बिहार
3 घंटे पहले
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विदेश जाकर पैसा कमाने और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुधारने का सपना बिहार के सात युवाओं के लिए एक भयानक दुःस्वप्न बन गया है। बिहार के पूर्णिया और किशनगंज जिले के रहने वाले सात गरीब मजदूर इन दिनों संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख शहर दुबई में बंधक बने हुए हैं। नौकरी दिलाने का झांसा देकर एक जालसाज एजेंट ने उनसे लाखों रुपये ठग लिए और दुबई पहुंचने पर उनका पासपोर्ट भी छीन लिया। अब इन युवकों के पास न तो खाने के पैसे बचे हैं और न ही रहने का कोई सुरक्षित ठिकाना। दाने-दाने को तरस रहे इन मजदूरों ने सोशल मीडिया पर एक रोता हुआ वीडियो साझा कर भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन से सुरक्षित स्वदेश वापसी की गुहार लगाई है।
रोजगार के नाम पर ठगी और यातना का शिकार
दुबई में फंसे इन सात लाचार युवकों की दास्तान बेहद दर्दनाक है। पीड़ितों द्वारा भेजे गए वीडियो संदेश के अनुसार, उन्हें अच्छी नौकरी और शानदार वेतन का लालच देकर विदेश रवाना किया गया था। लेकिन दुबई की धरती पर कदम रखते ही उनके सपने चकनाचूर हो गए। वहां मौजूद कंपनी के लोगों ने सबसे पहले उनके पासपोर्ट अपने कब्जे में ले लिए और फिर उन्हें बंधक बना लिया।
इन पीड़ित युवाओं को एक बेहद छोटे और संकीर्ण कमरे में जानवरों की तरह रहने के लिए मजबूर किया गया है। उनके पास भोजन और पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण वे पिछले कई दिनों से भूखे रहने को विवश हैं। शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेल रहे इन लड़कों का रो-रोकर बुरा हाल हो चुका है और वे बस किसी भी तरह भारत वापस लौटना चाहते हैं।
लाखों रुपये की ठगी और बड़े वेतन का झूठा वादा
बंधक बने युवाओं ने पूर्णिया के रौटा निवासी एक स्थानीय एजेंट हाजी नाहिद गनी पर इस पूरी धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। पीड़ितों का कहना है कि आरोपी एजेंट ने विदेश में नौकरी दिलाने के एवज में उनमें से प्रत्येक व्यक्ति से 1.50 लाख रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली थी। इस अवैध लेन-देन के प्रमाण के तौर पर एक वीडियो भी सामने आया है।
आरोपी एजेंट ने इन बेरोजगार ग्रामीणों को झांसा दिया था कि दुबई पहुंचने पर उन्हें एक मोजा बनाने वाली बड़ी कंपनी (सॉक्स कंपनी) में काम मिलेगा, जहां उनकी मासिक सैलरी कम से कम 3 लाख रुपये होगी। इतने बड़े वेतन की बात सुनकर गरीब परिवारों ने अपनी जमा-पूंजी और कर्ज लेकर एजेंट की मांग पूरी की थी। लेकिन वहां पहुंचने पर उन्हें एक अत्यंत छोटी कंपनी में मामूली मजदूरी के काम पर लगा दिया गया और उनका शोषण शुरू कर दिया गया।
टूरिस्ट वीजा पर भेजने का हुआ बड़ा खुलासा
पीड़ित मजदूरों ने बताया कि उन्हें वैध वर्क वीजा के बजाय केवल 1 माह के टूरिस्ट वीजा पर दुबई भेजा गया था। अब उनका वीजा समाप्त होने वाला है, जिससे उनकी मुसीबतें और अधिक बढ़ गई हैं। उनके पास कोई वैध दस्तावेज नहीं बचे हैं और वे पूरी तरह अवैध रूप से वहां फंसे हुए हैं।
दुबई की इस भयावह स्थिति में फंसे सातों युवकों की पहचान इस प्रकार की गई है:
- दानिश - निवासी मीरगंज गांव, रौटा थाना, पूर्णिया
- नाज़िश - निवासी मीरगंज गांव, रौटा थाना, पूर्णिया
- शमशाद - निवासी मीरगंज गांव, रौटा थाना, पूर्णिया
- रब्बान आलम - निवासी मिरचान टोला, कोचाधामन थाना, किशनगंज
- अबू अजहर - निवासी मिरचान टोला, कोचाधामन थाना, किशनगंज
- सलमान - निवासी मिरचान टोला, कोचाधामन थाना, किशनगंज
- नासिर - निवासी मिरचान टोला, कोचाधामन थाना, किशनगंज
पूर्व विधायक और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने की कार्रवाई की मांग
इस गंभीर मामले की जानकारी मिलते ही कोचाधामन के पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद पीड़ित परिवारों की मदद के लिए आगे आए हैं। उन्होंने बंधक बने युवकों द्वारा भेजे गए वीडियो को देखने के बाद तुरंत उनके परिजनों से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। मास्टर मुजाहिद ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आरोपी एजेंट हाजी नाहिद गनी पिछले कई सालों से पैसे लेकर लोगों को अवैध तरीके से विदेश भेजने का संदिग्ध काम कर रहा है। उन्होंने प्रशासन और सरकार के आला अधिकारियों से बात कर बंधक बने सातों युवकों को जल्द से जल्द सुरक्षित वापस लाने की मांग की है।
वहीं, अमौर के जिला परिषद सदस्य शहाबुज्जमा ने इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए आरोप लगाया कि आरोपी नाहिद गनी एक फर्जी टूर एंड ट्रेवल्स कंपनी संचालित करता है। इसी फर्जी एजेंसी के माध्यम से उसने अब तक हजारों सीधे-सादे ग्रामीण युवाओं को विदेशों में ठगा है। उन्होंने बताया कि आरोपी एजेंट का दुबई की कई संदिग्ध कंपनियों के साथ सीधा संपर्क है, जहां वह अवैध रूप से मानव संसाधन की आपूर्ति कर मोटी रकम कमाता है। पीड़ित परिवारों ने अब सरकार से न्याय और अपने बच्चों की सकुशल घर वापसी की गुहार लगाई है।
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