम 10 संदिग्ध मामलों की पहचान की जा चुकी है। मंत्री ने मामलों का ब्योरा देते हुए स्पष्ट किया कि इनमें झारखंड के 4 मामले, मध्य प्रदेश के 4 मामले, कर्नाटक के 4 मामले तथा तमिलनाडु और राजस्थान के 1-1 प्रकरण शामिल हैं। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि दाखिले की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने से पहले सभी अभ्यर्थियों के जाति और निवास प्रमाण पत्रों की बेहद गंभीरता से जांच की जाएगी, ताकि कोई भी अयोग्य छात्र फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश न पा सके।
जूनियर डॉक्टरों ने उठाए गंभीर सवाल
इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद जूनियर डॉक्टरों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉक्टर आयुष श्रीवास्तव ने काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया पर ही गंभीर संदेह जताया है। उनका कहना है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग की देखरेख में चल रही नीट यूजी (NEET UG) काउंसलिंग की प्रक्रिया बिल्कुल भी पारदर्शी नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि संदिग्ध और फर्जी डोमिसाइल प्रमाण पत्रों के आधार पर बाहरी छात्रों को छत्तीसगढ़ की सीटें दी जा रही हैं। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ बेहद कठोर दंडात्मक कदम उठाए जाएं।
छत्तीसगढ़ में एमबीबीएस सीटों का ढांचा
छत्तीसगढ़ में इस शैक्षणिक सत्र के तहत कुल 3025 एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया जारी है, जिसके लिए पहले चरण की काउंसलिंग का काम चल रहा है। इन उपलब्ध सीटों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
- 1984 सीटें छत्तीसगढ़ राज्य के स्थानीय कोटे के लिए आरक्षित हैं।
- 553 सीटों पर मैनेजमेंट कोटे के तहत दाखिला दिया जा रहा है।
- 252 सीटें ऑल इंडिया कोटे के अंतर्गत आती हैं।
- 192 सीटें एनआरआई (NRI) कोटे के लिए निर्धारित की गई हैं।
- 44 सीटें सेंट्रल पूल कोटे के तहत आवंटित की जाती हैं।
स्थानीय छात्रों का हक मारकर बाहरी राज्यों के अपात्र छात्रों को फर्जी दस्तावेज के सहारे प्रवेश देने की इस कोशिश ने अब चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों की भूमिका को भी संदिग्ध बना दिया है, और आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है।
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