दिमागी नक्सल शब्द पर गरमाई सियासत: पी चिदंबरम के बयान के बाद बीजेपी का पलटवार, जानें पूरा मामला भारत एक घंटा पहले 6
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए बयान के बाद 'दिमागी नक्सल' शब्द पर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है, जिसमें पी चिदंबरम समेत कई विपक्षी नेताओं ने इसे एक पहचान के रूप में अपनाया है।

विवाद की शुरुआत और दिमागी नक्सल

देश के राजनीतिक गलियारों में 'दिमागी नक्सल' शब्द को लेकर बहस छिड़ गई है। इस शब्द का प्रयोग सबसे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से किया था। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने चेताया था कि कुछ लोग जो दिमागी तौर पर नक्सल विचारधारा से प्रेरित हैं, वे देश को अराजकता की ओर धकेलने की ताक में बैठे हैं। उन्होंने देशवासियों को ऐसे तत्वों से सावधान रहने की नसीहत दी थी। इस बयान के तुरंत बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया मंच X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें 'दिमागी नक्सल' होने पर गर्व है। चिदंबरम के इस बयान ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक नई तकरार को जन्म दे दिया है।

बीजेपी नेताओं का तीखा हमला

चिदंबरम के बयान पर भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने पलटवार करते हुए स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में किसी भी विपक्षी नेता का नाम नहीं लिया था। रिजीजू ने कहा कि दिमागी नक्सली उन लोगों को कहा गया है जो भारत के संविधान में विश्वास नहीं रखते, माओवाद और अलगाववाद का समर्थन करते हैं, या फिर देश की अखंडता को चुनौती देने वाले मंसूबे रखते हैं। वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व सरमा ने चिदंबरम पर व्यक्तिगत हमला करते हुए मांग की कि उनके कार्यकाल के दौरान नक्सलियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई धीमी क्यों थी, इस बात की जांच होनी चाहिए। उन्होंने सीधे तौर पर चिदंबरम की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं।

सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना

बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया था, लेकिन कांग्रेस के नेताओं को दर्द होना इस बात का सबूत है कि नक्सलियों के असली हमदर्द कौन हैं। सुधांशु त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा नक्सलियों को संरक्षण दिया है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रयासों से देश अब नक्सल मुक्त होने की राह पर है, जिससे बौखलाकर कांग्रेस नेता इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।

योग गुरु रामदेव का दृष्टिकोण

इस पूरे मामले पर आध्यात्मिक गुरु स्वामी रामदेव ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि वे राजनीतिक खींचतान से दूर रहना पसंद करते हैं, लेकिन यह सच है कि लोकतंत्र में अराजकता और हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि देश को तोड़ने वाली विचारधाराओं से सतर्क रहना हर नागरिक का कर्तव्य है।

विपक्ष की एकजुटता और आरोप

चिदंबरम के समर्थन में विपक्ष के कई नेता खुलकर सामने आए हैं। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि जिस 'दिमागी नक्सल' का जिक्र पीएम मोदी कर रहे हैं, उसका मुख्य केंद्र खुद बीजेपी है। जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी तंज कसते हुए कहा कि यदि अनुच्छेद 370 का समर्थन करना दिमागी नक्सलवाद है, तो वे भी एक दिमागी नक्सली हैं। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी एक वीडियो संदेश जारी कर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी के खिलाफ बोलने वाले हर व्यक्ति को सत्ताधारी दल देशद्रोही या नक्सली करार देने की कोशिश करता है। यह विवाद अब और भी व्यापक रूप लेता दिख रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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