पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को हाई कोर्ट से बड़ा झटका, PMLA मामले में जमानत याचिका खारिज पंजाब 5 घंटे पहले 6
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा की नियमित जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। अरोड़ा ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी थी।

हाई कोर्ट ने याचिका को किया खारिज

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने शुक्रवार के दिन पंजाब के कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। संजीव अरोड़ा ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002' यानी PMLA के अंतर्गत अपनी गिरफ्तारी को अदालत में चुनौती दी थी। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी, गिरफ्तारी के आधार और रिमांड के आदेशों को रद्द करने की मांग करते हुए हाई कोर्ट का रुख किया था। उनका कहना था कि उनकी गिरफ्तारी के दौरान कानूनी सुरक्षा उपायों की अनदेखी हुई और उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किया गया है।

मंत्री संजीव अरोड़ा के तर्क और दलीलें

अपनी याचिका में संजीव अरोड़ा ने अदालत को बताया कि वह एक कैबिनेट मंत्री हैं और इससे पहले राज्यसभा के सांसद भी रह चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि समाज में उनकी अच्छी साख है और उनका सार्वजनिक जीवन हमेशा बेदाग रहा है। अरोड़ा ने जानकारी दी कि वह 9 मई से ही हिरासत में हैं। इसके साथ ही, उन्होंने अदालत को यह भी अवगत कराया कि गुरुग्राम में PMLA के तहत नियुक्त विशेष न्यायाधीश ने 15 जून को उनकी नियमित जमानत की अर्जी पहले ही ठुकरा दी थी।

अरोड़ा ने खुद को 'मैसर्स हैम्पटन स्काई रियल्टी लिमिटेड' (HSRL) का चेयरमैन और प्रमोटर बताया। उनके वकीलों ने कोर्ट को बताया कि 1987 में स्थापित यह कंपनी विभिन्न व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ी है, लेकिन जब से याचिकाकर्ता ने कैबिनेट मंत्री का पद ग्रहण किया, उन्होंने कंपनी के दैनिक कार्यों से खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है।

जांच एजेंसी पर लगाए सवाल

संजीव अरोड़ा ने अभियोजन पक्ष के पूरे मामले को ही त्रुटिपूर्ण ठहराया है। उन्होंने तर्क दिया है कि जांच एजेंसी यह साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही है कि कोई 'अनुसूचित अपराध' (scheduled offence) हुआ है, जिससे अपराध की कमाई पैदा हुई हो और जिसका उनसे कोई सीधा संबंध हो। अरोड़ा का कहना है कि जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य PMLA के प्रावधानों के तहत किसी भी अपराध के जरूरी तत्वों को पूरा नहीं करते। उन्होंने जोर दिया कि ऐसा कोई सबूत मौजूद नहीं है जो यह दिखा सके कि उन्होंने अपराध से मिली कथित राशि को छिपाने, उसका उपयोग करने या उसे वैध रूप में दिखाने में कोई भूमिका निभाई हो।

ईडी की तलाशी और सबूतों का अभाव

याचिकाकर्ता ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी द्वारा उनके निजी आवास, उनके बेटे के घर और कंपनी HSRL के कार्यालयों में गहन तलाशी अभियान चलाया गया था। हालांकि, इस तलाशी के दौरान कोई भी आपत्तिजनक दस्तावेज, बिना हिसाब की संपत्ति या कोई ऐसा डिजिटल रिकॉर्ड बरामद नहीं हुआ है, जो यह साबित कर सके कि उन्होंने कोई गैरकानूनी कार्य किया है। फिलहाल, कोर्ट से राहत न मिलने के कारण उनकी मुश्किलें बरकरार हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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