पैलेट गन विवाद: पीड़ित को न्याय दिलाने डीसीपी दफ्तर पहुंचे राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस की जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल भारत 3 घंटे पहले 2
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी जंतर-मंतर आंदोलन के दौरान पैलेट गन का शिकार हुए पीड़ित साहिल लोचब के साथ दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से मामले की जांच का ब्योरा मांगा।

राजधानी दिल्ली में जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पैलेट गन के इस्तेमाल का मामला अब राजनीतिक रूप से पूरी तरह गरमा गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद राहुल गांधी खुद इस मामले में दखल देते हुए पीड़ित युवक को न्याय दिलाने के लिए मैदान में उतर आए हैं। राहुल गांधी दिल्ली के संसद मार्ग थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पुलिस उपायुक्त (DCP) कार्यालय पहुंचे। उनके साथ जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के दौरान घायल हुए पीड़ित साहिल लोचब भी मौजूद थे। राहुल गांधी का इस तरह सीधे पुलिस थाने और DCP कार्यालय पहुंचना इस संवेदनशील मुद्दे पर दिल्ली पुलिस की कार्यशैली को लेकर कई बड़े सवाल खड़े करता है।

जंतर-मंतर आंदोलन और पैलेट गन का इस्तेमाल

यह पूरा विवाद जंतर-मंतर पर आयोजित किए गए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के एक आंदोलन से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इस प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर काबू पाने के लिए पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया था। लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शनों में पैलेट गन जैसे घातक या अर्ध-घातक उपकरणों का इस्तेमाल हमेशा से ही बेहद विवादित और चिंताजनक रहा है। इस प्रदर्शन के दौरान साहिल लोचब नामक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। साहिल का आरोप है कि वह इस अनुचित कार्रवाई के सीधे शिकार हुए हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस इस मामले में बेहद सुस्त रवैया अपना रही है और उनकी शिकायत पर उचित कानूनी कार्रवाई करने से बच रही है।

एफआईआर दर्ज न होने का आरोप और राहुल गांधी का हस्तक्षेप

पीड़ित साहिल लोचब का सबसे बड़ा आरोप यह है कि इस गंभीर घटना के बावजूद दिल्ली पुलिस उनकी प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) दर्ज नहीं कर रही है। जब पीड़ित को न्याय के सभी रास्तों से निराशा हाथ लगी, तो उन्होंने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से संपर्क किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राहुल गांधी ने तुरंत इस मुद्दे को अपने हाथ में लिया और वे खुद पीड़ित साहिल के साथ संसद मार्ग थाने और DCP कार्यालय पहुंचे। राहुल गांधी यह स्पष्ट रूप से जानना चाहते हैं कि इस पूरे प्रकरण में पुलिस प्रशासन ने अब तक क्या कदम उठाए हैं। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से सीधे तौर पर सवाल किया कि इस मामले में अब तक की जांच कहां तक पहुंची है और दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हो रही है।

दिल्ली पुलिस की जांच और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवाल

इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात के बाद दिल्ली पुलिस प्रशासन पर भी काफी दबाव बढ़ गया है। आमतौर पर जंतर-मंतर जैसे संवेदनशील और सुरक्षित क्षेत्र में होने वाले आंदोलनों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था बहुत कड़ी होती है। ऐसे में वहां पैलेट गन का इस्तेमाल होना और फिर उस पर FIR दर्ज करने में आनाकानी करना कई तरह के संदेह पैदा करता है। राहुल गांधी ने दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पीड़ित की शिकायत को पूरी मजबूती के साथ रखा और मामले की निष्पक्ष एवं त्वरित जांच करने की मांग की। कांग्रेस पार्टी और विपक्षी खेमे का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाने वाले देश के नागरिकों पर बल प्रयोग करना और फिर उन्हें कानूनी न्याय से वंचित रखना कतई स्वीकार्य नहीं है।

न्याय के लिए संघर्ष और आगे की कानूनी लड़ाई

राहुल गांधी के DCP कार्यालय पहुंचने के बाद यह मामला अब केवल एक स्थानीय शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के नागरिक अधिकारों और पुलिस प्रशासन की जवाबदेही का एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इस मुलाकात के बाद दिल्ली पुलिस के रवैये में क्या बदलाव आता है और क्या पीड़ित साहिल लोचब की शिकायत पर उचित धाराओं के तहत FIR दर्ज की जाती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। राहुल गांधी और उनके सहयोगियों ने साफ कर दिया है कि जब तक इस मामले में पूरी पारदर्शिता के साथ जांच नहीं होती और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक वे इस लड़ाई को पीछे नहीं छोड़ेंगे। जंतर-मंतर पर हुए इस आंदोलन और उसके बाद की पुलिसिया कार्रवाई ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा के बीच के संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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