पीएम जन धन योजना के 12 साल पूरे, आर्थिक समावेशन के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हुई यह पहल राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 5
भारत में वित्तीय समावेशन को नई दिशा देने वाली प्रधानमंत्री जन धन योजना ने 12 साल का सफर पूरा कर लिया है, जिसके तहत अब तक 59.09 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं।

देश में वित्तीय क्रांति का आधार बनी पीएम जन धन योजना

प्रधानमंत्री जन धन योजना, जिसे पीएम-जेडीवाई के नाम से भी जाना जाता है, ने अपने 12 वर्षों के सफल कार्यकाल में भारत की बैंकिंग प्रणाली को पूरी तरह से बदल दिया है। वर्ष 2014 में शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश के हर नागरिक को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना था। आज यह योजना वित्तीय समावेशन की एक ऐसी मिसाल बन गई है, जिसने न केवल वंचित वर्गों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ा है, बल्कि उन्हें ऋण, बीमा और पेंशन जैसे जरूरी वित्तीय सुरक्षा कवच भी उपलब्ध कराए हैं।

खातों की संख्या में अभूतपूर्व उछाल

पिछले 12 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस योजना की सफलता का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। वर्ष 2015 में जहां पीएम-जेडीवाई खातों की कुल संख्या 14.72 करोड़ थी, वहीं 19 अगस्त 2026 तक यह आंकड़ा बढ़कर 59.09 करोड़ तक पहुंच गया है। इस उपलब्धि का एक खास पहलू यह है कि इसमें से 32.92 करोड़ खाते महिला लाभार्थियों के नाम पर हैं, जो देश की आधी आबादी के आर्थिक सशक्तीकरण को दर्शाता है।

वित्तीय समावेशन सूचकांक में उल्लेखनीय प्रगति

योजना के प्रभाव का आकलन केवल खातों की संख्या से नहीं, बल्कि वित्तीय समावेशन सूचकांक से भी होता है। साल 2018 में यह सूचकांक 53.9 के स्तर पर था, जो 2026 तक बढ़कर 67 के आंकड़े तक पहुंच गया है। यह वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि देश का हर वर्ग अब बचत, बीमा और डिजिटल भुगतान जैसी सुविधाओं का लाभ ले रहा है। इसी व्यापक प्रभाव के चलते, जनवरी 2015 में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इस अभियान को वैश्विक स्तर पर मान्यता दी थी। इसके अलावा, आईएमएफ और विश्व बैंक जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी भारत की इस बैंकिंग पहल की सराहना करते हुए इसे औपचारिक वित्तीय तंत्र को मजबूत करने वाला बताया है।

योजना की पात्रता और खाता खोलने की प्रक्रिया

प्रधानमंत्री जन धन योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका सरल स्वरूप है। भारत का कोई भी नागरिक, जिसकी आयु की कोई ऊपरी सीमा नहीं है, इस योजना के तहत अपना खाता खुलवा सकता है। खाता खोलने के लिए निम्नलिखित प्रक्रिया का पालन करना होता है:

  • कोई भी पात्र व्यक्ति अपनी नजदीकी बैंक शाखा या बैंक मित्र के पास जाकर संपर्क कर सकता है।
  • खाता खोलने के लिए आवश्यक केवाईसी दस्तावेज जमा करने होते हैं।
  • सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद बैंक खाते को सक्रिय कर दिया जाता है।
  • खाता धारक चाहें तो संयुक्त खाता भी खुलवाने का विकल्प चुन सकते हैं।

इस योजना की सबसे अच्छी बात यह है कि बैंक खातों में न्यूनतम शेष राशि बनाए रखने का कोई दबाव नहीं होता।

खाताधारकों को मिलने वाले विशेष लाभ

पीएम-जेडीवाई के तहत खाता खोलने वाले नागरिकों को कई तरह की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। लाभार्थियों को रुपे डेबिट कार्ड की सुविधा मिलती है, साथ ही उन्हें दुर्घटना बीमा कवर भी दिया जाता है, जिसके लिए उन्हें कोई अतिरिक्त प्रीमियम नहीं चुकाना पड़ता। योजना का एक और बड़ा फायदा 10,000 रुपये तक का ओवरड्राफ्ट है, जो खाते के संतोषजनक संचालन के आधार पर लाभार्थी को आपातकालीन जरूरतों के लिए उपलब्ध कराया जाता है।

आर्थिक भागीदारी का एक नया दौर

पिछले 12 वर्षों के दौरान खातों में जमा धनराशि में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। मार्च 2015 में यह राशि 15,670 करोड़ रुपये थी, जो 19 अगस्त 2026 तक 20 गुना बढ़कर 3,16,514 करोड़ रुपये हो गई है। यह आंकड़ा न केवल बैंकिंग के प्रति लोगों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है, बल्कि समाज के कम आय वाले परिवारों में बचत की आदत के विकसित होने का भी संकेत है। यह योजना केवल बैंकों की पहुंच बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वंचित समुदायों में एक नया आर्थिक आत्मविश्वास पैदा कर रही है, जिससे देश की समग्र अर्थव्यवस्था में हर वर्ग की मजबूत भागीदारी सुनिश्चित हो रही है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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