मोदी के बारह वर्षों के बारह बड़े फैसले, जो लंबे अरसे तक देश की स्मृति में रहेंगे राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 1
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले प्रधानमंत्री बन चुके हैं। 2014 से 2026 तक के उनके कार्यकाल के बारह ऐसे निर्णयों पर एक नजर, जिन्हें भारत के राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक इतिहास के सबसे अहम फैसलों में गिना जाता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पद पर सबसे लंबे समय तक बने रहने का रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि 2014 से 2026 तक के उनके शासनकाल के वे कौन-से बारह फैसले रहे, जिन्हें देश के राजनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक इतिहास के सबसे बड़े निर्णयों में शुमार किया जाता है।

बीते बारह वर्षों में मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने कई ऐसे कदम उठाए, जिनका असर भारत की राजनीति, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और सामाजिक ढांचे पर गहराई तक पड़ा। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इन फैसलों को आने वाली पीढ़ियां भी याद रखेंगी। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से लेकर राम मंदिर निर्माण, जीएसटी, तीन तलाक कानून, नई शिक्षा नीति, डिजिटल इंडिया, महिला आरक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कदमों तक — सरकार ने एक के बाद एक बड़े निर्णय लिए।

इनमें कुछ फैसलों ने दशकों पुरानी व्यवस्थाओं को बदल डाला, तो कुछ ने भारत की वैश्विक छवि और रणनीतिक हैसियत को और मजबूत किया। विश्लेषकों की राय है कि किसी भी प्रधानमंत्री की विरासत महज चुनावी जीत से नहीं, बल्कि उन निर्णयों से तय होती है जो देश की दिशा ही मोड़ देते हैं। इन फैसलों के नतीजों और प्रभावों पर बहस भले जारी रहे, मगर यह तय है कि 2014 के बाद के भारत का इतिहास लिखते वक्त इन निर्णयों का जिक्र प्रमुखता से होगा।

1. जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 की समाप्ति (2019)

5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म कर दिया। इसे स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े संवैधानिक फैसलों में गिना जाता है।

2. राम मंदिर निर्माण की राह खुलना

सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण और 2024 में हुई प्राण प्रतिष्ठा को आधुनिक भारत की सबसे बड़ी सांस्कृतिक-धार्मिक घटनाओं में से एक माना जाता है।

3. तीन तलाक कानून

मुस्लिम महिलाओं को तत्काल तीन तलाक से सुरक्षा देने के मकसद से कानून बनाया गया। सरकार ने इसे महिला अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।

4. वस्तु एवं सेवा कर (GST)

पूरे देश को “एक राष्ट्र, एक कर” की व्यवस्था के तहत लाने की कोशिश की गई। इसे स्वतंत्र भारत का सबसे बड़ा कर सुधार माना जाता है।

5. नोटबंदी (2016)

500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का फैसला भारतीय आर्थिक इतिहास के सबसे चर्चित और विवादास्पद निर्णयों में गिना जाता है।

6. नागरिकता संशोधन कानून (CAA)

पड़ोसी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना झेलकर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने के लिए सीएए कानून बनाकर लागू करना मानवीय दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक फैसला रहा।

7. नई शिक्षा नीति (NEP 2020)

करीब 34 साल बाद शिक्षा नीति में व्यापक बदलाव किया गया। स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक एक नई संरचना लागू की गई।

8. कोविड-19 टीकाकरण अभियान

भारत ने दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में से एक चलाया और करोड़ों लोगों तक वैक्सीन पहुंचाई।

9. डिजिटल इंडिया और UPI क्रांति

डिजिटल भुगतान की व्यवस्था ने भारत को दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम पेमेंट अर्थव्यवस्थाओं की कतार में ला खड़ा किया।

10. नया संसद भवन और ‘कर्तव्य पथ’

गुलामी के प्रतीकों को पीछे छोड़ते हुए सरकार ने रिकॉर्ड समय में देश को नया और अत्याधुनिक संसद भवन सौंपा। राजपथ का नाम बदलकर ‘कर्तव्य पथ’ करना और औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति दिलाना इस दौर की बड़ी उपलब्धि रही।

11. ऑपरेशन सिंदूर और नई सुरक्षा नीति (2025)

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई सैन्य और कूटनीतिक नीति को सरकार ने एक निर्णायक कार्रवाई के रूप में पेश किया।

12. भारतीय न्याय संहिता (BNS): कानूनों का स्वदेशीकरण

अंग्रेजों के जमाने के 150 साल से भी पुराने आईपीसी (IPC) और सीआरपीसी (CrPC) को बदलकर ‘भारतीय न्याय संहिता’ लागू की गई, ताकि देश की न्याय व्यवस्था ‘दंड’ देने के बजाय ‘न्याय’ देने की अवधारणा पर काम कर सके।

इनके अलावा भी कई अहम कदम

इन बारह फैसलों के अलावा भी कई बड़े निर्णय लिए गए। सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर स्ट्राइक को आतंकवाद के खिलाफ भारत की आक्रामक रणनीति के प्रदर्शन के रूप में देखा गया, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा की राजनीति में बड़ा बदलाव आया।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना ने देश के 80 करोड़ से अधिक जरूरतमंदों को हर महीने मुफ्त राशन की गारंटी दी। वहीं आयुष्मान भारत योजना के तहत 60 करोड़ से अधिक गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मुहैया कराया गया, जिसने वैश्विक स्तर पर कल्याणकारी योजनाओं की परिभाषा ही बदल दी।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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