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एक घंटा पहले
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सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने खिलाफ चल रहे आय से अधिक संपत्ति के मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। राहुल गांधी ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा पारित उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें जांच एजेंसियों को जांच के निर्देश दिए गए थे। राहुल गांधी का प्रयास है कि इस पूरे मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट से स्थानांतरित करके दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए भेजा जाए। इस बाबत उन्होंने गुरुवार को शीर्ष अदालत में औपचारिक याचिका दाखिल कर दी है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह कानूनी विवाद इलाहाबाद हाई कोर्ट में दायर की गई एक याचिका से शुरू हुआ था, जिसमें राहुल गांधी की संपत्तियों और व्यय की जांच की मांग की गई थी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने CBI और ED को जांच करने का आदेश दिया था। अब इस न्यायिक आदेश के खिलाफ राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर आगामी 17 अगस्त को सुनवाई करेगा। मामले की सुनवाई के लिए जो पीठ गठित की गई है, उसमें जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना शामिल हैं।
राहुल गांधी पर लगे आरोप
याचिकाकर्ता का दावा है कि राहुल गांधी ने बीते 22 सालों के दौरान कुल 54 विदेश यात्राएं की हैं। इन यात्राओं पर कथित तौर पर लगभग 60 करोड़ रुपये का खर्च आया है। आरोप यह लगाया गया है कि राहुल गांधी ने अपने चुनावी हलफनामे में कुल संपत्ति का खुलासा केवल 20 करोड़ 39 लाख रुपये के रूप में किया है, जो उनके द्वारा किए गए खर्च के मुकाबले काफी कम है। इस विसंगति को आधार बनाकर मई महीने में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को उचित कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। राहुल गांधी की याचिका का मुख्य उद्देश्य हाई कोर्ट के इसी आदेश को चुनौती देना और जांच एजेंसियों की कार्रवाई पर रोक लगवाना है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में अप्रैल महीने में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ही कथित दोहरी नागरिकता मामले में राहुल गांधी के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाने का फैसला सुनाया था।
हाई कोर्ट का कड़ा रुख
इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में बीते 20 जुलाई को सुनवाई करते हुए CBI के जवाब पर स्पष्ट असंतोष व्यक्त किया था। अदालत ने एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी को निर्देश दिया था कि वे इस मामले में अब तक हुई जांच की प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करें और इस संबंध में व्यक्तिगत रूप से नया हलफनामा दाखिल करें। साथ ही, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यदि जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय को किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या अवैधता के सबूत मिलते हैं, तो एजेंसी कानून के दायरे में रहकर आगे की कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होगी।
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