उत्तराखंड
3 घंटे पहले
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धार्मिक पर्यटन की नई पहचान बना कालापानी
उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में स्थित 12 हजार फीट की ऊंचाई पर बसा कालापानी क्षेत्र आजकल अपनी भौगोलिक और सामरिक चर्चाओं से हटकर धार्मिक पर्यटन के एक नए अध्याय के रूप में उभर रहा है। बर्फीली चोटियों से घिरे इस इलाके में एक तरफ भारतीय सुरक्षा बलों की कड़ी मुस्तैदी है, तो दूसरी तरफ यहाँ पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। आदि कैलाश यात्रा मार्ग पर स्थित होने के कारण इस दुर्गम स्थल की दिव्यता पर्यटकों को तेजी से अपनी ओर आकर्षित कर रही है।
व्यास गुफा और काली मंदिर की महिमा
इस क्षेत्र का सबसे बड़ा आकर्षण महर्षि व्यास की गुफा और पवित्र काली मंदिर है। मान्यता है कि महर्षि व्यास ने इसी गुफा में बैठकर घोर तपस्या की थी, जिससे यह स्थान भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र बन गया है। इसके अलावा, यहीं से पवित्र काली नदी का उद्गम भी होता है, जिसे लोग बेहद पूजनीय मानते हैं। इन धार्मिक स्थलों की मौजूदगी ने इसे आस्था का जीवंत केंद्र बना दिया है।
सामरिक महत्व और सुरक्षा
कालापानी का क्षेत्र भौगोलिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है क्योंकि यह भारत और नेपाल की सीमा के पास स्थित है और चीन की सीमा के भी काफी करीब है। लगभग 34 वर्ग किलोमीटर में फैला यह इलाका लंबे समय से सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद अहम रहा है। 1956 से ही यहां भारतीय सुरक्षा बलों की तैनाती रही है और वर्तमान में भी भारतीय सेना, ITBP और SSB के जवान यहां निरंतर मुस्तैद रहकर सुरक्षा व्यवस्था संभाले हुए हैं। हालांकि, काली नदी के उद्गम स्थल को लेकर नेपाल के साथ सीमा विवाद चर्चा में रहता है, लेकिन इसके बावजूद यहां की धार्मिक आभा और पर्यटकों की आवाजाही निरंतर बनी हुई है।
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