मोरिंगा की 'PKM-1' किस्म किसानों के लिए साबित हो रही फायदेमंद, कम खर्च में बढ़िया आमदनी बिहार एक घंटा पहले 4
सहजन की उन्नत किस्म पीकेएम-1 साल में दो बार फल देती है और इसकी खेती में न ज्यादा सिंचाई की जरूरत है और न ही अधिक उपजाऊ मिट्टी की। बिहार के कई जिलों के किसान इसे कम लागत में अपनाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।

बिहार के पश्चिम चंपारण समेत कई जिलों में किसान अब परंपरागत फसलों के साथ-साथ नगदी फसलों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसी ही एक फसल है सहजन की उन्नत किस्म 'पीकेएम-1', जिसे किसानों के लिए किसी खजाने से कम नहीं आंका जा रहा है। औषधीय गुणों से भरपूर होने, साल में दो बार फल देने और बाजार में लगातार बनी रहने वाली मांग के कारण यह किस्म कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल साबित हो रही है।

इस किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी खेती के लिए न तो अधिक सिंचाई की आवश्यकता पड़ती है और न ही बहुत उपजाऊ मिट्टी की। किसान इसे खेत की मेढ़ पर भी आसानी से लगा सकते हैं। पश्चिम चंपारण सहित बिहार के कई जिलों के किसान इसकी खेती कर बेहतर आमदनी हासिल कर रहे हैं।

पहले ही साल से शुरू हो जाती है पैदावार

मझौलिया प्रखंड के रुलही गांव के किसान परशुराम सिंह, बनकट मुसहरी गांव के रविकांत पांडे और नरकटियागंज प्रखंड के मुसहरवा गांव के कमलेश यादव बताते हैं कि पीकेएम-1 सहजन का पौधा रोपण के पहले वर्ष से ही फल देना शुरू कर देता है। किसानों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में एक पौधे से एक सीजन में 10 किलो तक सहजन की फलियां आसानी से मिल जाती हैं। चूंकि यह किस्म साल में दो बार फल देती है, इसलिए पहले ही साल एक पौधे से 20 से 30 किलो तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

हजार पौधों से हजारों किलो उपज

किसान परशुराम सिंह ने अपने करीब दो हेक्टेयर खेत की मेढ़ पर लगभग एक हजार पौधे लगाए हैं। उनका कहना है कि यदि एक पौधे से औसतन 20 किलो सहजन भी मिल जाए, तो कुल उत्पादन 20 हजार किलो तक पहुंच सकता है। यही कारण है कि अब कई किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

कम लागत में बढ़िया मुनाफा

रविकांत पांडे बताते हैं कि पीकेएम-1 सहजन का एक पौधा 40 से 50 रुपये में आसानी से उपलब्ध हो जाता है। वहीं इसकी देखभाल पर सालाना करीब 200 रुपये प्रति पौधा खर्च आता है। बाजार में सहजन की कीमत भी किसानों को अच्छा लाभ देती है। खास मौसम में इसका भाव 100 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है, जबकि आम दिनों में भी यह 50 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक के दाम पर बिक जाता है।

पत्तियों की भी जबरदस्त मांग

सहजन की केवल फलियां ही नहीं, बल्कि इसकी पत्तियां भी बाजार में खूब मांग में रहती हैं। औषधीय गुणों और पोषक तत्वों से भरपूर होने के कारण मुर्गीपालन, पशुपालन और मत्स्य पालन से जुड़े लोग भी इसकी पत्तियां खरीदते हैं। सहजन की पत्तियों में प्रोटीन, विटामिन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं।

यही वजह है कि फिटनेस के शौकीन लोग और मांसपेशियां बढ़ाने की चाह रखने वाले युवा भी मोरिंगा पाउडर का इस्तेमाल करते हैं, जो इन्हीं पत्तियों से तैयार किया जाता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत, कम देखभाल और बेहतर बाजार मूल्य के चलते पीकेएम-1 सहजन की खेती किसानों की आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प बनकर उभर रही है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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