ईरान के साथ व्यापार करना पड़ेगा भारी, डोनाल्ड ट्रंप ने शुरू किया आर्थिक युद्ध का नया अध्याय विश्व एक घंटा पहले 4
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त आर्थिक घेराबंदी का ऐलान किया है, जिसमें ईरान की मदद करने वाले देशों और कंपनियों को भी गंभीर परिणामों की चेतावनी दी गई है।

ईरान के खिलाफ ट्रंप की सख्त रणनीति

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी अब एक नए और अधिक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। दोनों देशों के बीच चल रहा संघर्ष अब हथियारों की जंग से आगे निकलकर पूरी तरह से आर्थिक मोर्चे पर केंद्रित हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान के साथ अब कोई भी बातचीत नहीं होगी। इसके बजाय, अमेरिका ने ईरान को आर्थिक रूप से पूरी तरह अलग-थलग करने और उसे घुटनों पर लाने का फैसला किया है। ट्रंप का यह रुख ईरान के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले अन्य देशों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है।

आर्थिक मोर्चे पर युद्ध का दूसरा चरण

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही इस जंग को दूसरे चरण की शुरुआत माना जा रहा है। यह युद्ध अब गोलियों या मिसाइलों से नहीं, बल्कि डॉलर और प्रतिबंधों के जरिए लड़ा जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल के जरिए अपनी योजनाओं को सार्वजनिक करते हुए कहा कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ इतिहास की सबसे कठोर आर्थिक कार्रवाई शुरू कर रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका के साथ शांति समझौते के लिए मिले कई अवसरों को ठुकरा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप अब तेहरान को गंभीर आर्थिक भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।

सहयोगी देशों और कंपनियों के लिए चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति ने केवल ईरान पर ही नहीं, बल्कि उन सभी वैश्विक कंपनियों, वित्तीय संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और देशों को भी सख्त संदेश दिया है जो ईरान की अर्थव्यवस्था में किसी भी प्रकार का सहयोग कर रहे हैं। ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि कोई भी देश या संस्था ईरान को आर्थिक लाइफलाइन मुहैया कराती है, तो उसे अमेरिका की ओर से बड़े आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ेगा। इस नई रणनीति का उद्देश्य ईरान की तमाम उन धमनियों को काटना है, जिनसे उसे विदेशी मुद्रा मिल रही है।

बंद किए जाएंगे ईरान के सभी आर्थिक रास्ते

ट्रंप प्रशासन ने उन तमाम रास्तों और माध्यमों को चिन्हित किया है, जिनका उपयोग ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को जीवित रखने के लिए कर रहा है। इन रास्तों में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • ईरान द्वारा की जाने वाली तेल की तस्करी।
  • विभिन्न देशों के साथ होने वाला करेंसी स्वैप।
  • नकद पैसों का अंतरराष्ट्रीय लेन-देन।
  • एक्सचेंज हाउसों के जरिए संचालित होने वाला व्यापार।
  • ईरान से जुड़े जहाजों का रजिस्ट्रेशन।
  • अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सक्रिय ईरान की फ्रंट कंपनियां।

अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन रास्तों को बंद करने से ईरान के वित्तीय संसाधन पूरी तरह से सूख जाएंगे और वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना प्रभाव खो देगा।

आतंकवाद और परमाणु कार्यक्रम पर कड़ा रुख

ट्रंप ने इस अभियान को आर्थिक डी-डे की संज्ञा देते हुए अपने सहयोगी देशों से एकजुट होकर ईरान को अलग-थलग करने की अपील की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने पुनः दोहराया कि ईरान को किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रंप ने दावा किया कि यह नई आर्थिक घेराबंदी ईरान की आतंकवाद को समर्थन देने की क्षमता और दुनिया भर में अपने पैर पसारने की कोशिशों को बुरी तरह ध्वस्त कर देगी। अंततः, अमेरिका का लक्ष्य तेहरान को वित्तीय रूप से अपंग बनाना है, ताकि वह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के किसी भी तंत्र का उपयोग न कर सके।

करण मल्होत्रा पाबना के अंतरराष्ट्रीय संवाददाता हैं, जो अमेरिका, यूरोप और एशिया की खबरें रिपोर्ट करते हैं। वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और बड़े अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर वे नजर रखते हैं। उनकी रिपोर्ट्स दुनिया की हलचल को पाठकों तक तेजी से पहुंचाती हैं।

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