पीएम नरेंद्र मोदी का बड़ा बयान: जो कानून में वर्जित नहीं, उसके लिए अब अनुमति की जरूरत नहीं राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 3
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शासन के बदलते स्वरूप पर जोर देते हुए कहा कि सरकार और नागरिकों के बीच का संबंध शक के बजाय भरोसे पर टिका होना चाहिए। उन्होंने पुरानी सरकारों के लाइसेंस राज पर कड़ा प्रहार करते हुए देश में आए रिफॉर्म्स और तेजी से बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर पर विस्तार से बात की।

सरकार और नागरिकों के बीच भरोसे का रिश्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक मीडिया कार्यक्रम के दौरान शासन और नागरिकों के संबंधों को लेकर अपनी स्पष्ट राय रखी। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश में सरकार और उसके नागरिकों के बीच का रिश्ता संदेह पर नहीं, बल्कि आपसी भरोसे की नींव पर खड़ा होना चाहिए। प्रधानमंत्री के अनुसार, 21वीं सदी का भारत केवल नियमों में बदलाव नहीं कर रहा है, बल्कि इन नियमों के पीछे की वैचारिक सोच को भी पूरी तरह से बदल रहा है। अब सरकार का जोर नागरिकों पर भरोसा करने और उन्हें अधिक से अधिक स्वायत्तता देने पर है।

परमिटेड अनलेस प्रोहिबिटेड का नया युग

पीएम ने अपनी सरकार के कामकाज के तरीके में आए बड़े बदलाव का जिक्र करते हुए कहा कि पहले के समय में हर छोटे काम के लिए सरकारी अनुमति लेना एक अनिवार्य मजबूरी थी। लेकिन अब सरकार 'परमिटेड अनलेस प्रोहिबिटेड' यानी 'अनुमति की आवश्यकता तभी जब कानून में मना हो' जैसे फ्रेमवर्क पर काम कर रही है। इसका सीधा और सरल अर्थ यह है कि यदि कोई कार्य कानून की दृष्टि में वर्जित या अवैध नहीं है, तो उसके लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने या परमिशन लेने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस दृष्टिकोण से देश के हर क्षेत्र में सुधारों की प्रक्रिया तेज हो गई है और भारत दुनिया के लिए विकास की एक नई किरण बनकर उभरा है।

लाइसेंस राज की विफलता और बेरोजगारी

प्रधानमंत्री ने पिछली सरकारों की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पहले की नीतियां आम लोगों को केवल अभाव की स्थिति में रखने के लिए बनाई गई थीं। उस दौर के लाइसेंस राज के कारण लोग अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए भी सरकार के सामने गिड़गिड़ाने के लिए मजबूर थे। उस प्रणाली ने देश में बेरोजगारी के बोझ को काफी हद तक बढ़ा दिया था। इसके विपरीत, आज की सरकार का पूरा ध्यान गवर्नेंस में सुधार और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्योगों को इनाम मिलना चाहिए, न कि बाधाओं का सामना करना पड़े।

प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव से रोजगार की नई उम्मीद

पीएम मोदी ने अपनी सरकार के पीएलआई (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) मॉडल पर प्रकाश डालते हुए बताया कि आज हम ऐसी नीति पर काम कर रहे हैं जिससे ज्यादा उत्पादन करने वाली इंडस्ट्रीज को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने पुरानी व्यवस्था की तुलना करते हुए इसे 'प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट' मॉडल बताया, जिससे देश को पहले नुकसान उठाना पड़ा था। अब इस नए प्रोत्साहन आधारित मॉडल की बदौलत भारत में रोजगार के शानदार और नए अवसर सृजित हो रहे हैं।

डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में बड़ी क्रांति

देश के डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर चर्चा करते हुए पीएम ने कहा कि भारत में आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा उपलब्ध है। साथ ही, देश अब सस्ते और अत्याधुनिक मोबाइल फोन का निर्माण कर रहा है। उन्होंने एक महत्वपूर्ण बदलाव का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले बिना सरकार की अनुमति के भारत का मैप तक नहीं बनाया जा सकता था। उस समय विदेशी सैटेलाइट्स को भारत को मैप करने की सुविधा थी, लेकिन अपने ही देश के लोगों के लिए इसे वर्जित कर रखा था। सरकार ने इस निरर्थक और पुरानी व्यवस्था को जड़ से खत्म कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीमावर्ती इंफ्रास्ट्रक्चर अब देश की ताकत बन चुका है, जिसे पहले कमजोरी की तरह देखा जाता था। चाहे भारतीय रेलवे हो, दिल्ली मेट्रो या नमो रैपिड रेल, हर जगह सुधारों की तेज गति दिखाई दे रही है, जो यह साबित करती है कि भारत अब बहुत ही तीव्र गति से विकसित हो रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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